पूर्वी चंपारण में आपराधिक मामलों से जुड़ी इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब ऑनलाइन मिलेंगी। जिला प्रशासन ने दलाली प्रथा पर अंकुश लगाने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पूरी तरह ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस नई प्रणाली के तहत, पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम मौके पर ही रिपोर्ट तैयार कर उसे तत्काल ऑनलाइन सबमिट करेगी। डॉक्टर ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करेंगे इसी तरह, मारपीट या अन्य घटनाओं में घायल व्यक्ति की इंजुरी रिपोर्ट भी डॉक्टरों द्वारा तुरंत ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। यह कदम रिपोर्ट में हेरफेर की संभावना को काफी हद तक समाप्त कर देगा। पहले रिपोर्ट में देरी, गड़बड़ी या दलालों की भूमिका की शिकायतें आम थीं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती थी। अब डिजिटल सिस्टम लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। अनावश्यक दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी इस पहल का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा, जिन्हें रिपोर्ट के लिए अनावश्यक दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही, पुलिस को भी जांच में तेजी लाने में मदद मिलेगी, जिससे आपराधिक मामलों के निष्पादन में गति आएगी। जिला प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाएगा, बल्कि आपराधिक मामलों के निपटारे में भी पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करेगा। पूर्वी चंपारण में आपराधिक मामलों से जुड़ी इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब ऑनलाइन मिलेंगी। जिला प्रशासन ने दलाली प्रथा पर अंकुश लगाने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि इंजुरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पूरी तरह ऑनलाइन करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस नई प्रणाली के तहत, पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम मौके पर ही रिपोर्ट तैयार कर उसे तत्काल ऑनलाइन सबमिट करेगी। डॉक्टर ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करेंगे इसी तरह, मारपीट या अन्य घटनाओं में घायल व्यक्ति की इंजुरी रिपोर्ट भी डॉक्टरों द्वारा तुरंत ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। यह कदम रिपोर्ट में हेरफेर की संभावना को काफी हद तक समाप्त कर देगा। पहले रिपोर्ट में देरी, गड़बड़ी या दलालों की भूमिका की शिकायतें आम थीं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती थी। अब डिजिटल सिस्टम लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। अनावश्यक दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी इस पहल का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा, जिन्हें रिपोर्ट के लिए अनावश्यक दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही, पुलिस को भी जांच में तेजी लाने में मदद मिलेगी, जिससे आपराधिक मामलों के निष्पादन में गति आएगी। जिला प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाएगा, बल्कि आपराधिक मामलों के निपटारे में भी पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करेगा।


