Inhaled Insulin India: “क्या बिना इंजेक्शन के डायबिटीज कंट्रोल हो सकती है?” यह सवाल डॉक्टरों से सबसे ज्यादा पूछा जाता है, खासकर तब जब इंसुलिन शुरू करने की बात आती है। बहुत से मरीज इंसुलिन के इंजेक्शन से डरते हैं, जिस वजह से वे इलाज टालते रहते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, इस डर को इंसुलिन इनर्शिया कहा जाता है और यही ब्लड शुगर कंट्रोल न होने की बड़ी वजह बनता है, जिससे आगे चलकर गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।
इंजेक्शन का डर क्यों बनता है समस्या
पुणे के डीपीयू सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. मिलिंद पाटिल बताते हैं कि आजकल की इंसुलिन सुइयां बहुत पतली होती हैं और दर्द भी न के बराबर होता है, लेकिन फिर भी कई मरीज मानसिक रूप से इंजेक्शन लेने से डरते हैं। इस डर की वजह से लोग कभी-कभी डोज मिस कर देते हैं या इंसुलिन लेना ही छोड़ देते हैं। कुछ लोगों के लिए दफ्तर या यात्रा के दौरान इंसुलिन लगाना भी असुविधाजनक होता है। ऐसे मरीजों के लिए अब एक नया विकल्प सामने आया है इनहेल्ड इंसुलिन।
क्या है इनहेल्ड इंसुलिन
इनहेल्ड इंसुलिन को सूंघकर लिया जाता है, इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती। भारत में इसे हाल ही में Afrezza नाम से लॉन्च किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह उन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो बार-बार इंजेक्शन लेने से बचते हैं।
यह कैसे काम करता है
मुंबई के डॉक्टर डॉ. प्रणव घोडी बताते हैं कि इनहेल्ड इंसुलिन फेफड़ों के जरिए सीधे खून में पहुंचता है। यह तेजी से काम करता है और शरीर से जल्दी बाहर भी हो जाता है। इसे खाने से ठीक पहले लिया जाता है ताकि खाने के बाद बढ़ने वाली शुगर को कंट्रोल किया जा सके। यह छोटा सा इनहेलर होता है, जिसमें तय मात्रा की कार्ट्रिज होती है। इसे दिन में तीन बार नाश्ता, दोपहर का खाना और रात के खाने से पहले लिया जा सकता है।
क्या यह इंजेक्शन से बेहतर है?
डॉक्टरों के मुताबिक, इनहेल्ड इंसुलिन इंजेक्शन से ज्यादा ताकतवर नहीं है, लेकिन इसके कुछ फायदे हैं:
- इंजेक्शन से डरने वालों के लिए आसान
- दफ्तर और यात्रा में इस्तेमाल करना सरल
- सुई या सिरिंज साथ रखने की जरूरत नहीं
- इलाज को अपनाने में सहूलियत
क्या यह इंजेक्शन की जगह पूरी तरह ले सकता है?
नहीं। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को अब भी बेसल इंसुलिन इंजेक्शन के रूप में लेना ही होगा। इनहेल्ड इंसुलिन सिर्फ खाने के समय वाली इंसुलिन का विकल्प है। यह इंसुलिन अस्थमा, COPD, फेफड़ों की बीमारी या धूम्रपान करने वालों के लिए सुरक्षित नहीं है। इसे शुरू करने से पहले और बाद में फेफड़ों की जांच जरूरी होती है।


