Mobile Recharge Price Hike 2026: आज के दौर में मोबाइल हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है, जिसके बिना एक पल गुजारना भी मुश्किल लगता है। लेकिन अब इसी मोबाइल को चालू रखना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। अगर आप सोच रहे थे कि साल 2026 की शुरुआत सुकून से होगी, तो थोड़ा संभल जाइए। खबर आ रही है कि जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) जैसी दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर आपके मोबाइल रिचार्ज के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
जून 2026 तक 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इन दिनों रिचार्ज की कीमतों को लेकर काफी चर्चा है। ‘IndianTechGuide’ जैसे हैंडल्स की मानें तो जून 2026 तक मोबाइल टैरिफ में 15 प्रतिशत तक का इजाफा देखा जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि जो रिचार्ज आज आपको महंगा लग रहा है, उसके लिए आने वाले कुछ महीनों में आपको और भी ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि कीमतें बढ़ाने का यह सिलसिला अब हर दो-तीन महीने में एक आम बात जैसा बनता जा रहा है।
आखिर कंपनियां क्यों बढ़ा रही हैं दाम?
अब सवाल उठता है कि आखिर बार-बार कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? कंपनियों का अपना तर्क है। उनका कहना है कि पूरे देश में 5G नेटवर्क बिछाने में उन्होंने पानी की तरह पैसा बहाया है। भारी निवेश के बावजूद प्रति यूजर उनकी जो औसत कमाई (ARPU) है, वह अभी भी काफी कम है। इसी घाटे को पाटने और अपने बिजनेस को मुनाफे में लाने के लिए कंपनियां टैरिफ बढ़ाने का रास्ता चुन रही हैं। उनके हिसाब से यह बिजनेस चलाने के लिए जरूरी है, लेकिन ग्राहकों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं है।
मुफ्त की आदत और अब भारी कीमत
एक वक्त था जब भारत में डेटा और कॉलिंग लगभग मुफ्त या कौड़ियों के दाम मिल रही थी। इसी फ्री के दौर ने देश में मोबाइल यूजर्स की संख्या को 1.1 अरब के पार पहुंचा दिया। आज इंटरनेट हमारी बुनियादी जरूरत बन चुका है। चाहे वो ऑनलाइन पढ़ाई हो, ऑफिस का काम या फिर यूपीआई पेमेंट। जब हम पूरी तरह इस पर निर्भर हो चुके हैं, तब कंपनियां धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाकर अपना मुनाफा वसूल रही हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कह रहे हैं कि अब मोबाइल चलाना भी सोना या राशन खरीदने जैसा महंगा होता जा रहा है।
क्या फिर लौटेगा लैंडलाइन का जमाना?
महंगाई के इस दौर में अब सबकी नजरें TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) पर टिकी हैं। आम लोगों का मानना है कि सरकारी संस्थाओं को इस मामले में दखल देना चाहिए ताकि कंपनियों की मनमानी पर लगाम लग सके। लोगों के बीच तो अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि अगर मोबाइल रिचार्ज इसी रफ्तार से महंगे होते रहे, तो शायद वो दिन दूर नहीं जब लोग फिर से पुराने लैंडलाइन फोन की तरफ रुख करने लगेंगे।
हालांकि, अभी तक टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से इस 15% की बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन बाजार के संकेतों ने ग्राहकों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं।


