इंदौर के तिलक नगर में हुए अग्निकांड को एक हफ्ता बीत चुका है, मगर एक सवाल अभी भी बरकरार है कि मनोज पुगलिया के तीन मंजिला मकान में आग कैसे लगी? पुलिस, बिजली कंपनी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीमें जांच में जुटी हैं, लेकिन कोई ठोस कारण नहीं बता पा रहा है। इस मामले में विरोधाभास इस बात को लेकर है कि मकान में आग इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान लगी या फिर घर से सटे बिजली पोल में हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से। कार को चार्जिंग पर लगाया गया था या नहीं इसे लेकर परिवार के सदस्यों के बयान भी अलग-अलग है। वहीं स्मार्ट मीटर के डेटा के आधार पर बिजली कंपनी का तर्क है कि इलेक्ट्रिक कार को चार्जिंग पर लगाया गया था। सच क्या है इसका पता लगाने के लिए पुलिस को फायर ब्रिगेड, बिजली कंपनी और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की कंबाइंड रिपोर्ट का इंतजार है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट… एक हादसा, दो थ्योरी: पोल का करंट बनाम कार की चार्जिंग पहली थ्योरी: कार चार्जिंग के दौरान लगी आग
प्रारंभिक तौर पर कार चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट को ही आग लगने का जिम्मेदार माना गया था। हादसे के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने बताया था कि आग की शुरुआत घर के बाहर चार्ज हो रही ईवी कार (टाटा पंच) में शॉर्टसर्किट से हुई। स्पार्किंग से इलेक्ट्रिक बोर्ड, मीटर व मुख्य केबल में आग लगी, जो बिजली पोल तक फैल गई। वहीं हादसे में बचे मनोज के छोटे बेटे हर्षित ने भी कहा था कि इलेक्ट्रिक कार उनकी ही थी और रात में उन्होंने ही चार्ज पर लगाई थी। सुबह 4 बजे पापा ने जगाया, लेकिन जैसे ही आगे बढ़ा, धुएं में बेहोश हो गया। होश आया तो एंबुलेंस में था। उन्होंने कहा आग इतनी तेजी से फैली कि कोई निकल नहीं सका। इस थ्योरी को दो दिन बाद मनोज के बड़े बेटे सौरभ ने खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब परिवार से मिलने पहुंचे तो सौरभ ने कहा कि आग की वजह इलेक्ट्रिक कार नहीं हो सकती। ये आरोप लगाया कि उनके घर के पास लगे बिजली के पोल से अक्सर चिंगारियां निकलती थीं, जिसकी शिकायत भी की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परिवार का दावा है कि उसी पोल में हुए शॉर्ट सर्किट की एक चिंगारी ने पहले कार को अपनी चपेट में लिया और फिर आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। हालांकि, हर्षित और सौरभ दोनों के बयान विरोधाभासी है। दूसरी थ्योरी: पोल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग दूसरी थ्योरी पहली वाली थ्योरी से बिलकुल उलट है। परिजन कह रहे हैं कि पोल में आग लगी जिसने विकराल रूप ले लिया। इस थ्योरी को पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी खारिज कर रही है। कंपनी के अफसरों का कहना है कि मनोज पुगलिया के घर स्मार्ट मीटर लगा था। इसमें मिनट टू मिनट डेटा सेव होता है। कंपनी ने इस डेटा के आधार पर दावा किया है कि रात को 11 बजे ईवी को चार्जिंग पर लगाया गया था। इसके बाद रात तीन बजे तक ईवी चार्ज होती रही। रात 3 बजे के बाद सिस्टम में कोई फाल्ट हुआ जिसकी वजह से चार्जिंग ऑटो कट ऑफ हो गई और सप्लाई बंद हो गई। सुबह करीब सवा चार बजे घर का लोड जीरो हो गया था। मौत का तीन मंजिला मकान: हर फ्लोर पर एक दर्दनाक कहानी ग्राउंड फ्लोर- भट्ठी बना लोहे का दरवाजा: यहां घर के मुखिया मनोज पुगलिया और उनकी पत्नी सो रहे थे। आग का एहसास होते ही वे मुख्य दरवाजे की ओर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग की लपटों ने लोहे के मुख्य दरवाजे को एक भट्ठी की तरह तपा दिया था। गर्मी की वजह से धातु फैल गई और उसका लॉक अंदर से जाम हो गया। मनोज और उनकी पत्नी उस दहकते दरवाजे को खोलने के लिए संघर्ष करते रहे, लेकिन नाकाम रहे। बाद में उनकी पत्नी किसी तरह ऊपर की मंजिल से बाहर निकलीं, लेकिन मनोज, विजय सेठिया और कार्तिक के शव यहीं से बरामद हुए। फर्स्ट फ्लोर- बालकनी बनी जीवनदायिनी: इस फ्लोर पर सौरभ, सौमिल, हर्षित और उनकी मां सुनीता थे। यहां किस्मत ने उनका साथ दिया। उनके कमरे के आगे एक बालकनी थी। आग और धुएं का गुबार जब तक यहां पहुंचता, उन्होंने बालकनी से पड़ोसियों को आवाज दी। पड़ोसियों की तत्काल मदद से ये चारों सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। लेकिन इसी फ्लोर पर सुमन खरे, रुचिका, राशि और तनय धुएं और आग की चपेट में आ गए। सेकेंड फ्लोर- दमघोंटू धुआं और मासूम जिंदगियां: सबसे दर्दनाक मंजर दूसरी मंजिल पर था। सीढ़ियों का रास्ता एक चिमनी की तरह काम कर रहा था, जो नीचे की आग और जहरीले धुएं को सीधे ऊपर के कमरों तक पहुंचा रहा था। यहां सिमरन और मनोज पुगलिया के शव मिले। उन्हें बचने या भागने का कोई मौका ही नहीं मिला। मनोज की बहू सिमरन का शव दरवाजे को पकड़े हुए बैठी अवस्था में मिला, जो बताता है कि उन्होंने आखिरी सांस तक बाहर निकलने की कोशिश की होगी। पुलिस की जांच, फोरेंसिक की चुनौती और उलझे हुए सबूत तिलक नगर थाना प्रभारी मनीष लोधा के अनुसार, पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें सभी 8 मौतों का कारण दम घुटना और झुलसना बताया गया है। लेकिन, पुलिस किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले फायर ब्रिगेड, बिजली कंपनी और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की संयुक्त रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। घटनाक्रम से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बिजली कंपनी का दावा…ओवरचार्जिंग से बैटरी बम की तरह फटी:इंदौर में ईवी चार्जिंग से ही लगी थी आग बेटे का दावा-EV से नहीं इलेक्ट्रिक पोल से निकली चिंगारी, बिजली बंद किए बिना पानी डाला; यही मौतों की वजह वक्त सबकुछ छीन सकता है…स्टेटस लिखकर सोए थे मनोज:फायर ब्रिगेड कर्मी ने काट दिया था प्रत्यक्षदर्शी का फोन इंदौर EV हादसा…4 महीने की गर्भवती थी बड़ी बहू:दुआओं से कोख में पल रही जिंदगी भी बुझी; खुशियों वाला घर 8 मौतों से मातम से भरा


