इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट में धार तक के हिस्से में एक बार फिर डेडलाइन पूरी हो गई और काम अधूरा ही रह गया। रेलवे ने धार तक के लिए फरवरी-2026 तक काम पूरा करने का टारगेट लिया था। अभी भी टीही के आगे टनल का काम अधूरा है। रेलवे की वैकल्पिक तैयारी यह भी है कि टीही टनल को छोड़कर पीथमपुर से धार तक सीआरएस इंस्पेक्शन करवाकर ट्रॉली और इंजन ट्रायल कर लिया जाए। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार टनल का काम संभवत: मई-जून तक पूरा हो जाएगा। हालांकि रेलवे की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक तारीख नहीं तय की गई है। इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट की बात करें तो इसमें लगातार देरी हो रही है। वैसे ही यह पूरा प्रोजेक्ट 15 साल से ज्यादा समय से देरी से चल रहा है। लगातार देरी और बार-बार टाइमलाइन बढ़ाने के बाद रेलवे ने धार तक के हिस्से को प्राथमिकता से पूरा करने का दावा किया था। रेलवे ने कहा करीब तीन किमी लंबी टनल में से ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, कुछेक हिस्से में काम बचा हुआ है। टनल के अंदर 500 मीटर हिस्से में ट्रैक भी बिछाया जा चुका है। उधर, लगातार देरी को लेकर सांसद शंकर लालवानी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा जल्द ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और उनसे पूछेंगे कि आखिर क्या कारण है कि लगातार प्रोजेक्ट में देरी हो रही है। पिछली बार बैठक में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने फरवरी तक काम पूरा करने की बात कही थी। 15 साल देरी से चल रहा प्रोजेक्ट, लागत बढ़ रही जिस टनल से देरी हो रही, वह मूल प्रोजेक्ट में थी ही नहीं : रेलवे एक्सपर्ट टीही के आगे जिस टनल की वजह से लगातार यह प्रोजेक्ट लेट हो रहा है, बार-बार रेलवे अधिकारी टाइमलाइन बढ़ा रहे हैं, वह टनल मूल प्रोजेक्ट में थी ही नहीं। बाद में टनल का प्रस्ताव तैयार किया गया। रेलवे पैसेंजर एमीनिटीज कमेटी के पूर्व सदस्य और रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा जब 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी। 2013-14 में टीही के आगे तीन किमी टनल प्रस्तावित कर दी गई। टीही टनल का काम 2017-18 में शुरू हुआ। इसके बाद कोरोना के दौरान कॉन्ट्रैक्ट शॉर्ट टर्मिनेट कर दिया था। जब कॉन्ट्रैक्ट शॉर्ट टर्मिनेट हुआ था।


