शतरंज की दुनिया में इन दिनों खेल से ज्यादा चर्चा सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर हो रही है। बता दें कि साल 2015 में एक घटना ने इस खतरे की झलक दिखा दी थी, जब अनुभवी ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से एक युवा खिलाड़ी से हैरान कर देने वाले मुकाबले में हार गए थे।मौजूद जानकारी के अनुसार दिल्ली में हुए एक प्रतियोगिता में 19 साल के एक खिलाड़ी ने बेहद सटीक चालों के साथ खेलते हुए सभी को चौंका दिया था। मुकाबले के बाद जब जांच की गई तो उसके पास छिपे हुए मोबाइल और बेहद छोटा ईयरफोन बरामद हुआ। इस घटना ने शतरंज में तकनीकी धोखाधड़ी के खतरे को उजागर कर दिया था।गौरतलब है कि अब साल 2026 में स्थिति और भी सख्त हो गई है। विश्व स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों की कई स्तरों पर जांच की जा रही है। मैच से पहले और बाद में स्कैनिंग, धातु डिटेक्टर और अन्य उपकरणों के जरिए निगरानी की जाती है। हालांकि इस पर खिलाड़ियों के बीच मतभेद भी सामने आ रहे हैं।विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हिकारू नाकामुरा ने इन सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाते हुए इसे जरूरत से ज्यादा बताया है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे वे कोई गुप्त मिशन पर हों। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ का मानना है कि खेल की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी हैं।भारतीय खिलाड़ियों की राय इस मुद्दे पर संतुलित नजर आती है। अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी ने कड़े नियमों का समर्थन करते हुए कहा है कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में ऐसे उपाय जरूरी हैं, ताकि मुकाबले केवल प्रतिभा के आधार पर तय हों। इसी तरह अन्य भारतीय ग्रैंडमास्टर भी मानते हैं कि यह प्रक्रिया भले थोड़ी असुविधाजनक हो, लेकिन खेल की पवित्रता के लिए जरूरी है।वहीं प्रवीण थिप्से ने एक अलग सुझाव दिया है। उनका मानना है कि मुकाबलों का सीधा प्रसारण कुछ समय के लिए रोका जाए या देरी से दिखाया जाए, ताकि बाहर से मदद मिलने की संभावना कम हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ियों के लिए मोबाइल और अन्य उपकरणों को लेकर नियम कई बार व्यवहारिक परेशानी पैदा करते हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार युवा खिलाड़ियों का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका मानना है कि इस स्तर पर खेलने के लिए कुछ अतिरिक्त नियमों को स्वीकार करना जरूरी है। वे इसे खेल के हित में उठाया गया कदम मानते हैं।
Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi


