PM Narendra Modi Russia Visit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 में रूस दौरे की संभावना पर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) ने उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि रूस को उम्मीद है कि पीएम मोदी 2026 में रूस का दौरा करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।
लावरोव ने क्या कहा?
सर्गेई लावरोव ने ‘इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा’ शीर्षक वाले सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि रूस 2026 में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का इंतजार कर रहा है। उन्होंने भारत-रूस संबंधों को दशकों पुरानी अटूट दोस्ती बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर भरोसेमंद संवाद हमेशा मजबूत साझेदारी की नींव रहा है। सम्मेलन के दौरान रूसी विदेश मंत्री लावरोव के साथ-साथ भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी मंच साझा किया और दोनों देशों के साझा एजेंडे पर अपनी बात रखी।
पुतिन ने दिया था निमंत्रण
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने दिसंबर 2025 में अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को रूस आने का निमंत्रण दिया था। यह दौरा 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के तहत होने की संभावना है, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा होगी।
व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
इस प्रस्तावित दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर बातचीत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, वैश्विक मंचों पर भी भारत और रूस के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
BRICS और वैश्विक मंच पर सहयोग
2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग और बढ़ सकता है। इससे बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस की साझेदारी को नई दिशा मिलने की संभावना है।
पहले भी कई अहम दौरे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी रूस के कई महत्वपूर्ण दौरे कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 में उन्होंने कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लिया था, जबकि जुलाई 2024 में उनकी रूस यात्रा के दौरान उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द अपोस्टल’ से सम्मानित किया गया था।
रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंध रहे हैं। प्रस्तावित दौरे को इन संबंधों को और गहराई देने और भविष्य के सहयोग के नए रास्ते खोलने के रूप में देखा जा रहा है।


