भारत-नेपाल बॉर्डर कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक पूरी:किशनगंज में नेपाल चुनाव से 72 घंटे पहले सील होगी सीमा, सुरक्षा पर बनी सहमति

भारत-नेपाल बॉर्डर कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक पूरी:किशनगंज में नेपाल चुनाव से 72 घंटे पहले सील होगी सीमा, सुरक्षा पर बनी सहमति

भारत-नेपाल सीमा जिला समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बिराटनगर (मोरंग), नेपाल में गुरुवार को संपन्न हुई। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा, तस्करी रोकने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति व्यक्त की। नेपाल में आगामी चुनावों के मद्देनजर, मतदान से 72 घंटे पहले सीमा को सील करने का निर्णय लिया गया। बैठक में भारत की ओर से किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार और एसएसबी कमांडेंट सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। नेपाल की ओर से मोरंग और सुनसरी जिलों के पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हुए। बिहार के अररिया जिले के जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) पर भी भारत-नेपाल के सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त सुरक्षा रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना बैठक का उद्देश्य अधिकारियों ने सीमा पर नशीली दवाओं की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य गैरकानूनी कृत्यों को रोकने के लिए कड़ी चौकसी और बेहतर तालमेल पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए त्वरित सूचना साझा करने की रूपरेखा भी तैयार की। इस समन्वय बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना है। यह बैठक भारत-नेपाल के बीच साझा की जा रही सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में एक प्रत्यर्पण संधि हुई भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में एक प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसी संधि के तहत, भारत में अपराध कर नेपाल आए सुच्चा सिंह को 2 फरवरी 1966 को गिरफ्तार कर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को सौंपा गया था। पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों की हत्या के आरोपी सुच्चा का प्रत्यर्पण कई विवादों के बाद, नेपाल में गिरफ्तारी के लगभग एक वर्ष बाद संभव हो सका था। हालांकि, बाद में कोई प्रत्यर्पण न होने के कारण यह संधि लगभग निष्क्रिय हो गई थी। भारत-नेपाल सीमा जिला समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बिराटनगर (मोरंग), नेपाल में गुरुवार को संपन्न हुई। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा, तस्करी रोकने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति व्यक्त की। नेपाल में आगामी चुनावों के मद्देनजर, मतदान से 72 घंटे पहले सीमा को सील करने का निर्णय लिया गया। बैठक में भारत की ओर से किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार और एसएसबी कमांडेंट सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। नेपाल की ओर से मोरंग और सुनसरी जिलों के पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हुए। बिहार के अररिया जिले के जोगबनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) पर भी भारत-नेपाल के सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों ने संयुक्त सुरक्षा रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना बैठक का उद्देश्य अधिकारियों ने सीमा पर नशीली दवाओं की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य गैरकानूनी कृत्यों को रोकने के लिए कड़ी चौकसी और बेहतर तालमेल पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए त्वरित सूचना साझा करने की रूपरेखा भी तैयार की। इस समन्वय बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना है। यह बैठक भारत-नेपाल के बीच साझा की जा रही सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में एक प्रत्यर्पण संधि हुई भारत और नेपाल के बीच साल 1953 में एक प्रत्यर्पण संधि हुई थी। इसी संधि के तहत, भारत में अपराध कर नेपाल आए सुच्चा सिंह को 2 फरवरी 1966 को गिरफ्तार कर भारतीय सुरक्षा कर्मियों को सौंपा गया था। पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों की हत्या के आरोपी सुच्चा का प्रत्यर्पण कई विवादों के बाद, नेपाल में गिरफ्तारी के लगभग एक वर्ष बाद संभव हो सका था। हालांकि, बाद में कोई प्रत्यर्पण न होने के कारण यह संधि लगभग निष्क्रिय हो गई थी।  

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