Macron India Visit: भारत और फ्रांस की दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं रह गई है, बल्कि यह ‘पक्के दोस्त’ वाले भरोसे में बदल चुकी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक बार फिर भारत आ रहे हैं। इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें जमी हुई हैं, क्योंकि उनके सूटकेस में 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 35-40 बिलियन यूरो) की डिफेंस और स्ट्रेटेजिक डील्स की फाइलें हैं। ध्यान रहे कि एक भरोसेमंद सफर भारत और फ्रांस के रिश्तों की गहराई को समझने के लिए हमें 1998 में जाना होगा। जब भारत ने परमाणु परीक्षण (पोकरण-2) किया था, तब अमेरिका समेत पूरी दुनिया ने भारत पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। उस मुश्किल वक्त में फ्रांस अकेला पश्चिमी देश था, जो भारत के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहा। उसने न तो भारत की आलोचना की और न ही कोई प्रतिबंध लगाया। तभी से फ्रांस, रूस के बाद भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार (Strategic Partner) बन गया। आज चाहे यूएन में वीटो पावर का इस्तेमाल हो या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, पेरिस हमेशा नई दिल्ली की आवाज में आवाज मिलाता है।
3.25 लाख करोड़ की डील में क्या है खास ?
इस बार की ‘मेगा डील’ भारतीय सेना, खासकर नेवी के लिए गेम चेंजर साबित होगी। सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में तीन बड़े हिस्से हैं:
राफेल मरीन (Rafale-M): भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत (INS विक्रांत) के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद। यह समुद्र में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
स्कॉर्पीन सबमरीन: प्रोजेक्ट-75 के तहत 3 और नई स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियां बनाई जाएंगी, जो हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ को रोकने में मददगार होंगी।
जेट इंजन टेक्नोलॉजी: सबसे महत्वपूर्ण समझौता फाइटर जेट इंजन का है। फ्रांस की कंपनी ‘सफ्रान’ (Safran) अब भारत में ही इंजन बनाएगी और अपनी 100% टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर करेगी, जो भारत के ‘तेजस’ और भविष्य के AMCA फाइटर जेट्स के लिए संजीवनी होगी।
सिर्फ हथियार नहीं, तकनीक की दोस्ती
यह रिश्ता अब ‘खरीदार और दुकानदार’ का नहीं है। मैक्रों का यह दौरा ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने वाला है। रक्षा के अलावा, दोनों देश जैतापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट, स्पेस मिशन (ISRO-CNES) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) पर भी बड़े ऐलान कर सकते हैं। फ्रांस, यूरोप में भारत का सबसे करीबी दरवाजा है और भारत, एशिया में फ्रांस का सबसे बड़ा बाजार और साथी। 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के मौके पर शुरू होने वाली यह नई साझेदारी अगले 25 सालों (अमृतकाल) का रोडमैप तैयार करेगी।


