प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और अन्य संतों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित अभद्रता और मारपीट के विरोध में रायसेन में गुस्सा फूट पड़ा है। बुधवार को सर्व ब्राह्मण समाज और हिंदू संगठनों ने लामबंद होकर तहसील कार्यालय में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के लोगों ने घटना पर गहरा रोष जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान संघर्ष शर्मा ने कहा, “आजादी के पहले या बाद में संतों के साथ ऐसा व्यवहार कभी नहीं हुआ, जो अब हुआ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने संतों के बाल खींचे, उन पर लाठीचार्ज किया और उनके वस्त्र तक फाड़ दिए, जो अत्यंत निंदनीय है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान हुआ था विवाद ज्ञापन में बताया गया है कि यह घटना प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को हुई थी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों और अन्य संतों के साथ संगम तट पर स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोक दिया और स्नान करने से मना कर दिया। पालकी से उतारने की कोशिश की, बटुकों को पीटा आरोप है कि जब शंकराचार्य जी ने रोके जाने का कारण पूछा, तो पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की और उन्हें पालकी से जबरन उतारने का प्रयास किया। जब शिष्यों ने इसका विरोध किया, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस दौरान कई संतों और बटुक ब्राह्मणों के साथ मारपीट की गई और उनके वस्त्र फाड़ दिए गए। हिंदू समाज का कहना है कि यूपी पुलिस के इस दुर्व्यवहार से पूरे देश के संत और हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।


