टी20 विश्व कप 2026 के ब्रांड एंबेसडर रोहित शर्मा, आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता और पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम के साथ ट्रॉफी लेकर मैदान पर आए। इस दौरान रोहित ने वसीम अकरम को गर्मजोशी से गले लगाया और दोनों ने खुले दिल से बातचीत की।
India vs Pakistan, T20 World Cup 2026: भारत ने टी20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ रविवार को कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले में शानदार 61 रनों से जीत हासिल की। इस जीत के बाद भारतीय टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से पारंपरिक हैंडशेक नहीं किया। यह रुख टीम इंडिया ने एशिया कप 2025 से ही अपनाया हुआ है, वहां भी ऐसा ही विवादास्पद फैसला लिया गया था और काफी चर्चा हुई थी।
वसीम अकरम को रोहित ने गले लगाया
दूसरी ओर, मैच से पहले एक दिलचस्प और विपरीत तस्वीर सामने आई। पूर्व भारतीय कप्तान और टी20 विश्व कप 2026 के ब्रांड एंबेसडर रोहित शर्मा कोलंबो पहुंचे थे। वे आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता और पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम के साथ ट्रॉफी लेकर मैदान पर आए। इस दौरान रोहित ने वसीम अकरम को गर्मजोशी से गले लगाया और दोनों ने खुले दिल से बातचीत की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
भारत क्यों नहीं मिला रहा पाकिस्तान से हाथ
यह घटना कई सवाल खड़े करती है, अगर रोहित शर्मा वसीम अकरम को गले लगा सकते हैं, तो वर्तमान भारतीय टीम पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ क्यों नहीं मिला सकती? यह मुद्दा क्रिकेट जगत में गर्म बहस का विषय बन गया है। मशहूर कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भारत-पाकिस्तान मैचों के बदलते स्वरूप पर गहरी टिप्पणी की।
हर्षा भोगले ने भी उठे थे सवाल
उन्होंने कहा, “पहले ये मैच भावनाओं का रोलरकोस्टर होते थे। हर गेंद के साथ उम्मीद और निराशा का उतार-चढ़ाव महसूस होता था। जीत सिर्फ स्कोरबोर्ड पर नहीं, बल्कि दिलों में बस जाती थी और हार लंबे समय तक चुभती रहती थी। लेकिन अब वह गहरा भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। टेंशन और उम्मीदें अब भी हैं, मगर खेल का वह निजी असर पहले जैसा नहीं रहा। समय के साथ मैच की आत्मा बदलती नजर आ रही है।”
हर्षा भोगले ने आगे कहा कि क्रिकेट को अब बड़े राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना दिया गया है। जियोपॉलिटिकल मुद्दों को खेल से ज्यादा महत्व मिलने लगा है। मैच के आसपास का माहौल राष्ट्रवाद और राजनीतिक संदेशों से भर जाता है, जबकि खेल खुद पीछे छूटता जा रहा है। कभी-कभी ऐसा लगता है कि मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ी किसी बड़े राजनीतिक परिदृश्य का सिर्फ एक हिस्सा बनकर रह गए हैं। उनके इस नजरिए ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या खेल को पूरी तरह राजनीति से अलग रखा जा सकता है?
संजय मांजरेकर ने की ‘नो हैंडशेक’ नीति की आलोचना
पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भी इस ‘नो हैंडशेक’ नीति की कड़ी आलोचना की। अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने लिखा, “यह ‘नो हैंडशेक’ भारत द्वारा शुरू की गई बेकार चीज है। यह हमारे जैसे देश पर अच्छा नहीं लगता। या तो आप खेल भावना के तहत कायदे से खेलो, वरना खेलो ही मत।”
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