प्रसंगवश: जल ही जीवन है का मिशन मांगे पानी, घरों में नल की टोटियां सूखी

प्रसंगवश: जल ही जीवन है का मिशन मांगे पानी, घरों में नल की टोटियां सूखी

छत्तीसगढ़ में 26 फरवरी 2026 की स्थिति में नल कनेक्शन वाले परिवारों की संख्या 41,18,047 होने का सरकारी दावा है। जबकि प्रदेश में कुल परिवारों की संख्या 49,96,927 है। यानी कि प्रदेश में 82.41 प्रतिशत नल कनेक्शन वाले परिवार हैं। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक हर घर में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। विडंबना है कि निर्धारित समय-सीमा से 14 माह बाद भी प्रदेश में शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन ही नहीं हो पाया है। और जहां पर नल कनेक्शन लग चुके हैं, वहां भी सभी को पानी नहीं मिल पा रहा है। उन घरों में लगे नलों की टोटियां सूखी पड़ी हैं।

इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आजादी के 78 साल बाद भी गांवों में पानी के लिए लोगों को दूर-दूर तक जाना पड़ता है। खासकर महिलाओं को रोज कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ रहा है। इस वजह से उनका समय, मेहनत और सेहत तीनों प्रभावित होते हैं। पानी हमारे जीवन की सबसे जरूरी जरूरत है। इन सभी बातों को देख-समझ कर मोदी सरकार ने ‘हर घर जल’ के लक्ष्य के साथ जल जीवन मिशन शुरू किया, ताकि गांव-गांव तक पीने का पानी पहुंचाया जा सके।

अच्छे उद्देश्य के साथ शुरू की गई महत्वपूर्ण योजना की प्रगति छत्तीसगढ़ में संतोषजनक नहीं है। पहली बात यह कि शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन ही नहीं पहुंचा और दूसरी बात यह कि नल लग गए हैं तो उनमें पानी नहीं आ रहा है। कारण ये हैं कि जिम्मेदार कहीं पर टंकियां खड़ी करके भूल गए हैं तो अनेक स्थानों पर पाइपलाइन ही नहीं बिछ पाई। ये पानी टंकियां जर्जर होती जा रही हैं। यह शासन-प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर भी इंगित करता है। क्योंकि हर जिले में करोड़ों-अरबों रुपए का बजट सरकार ने हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए दे रखा है। कई जगहों से इसमें अनियमितताएं और लापरवाही की शिकायतें आ रही हैं। हालांकि राज्य सरकार ने पिछले दिनों जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाने, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कामकाज में कसावट तथा विभागीय कार्य प्रणाली में सुधार लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव भी किए हैं। सरकार को चाहिए कि इस ‘मिशन’ को मिशन मोड पर लेकर हर घर के नलों की टोटियों को तर करे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com

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