देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी जनजातीय बहुल राज्य छत्तीसगढ़ को मिलना गौरव की बात है। केंद्रीय खेलमंत्री ने राजधानी रायपुर में भव्य समारोह में इसका उद्घाटन किया। रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में 3 अप्रैल तक विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं होंगी। इस जनजातीय खेल महाकुंभ में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जनजातीय वर्ग के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का परिचय देश को करा रहे हैं और 3 अप्रैल तक कराएंगे। पहले ट्राइबल गेम्स के लिए करोड़ों रुपए का बजट भी आवंटित किया गया है। देश का यह पहला प्रतिष्ठित आयोजन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ की मेजबानी में अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुआ। देशभर से करीब 3800 खिलाड़ी-प्रबंधन ट्राइबल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ में हैं। इनके रुकने-खाने की व्यवस्थाएं कुछ इस तरह की गई है कि सभी को भोजन के लिए रायपुर में साइंस कॉलेज मैदान स्थित आयोजन स्थल पर ही आना होगा। सबसे ज्यादा अव्यवस्था भोजन-व्यवस्था को लेकर ही है। बताते हैं कि पहले ही दिन खिलाड़ियों को उनकी डाइट के अनुसार भोजन नहीं मिल सका था। स्टॉलों पर भोजन खत्म हो जा रहा था। खिलाड़ी खाली प्लेट लेकर एक स्टॉल से दूसरे स्टॉल भटकते नजर आए थे। हॉस्पिटैलिटी की पूरी जिम्मेदारी करीब 10 करोड़ में इवेंट कंपनी ओयो को सौंपी गई है। ऑफिशियल के स्टॉल्स को छोड़कर खिलाड़ियों के स्टॉल पर इवेंट कंपनी ओयो खाने की आपूर्ति ही ठीक से नहीं कर पा रही थी। हालांकि, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के हास्पिटैलिटी इंचार्ज के मुताबिक पहला दिन होने की वजह से थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन सभी कमियों को ठीक किया जा रहा है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। यह अच्छी बात है कि आयोजन-प्रबंधन ने तुरंत इस ओर ध्यान दिया। अच्छी व्यवस्थाएं करना और व्यवस्थाओं में सुधार करना इसलिए भी जरूरी हो जाता है कि यह देश का पहला आयोजन है और मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिली है। कहा भी जाता है कि फर्स्ट इम्प्रैशन इज लास्ट इम्प्रैशन। यानी कि पहली ही बार में अगर आपकी छवि खराब हो गई तो दूसरे राष्ट्रीय आयोजनों के मिलने में दिक्कत हो सकती है। सरकार को चाहिए कि इस प्रतिष्ठित आयोजन की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय निगरानी वह खुद करे। – अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com


