अररिया-फारबिसगंज बुनियाद केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर का उद्घाटन:लाभार्थियों को मिलेंगी आधार सहित सभी डिजिटल सुविधाएं

अररिया-फारबिसगंज बुनियाद केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर का उद्घाटन:लाभार्थियों को मिलेंगी आधार सहित सभी डिजिटल सुविधाएं

अररिया और फारबिसगंज के बुनियाद केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का विधिवत उद्घाटन किया गया है। जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, अररिया के सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने इन केंद्रों का शुभारंभ किया। यह पहल जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के प्रयासों का परिणाम है। सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि बुनियाद केंद्रों में सीएससी की शुरुआत से अब वृद्धजन, दिव्यांगजन, विधवा एवं अन्य लाभार्थियों को आधार से संबंधित सेवाएं, विभिन्न ऑनलाइन आवेदन और अन्य डिजिटल सुविधाएं प्राप्त करने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधाएं बुनियाद केंद्र परिसर में ही एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी अब आधार अपडेट, सरकारी योजनाओं के आवेदन, प्रमाणपत्र सेवाएं और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधाएं बुनियाद केंद्र परिसर में ही एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उनके समय और धन की बचत होगी। फारबिसगंज बुनियाद केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रबंधक सक्षम नवीन कुमार नवीन ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘डिजिटल बिहार’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे लाभार्थी एक ही स्थान पर सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के साथ-साथ सीएससी की डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। सभी उपलब्ध सेवाओं का लाइव प्रदर्शन किया कार्यक्रम के दौरान फारबिसगंज सीएससी संचालक रोहित रंजन और रितेश कुमार ने सभी उपलब्ध सेवाओं का लाइव प्रदर्शन किया। साथ ही, जिला प्रबंधक सीएससी रविंद्र कुमार ने सहायक निदेशक को सीएससी के माध्यम से प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं का विस्तृत डेमो दिया। इस अवसर पर बुनियाद केंद्र के प्रमुख कर्मी जैसे करुण कुमार (केस मैनेजर), तरन्नुम निगार (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट), कुमार साहेब (स्पीच एवं हियरिंग विशेषज्ञ), राजा कुमार, हरदेव मंडल, सनोज कुमार सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहे। सीएससी टीम से नदीम अहमद, सलमान जावेद और मेराज आलम मो असद भी शामिल हुए। यह उद्घाटन बुनियाद केंद्रों को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है, जहां पहले से ही फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और चश्मा वितरण जैसी स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाएं निःशुल्क मिल रही हैं। अब डिजिटल सेवाओं का जुड़ना लाभार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। अररिया और फारबिसगंज के बुनियाद केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का विधिवत उद्घाटन किया गया है। जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, अररिया के सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने इन केंद्रों का शुभारंभ किया। यह पहल जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के प्रयासों का परिणाम है। सहायक निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि बुनियाद केंद्रों में सीएससी की शुरुआत से अब वृद्धजन, दिव्यांगजन, विधवा एवं अन्य लाभार्थियों को आधार से संबंधित सेवाएं, विभिन्न ऑनलाइन आवेदन और अन्य डिजिटल सुविधाएं प्राप्त करने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधाएं बुनियाद केंद्र परिसर में ही एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी अब आधार अपडेट, सरकारी योजनाओं के आवेदन, प्रमाणपत्र सेवाएं और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधाएं बुनियाद केंद्र परिसर में ही एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उनके समय और धन की बचत होगी। फारबिसगंज बुनियाद केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रबंधक सक्षम नवीन कुमार नवीन ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘डिजिटल बिहार’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे लाभार्थी एक ही स्थान पर सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के साथ-साथ सीएससी की डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। सभी उपलब्ध सेवाओं का लाइव प्रदर्शन किया कार्यक्रम के दौरान फारबिसगंज सीएससी संचालक रोहित रंजन और रितेश कुमार ने सभी उपलब्ध सेवाओं का लाइव प्रदर्शन किया। साथ ही, जिला प्रबंधक सीएससी रविंद्र कुमार ने सहायक निदेशक को सीएससी के माध्यम से प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं का विस्तृत डेमो दिया। इस अवसर पर बुनियाद केंद्र के प्रमुख कर्मी जैसे करुण कुमार (केस मैनेजर), तरन्नुम निगार (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट), कुमार साहेब (स्पीच एवं हियरिंग विशेषज्ञ), राजा कुमार, हरदेव मंडल, सनोज कुमार सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहे। सीएससी टीम से नदीम अहमद, सलमान जावेद और मेराज आलम मो असद भी शामिल हुए। यह उद्घाटन बुनियाद केंद्रों को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है, जहां पहले से ही फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और चश्मा वितरण जैसी स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाएं निःशुल्क मिल रही हैं। अब डिजिटल सेवाओं का जुड़ना लाभार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।  

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