औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक उमगा पहाड़ पर सरस्वती पूजा के अवसर पर तीन दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उमगा पहाड़ को धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम माना जाता है। उमगा मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। यह बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में दूसरा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। मेले में औरंगाबाद जिले के अलावा सीमावर्ती गयाजी जिला के आमस, गुरुवा, गुरारू समेत झारखंड बॉर्डर से सटे इलाके के लोग भी पहुंचते हैं। उनका पहाड़ पर है 52 मंदिरों की श्रृंखला पहाड़ पर भगवान शिव, माता पार्वती, मां उमंगेश्वरी, दसभुजी गणेश और गौरीशंकर सहित कई देवताओं के मंदिर हैं, जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही पहाड़ की ओर कूच करते हैं। यहां लगभग 52 मंदिरों की श्रृंखला है, जो पहाड़ की ढलानों और चोटी तक फैली हुई है। हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता और धार्मिक महत्ता है, जिससे यह स्थान पूरी तरह से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इसके अतिरिक्त पहाड़ पर प्राचीन गुफाएं, तालाब, और प्राकृतिक छटा भी सैलानियों को आकर्षित करती हैं। तीन दिवसीय मेले की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में इस पहाड़ पर ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी और तभी से यह स्थल धार्मिक उत्सवों का केंद्र रहा है। मेले के दौरान सरस्वती पूजा, सूर्य पूजा, भगवान शिव-वनेश्वरी और अन्य देवताओं की आराधना की जाती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पहाड़ी की चोटी गौरी शंकर तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। जहां से सम्पूर्ण घाटी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षक है मेला बसंत पंचमी के दिन प्रारंभ होकर तीन दिनों तक चलता है। जिसमें खेल-तमाशे, चर्खी, मीना बाजार और मनोरंजन के साधन भी सजते हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बेहद आकर्षक है। हर ऋतु में यहां के हरे-भरे पहाड़, शांत वातावरण, और चट्टानों के बीच स्थित मंदिरों की शिल्पकारी दूर-दूर तक लोगों को खींचती है। उमगा पहाड़ और इसके मेले की परंपरा ने स्थानीय संस्कृति और धार्मिक जीवन में एक विशेष स्थान बनाया है, जिससे यह जगह साल भर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का प्रमुख केंद्र बनी रहती है। बड़ी बात है कि उमगा पहाड़ पर आयोजित मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। मेले के चारों तरफ जवानों की तैनाती की गई है। कमिटियों की ओर से मॉनिटरिंग भी की जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मेला के आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से भी चुस्त व्यवस्था की गई है। मदनपुर थाना की पुलिस लगातार नजर बनाए हुए हैं। राजेश कुमार ने बताया कि मेले में आने वाले असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा रही है। ताकि वे मेला की आड़ में किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके। सादे लिबास में भी पुलिसकर्मी जगह-जगह पर तैनात किए गए हैं। औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक उमगा पहाड़ पर सरस्वती पूजा के अवसर पर तीन दिवसीय मेले की शुरुआत हो गई है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उमगा पहाड़ को धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम माना जाता है। उमगा मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। यह बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में दूसरा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। मेले में औरंगाबाद जिले के अलावा सीमावर्ती गयाजी जिला के आमस, गुरुवा, गुरारू समेत झारखंड बॉर्डर से सटे इलाके के लोग भी पहुंचते हैं। उनका पहाड़ पर है 52 मंदिरों की श्रृंखला पहाड़ पर भगवान शिव, माता पार्वती, मां उमंगेश्वरी, दसभुजी गणेश और गौरीशंकर सहित कई देवताओं के मंदिर हैं, जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही पहाड़ की ओर कूच करते हैं। यहां लगभग 52 मंदिरों की श्रृंखला है, जो पहाड़ की ढलानों और चोटी तक फैली हुई है। हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता और धार्मिक महत्ता है, जिससे यह स्थान पूरी तरह से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इसके अतिरिक्त पहाड़ पर प्राचीन गुफाएं, तालाब, और प्राकृतिक छटा भी सैलानियों को आकर्षित करती हैं। तीन दिवसीय मेले की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में इस पहाड़ पर ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी और तभी से यह स्थल धार्मिक उत्सवों का केंद्र रहा है। मेले के दौरान सरस्वती पूजा, सूर्य पूजा, भगवान शिव-वनेश्वरी और अन्य देवताओं की आराधना की जाती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पहाड़ी की चोटी गौरी शंकर तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। जहां से सम्पूर्ण घाटी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षक है मेला बसंत पंचमी के दिन प्रारंभ होकर तीन दिनों तक चलता है। जिसमें खेल-तमाशे, चर्खी, मीना बाजार और मनोरंजन के साधन भी सजते हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बेहद आकर्षक है। हर ऋतु में यहां के हरे-भरे पहाड़, शांत वातावरण, और चट्टानों के बीच स्थित मंदिरों की शिल्पकारी दूर-दूर तक लोगों को खींचती है। उमगा पहाड़ और इसके मेले की परंपरा ने स्थानीय संस्कृति और धार्मिक जीवन में एक विशेष स्थान बनाया है, जिससे यह जगह साल भर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का प्रमुख केंद्र बनी रहती है। बड़ी बात है कि उमगा पहाड़ पर आयोजित मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। मेले के चारों तरफ जवानों की तैनाती की गई है। कमिटियों की ओर से मॉनिटरिंग भी की जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मेला के आयोजन को लेकर प्रशासन की ओर से भी चुस्त व्यवस्था की गई है। मदनपुर थाना की पुलिस लगातार नजर बनाए हुए हैं। राजेश कुमार ने बताया कि मेले में आने वाले असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा रही है। ताकि वे मेला की आड़ में किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके। सादे लिबास में भी पुलिसकर्मी जगह-जगह पर तैनात किए गए हैं।


