यमुनानगर लकड़ी मंडी में 55 लाख का फर्जीवाड़ा:बंद फैक्ट्रियों की पर्चियों से कारोबारी से ठगी, फर्जी पर्चिंयां देकर ऐंठी रकम

यमुनानगर लकड़ी मंडी में 55 लाख का फर्जीवाड़ा:बंद फैक्ट्रियों की पर्चियों से कारोबारी से ठगी, फर्जी पर्चिंयां देकर ऐंठी रकम

यमुनानगर के जगाधरी स्थित लकड़ी मंडी में करोड़ों के कारोबार के बीच एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्लाईवुड फैक्ट्रियों के नाम पर तैयार की गई फर्जी पर्चियों के जरिए 55 लाख से अधिक की रकम हड़पने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि जिन फैक्ट्रियों की पर्चियां दिखाकर भुगतान लिया गया, उनमें से कुछ फैक्ट्रियां पहले ही बंद हो चुकी थीं। जब शिकायतकर्ता ने संबंधित फैक्ट्री मालिकों से भुगतान की मांग की तो पूरा खेल उजागर हुआ। मामले में थाना शहर जगाधरी में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। लकड़ी की पर्चियों के आधार पर लेता था भुगतान शिकायतकर्ता शुभम गर्ग निवासी होनियान गली, जगाधरी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह पिछले कई वर्षों से जगाधरी की लकड़ी मंडी में कारोबार कर रहा है। आरोपी आदित्य सैनी निवासी गांव माझीपुर, तहसील बेहट, जिला सहारनपुर, जोकि मैसर्ज आदी टेड्रर्स, टिम्बर मार्केट जगाधरी से जुड़ा हुआ है। आरोपी भी लकड़ी मंडी में वर्षों से कार्यरत था, जिसके कारण शिकायतकर्ता ने उस पर पूर्ण भरोसा किया हुआ था। शिकायत में कहा गया कि आरोपी प्लाईवुड फैक्ट्रियों में जाने वाली लकड़ी की पर्चियां (रसीदें) शिकायतकर्ता को लाकर देता था और उन पर्चियों के आधार पर उससे भुगतान ले जाता था। विभिन्न फैक्ट्रियों से लाता रहा पर्चियां 25 फरवरी 2025 से 16 सितंबर 2025 तक आरोपी विभिन्न प्लाईवुड फैक्ट्रियों की पर्चियां लाता रहा और शिकायतकर्ता से भुगतान लेता रहा। इन पर्चियों के आधार पर कुल 49 लाख 21 हजार 639 रुपए आरोपी को दिए गए। इसके अतिरिक्त आरोपी ने 6 लाख रुपए नकद अपनी जरूरत और ठेकेदारों को देने के नाम पर अलग से लिए। इस प्रकार कुल 55 लाख 21 हजार 639 रुपए की राशि आरोपी पर बकाया हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार तय प्रक्रिया यह थी कि आरोपी जो पर्चियां लाता था, वे संबंधित फैक्ट्री मालिकों की होती थीं। बाद में शिकायतकर्ता उन पर्चियों में अपना मुनाफा जोड़कर संबंधित फैक्ट्री मालिकों से भुगतान प्राप्त कर लेता था। जांच में अधिकांश पर्चियां निकली फर्जी शिकायत में बताया कि जब उसने संबंधित फैक्ट्री मालिकों को पर्चियां दिखाकर अपनी राशि मांगी तो पता चला कि अधिकांश पर्चियां फर्जी थीं। कुछ फैक्ट्रियां तो बंद हो चुकी थीं और उन पर्चियों का उनसे कोई संबंध नहीं था। इस पर जब शिकायतकर्ता ने आरोपी से जवाब मांगा तो उसने पहले टालमटोल की, फिर अपनी गलती स्वीकार की और लिखित रूप में आश्वासन दिया कि वह पूरी राशि जल्द अदा कर देगा। शिकायतकर्ता ने बताया कि बाद में आरोपी अपनी बात से मुकर गया और पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उसने शिकायतकर्ता को झूठे मुकदमों में फंसाने और जान से मरवा देने की धमकी भी दी। पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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