एक तरफ मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है और दूसरी तरफ धर्म की नगरी काशी में मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने मुस्लिम महिलाओं के साथ जमकर गुलाल उड़ाया। इस दौरान सद्भावना का गुलाल एक दुसरे को महिलाओं ने लगाया और जमकर होली के गीत गए। इस होली के जारी उन्होंने कट्टरपंथियों को करारा जवाब दिया और युद्ध के बीच शांति का पैगाम भी पूरी दुनिया को दिया। ढोल की थाप पर होली के गीत, हंसी ठिठोली और जी भर के गारी और हवाओं में उड़ता गुलाल किसी भी धार्मिक नफरत को खत्म करने का जज्बा रखता है। मुस्लिम देश धार्मिक नफरत के शिकार हैं और एक दूसरे को खत्म करने पर आमादा है। सड़कों पर बिखरा खून इतिहास भूगोल सब बदल रहा है। ऐसे में काशी की मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर नफरत, हिंसा और कट्टरता को खत्म कर विश्व शांति का संदेश दिया। देखिए मुस्लिम महिलाओं की होली की तीन तस्वीरें… हिंसा और कट्टरपंथ ने पूरी दुनिया को आतंकवाद दिया मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि – हम भारत में रहते हैं यह सबसे बड़ा अचीवमेंट है।यहां की संस्कृति में रंगो, फ़ोल और गुलाल की होली का प्रावधान है। लेकिन इस समय मुस्लिम देशों में खून की होली खेली जा रही है। उन्होंने आगे कहा – मुस्लिम देश भगवान राम और कृष्ण के मार्ग पर चले तभी उनके देश में शांति आएगी। हिंसा, कट्टरपंथ और नफरत ने पूरी दुनिया को सिर्फ आतंकवाद दिया है। खून की होली खेलना हराम, रंगों की नहीं नाजनीन ने आगे कहा – हम मजहब से चाहे कोई हों, लेकिन पूर्वजों और परम्पराओं से एक हैं। हम धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों को कड़ी चुनौती देते हैं कि अभी भी वक्त है सुधर जाओ वरना मुस्लिम देशों के हालात देख लो। रंगों की होली खेलना हराम नहीं है, बल्कि खून की होली खेलना हराम है। रंगों की होली खेलने वाला मोहब्बत फैलाता है। इसलिए वो जन्नत जाएगा। खून की होली खेलने वाला नफरत फैलाता है, इसलिए जहन्नुम जाएगा। नफरत की बात करने वालों को करारा जवाब इस मौके पर मुस्लिम महिला नूरजहां ने कहा – हम सब हर साल की तरह आज यहां गुलाल और फूलों की पंखुड़ियों से होली खेलने के लिए आये हैं। यहां आकर ऐसा लगता है मानों सभी धर्म एक ही रंग में रंग गए हों। उन्होंने कहा – आज हम सभी ने एक दुसरे को गुलाल लगाकर आज यहां नफरत की बात करने वालों को करारा जवाब दिया है। भारत की संस्कृति रंगों की होली खेलकर गले मिलने का संदेश देती है, वहीं उनकी संस्कृति गला काटकर खून की होली खेलने को ही मजहब समझते हैं। हिन्दू महिलाओं ने अपने हाथों से मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर गुलाल लगाया, तो मुस्लिम महिलाएं कहा पीछे रहने वाली थीं, उन्होंने ने भी हवा में गुलाल उड़ाकर सबको सराबोर कर दिया। हर देश में होना चाहिए होली जैसा त्यौहार विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजीव ने कहा कि होली का त्योहार नफरत को खत्म करके गले मिलने के लिए ही मनाया जाता है। विश्व शांति के लिए त्योहारों का बहुत महत्व है। होली का चलन अन्य देशों में होने से वहां नफ़रत की प्रवृत्ति कम होगी। गुलालोत्सव एवं होली की पोटली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने अनाज बैंक की ओर से 300 बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम परिवार की महिलाओं को होली की पोटली और साड़ी वितरित कर होली की खुशी बढ़ा दी।


