उत्तराखंड में एक ही पीर-सूफी के नाम पर कई मजारें:राज्य गठन के बाद बढ़ती गई वक्फ की संपत्ति, CM बोले- ढोंग का करोबार नही चलेगा

उत्तराखंड में एक ही पीर-सूफी के नाम पर कई मजारें:राज्य गठन के बाद बढ़ती गई वक्फ की संपत्ति, CM बोले- ढोंग का करोबार नही चलेगा

उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध तरीके से मजारें बनाकर कब्जा करने के मामलों में बड़ा खुलासा हुआ है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 200 से ज्यादा मजारें सरकारी जमीन पर बनाकर उन्हें उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में दर्ज भी करा दिया गया है। मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। CM ने कहा कि “देवभूमि में ढोंग का कारोबार बर्दाश्त नहीं होगा” और अभियान के तहत आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। इधर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने जांच का समर्थन करते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा- जांच होने दीजिए, “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। 3 प्वाइंट्स में जानिए रिपोर्ट में क्या… हटाई गईं मजारों में “मानवीय अवशेष नहीं मिले”, कमाई के जरिए का आरोप सरकारी भूमि पर बनी जिन मजारों को प्रशासन ने कार्रवाई कर हटाया, उनमें किसी भी प्रकार के मानवीय अवशेष नहीं मिलने का दावा किया गया है। इसी आधार पर आरोप लगाया गया कि कई मजारें कथित तौर पर “कमाई का जरिया” बन चुकी थीं। यह भी कहा गया कि इन जगहों पर झाड़-फूंक और ताबीज के लिए लोगों का आना-जाना रहता था। सरकार ने प्रशासन को ऐसे भू-माफियाओं और अधिकारियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिस पर काम शुरू होने की बात कही गई है। CM बोले- फ्रेंचाइजी मजारें और ढोंग का कारोबार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी है और अब तक 572 मजारों को हटाकर 11 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि खाली कराई जा चुकी है। CM ने कहा कि प्रदेश में एक ही नाम से 10 से 15 “फ्रेंचाइजी” मजारें सामने आ रही हैं, जो केवल ढोंग का कारोबार कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि कोई पीर-फकीर होते तो उन्हें 10-15 जगह नहीं बल्कि एक ही स्थान पर दफनाया जाता। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स बोले- जांच होने दीजिए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि जो मजारें वक्फ में दर्ज हैं, वे वक्फ की संपत्ति हैं। वहीं जो मजारें सरकारी भूमि पर बनी हैं, उनकी जांच यदि सरकार करा रही है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय संपत्तियों के आंकड़ों को लेकर “कन्फ्यूजन” भी हो सकता है। उनका तर्क है कि औकाफ की संख्या पहले करीब 2500 थी, जो अब 5000 प्लस हो गई हैं। शादाब शम्स के मुताबिक कई बार एक ही वक्फ संपत्ति पर निर्माण/इकाइयां बढ़ने से रिकॉर्ड में गिनती बढ़ी हुई दिख सकती है, जैसे- 8 बीघा जमीन पर पहले 4 दुकानें थीं और बाद में 8 दुकानें हो गईं, तो गिनती में बढ़ोतरी दिखाई दे सकती है। उन्होंने कहा कि असल सवाल यह है कि औकाफ बढ़े हैं या नहीं, और यदि बढ़े हैं तो कहां से बढ़े- यह जांच का विषय है। ————— ये खबर भी पढ़ें…. उत्तराखंड में डेमोग्राफिक बदलाव राज्य सरकार के सामने चुनौती:10 सालों में बॉर्डर की 6 सीटों में बढ़े 50% मतदाता, 25 में इजाफा 30% के पार उत्तराखंड चुनाव आयोग के आंकड़ों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन आंकड़ों के मुताबिक राज्य की उन विधानसभा सीटों पर मतदाताओं में बड़ा उछाल आया है जो पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से सटी हुई हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *