समस्तीपुर में वीमेंस कॉलेज के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की देखरेख में सुभाष चंद्र बोस जयंती को प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ अरुण कुमार कर्ण की अध्यक्षता में पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से “सुभाष चंद्र बोस भारतीय शौर्य के साक्षात रूप “विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का प्रारंभ दीप प्रज्वलन, सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर को पुष्पांजलि और सरस्वती वंदना व स्वागत गान के साथ हुआ। स्वतंत्रता मांगने से नहीं मिलती उसे लेनी पड़ती इस मौके पर हेड मास्टर ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस का सिद्धांत है कि स्वतंत्रता मांगने से नहीं मिलती उसे लेनी पड़ती है। मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रोफेसर डॉक्टर शारदा सिन्हा प्रख्यात इतिहासविद और पूर्व विभागाध्यक्ष, विमेंस कॉलेज समस्तीपुर , ने सुभाष चंद्र बोस की जीवनी और राष्ट्रीय आंदोलन के समय देश -विदेश के इतिहासविदों, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिज्ञों व सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर जिस तरह से भारत के आजादी के पक्ष और अंग्रेजों के विपक्ष में उन्होंने सारी योजनाएं बनाई ,उन पर बात की। इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक व मीडिया प्रभारी डॉ सुरेश साह ने सुभाष चंद्र बोस को एक महान दार्शनिक ,राष्ट्रवादी नेता सहित बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी बताया। उन्होंने कहा कि यदि आजादी के उपरांत नेताजी को देश का नेतृत्व मिला होता तो राष्ट्र की दशा और दिशा पर अति सकारात्मक प्रभाव पड़ता । समस्तीपुर में वीमेंस कॉलेज के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की देखरेख में सुभाष चंद्र बोस जयंती को प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ अरुण कुमार कर्ण की अध्यक्षता में पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से “सुभाष चंद्र बोस भारतीय शौर्य के साक्षात रूप “विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का प्रारंभ दीप प्रज्वलन, सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर को पुष्पांजलि और सरस्वती वंदना व स्वागत गान के साथ हुआ। स्वतंत्रता मांगने से नहीं मिलती उसे लेनी पड़ती इस मौके पर हेड मास्टर ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस का सिद्धांत है कि स्वतंत्रता मांगने से नहीं मिलती उसे लेनी पड़ती है। मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित प्रोफेसर डॉक्टर शारदा सिन्हा प्रख्यात इतिहासविद और पूर्व विभागाध्यक्ष, विमेंस कॉलेज समस्तीपुर , ने सुभाष चंद्र बोस की जीवनी और राष्ट्रीय आंदोलन के समय देश -विदेश के इतिहासविदों, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिज्ञों व सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर जिस तरह से भारत के आजादी के पक्ष और अंग्रेजों के विपक्ष में उन्होंने सारी योजनाएं बनाई ,उन पर बात की। इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक व मीडिया प्रभारी डॉ सुरेश साह ने सुभाष चंद्र बोस को एक महान दार्शनिक ,राष्ट्रवादी नेता सहित बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी बताया। उन्होंने कहा कि यदि आजादी के उपरांत नेताजी को देश का नेतृत्व मिला होता तो राष्ट्र की दशा और दिशा पर अति सकारात्मक प्रभाव पड़ता ।


