लेजर और यूवी लाइट्स के बीच तेज म्यूजिक के साथ दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में रेव पार्टियां होती हैं। इनमें नशा करने वाले फिल्मी सितारों से लेकर हाई प्रोफाइल लोग शामिल होते हैं। खासकर अमीर घरों के लड़के-लड़कियां। ऐसी पार्टियों में नशे के लिए थाईलैंड का गांजा (हाइड्रोपोनिक वीड) इस्तेमाल होता है। पिछले 3 साल में इसकी डिमांड काफी बढ़ी है। तस्करों का इंटरनेशनल गैंग थाईलैंड से इसकी तस्करी करता है। वे दिल्ली, मुंबई, गोवा, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों तक इसे बिहार के रास्ते पहुंचा रहे हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, तस्कर किस तरह बिहार के रास्ते थाईलैंड के गांजा की तस्करी कर रहे हैं? थाईलैंड गांजा की मांग क्यों अधिक है? पकड़े जाने से बचने के लिए तस्कर क्या तरीका अपना रहे हैं? सबसे पहले समझिए, गांजा स्मगलिंग रूट 14 जनवरी 2026 को OTT प्लेटफॉर्म NETFLIX पर एक्टर इमरान हाशमी की वेब सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर वेब’ रिलीज हुई। इसमें दिखाया गया कि भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए तस्करों का गैंग कैसे मुंबई जैसे महानगर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जगह, छोटे शहरों के एयरपोर्ट का इस्तेमाल करता है। अलग-अलग लोगों के जरिए विदेशों से सोना और नशे के सामान लाकर ट्रेनों के जरिए ठिकाने तक पहुंचाता है। ठीक इसी तरह का मामला थाईलैंड के गांजा (हाइड्रोपोनिक वीड) की तस्करी के केस में सामने आया है। थाईलैंड से गांजा विमान में रखकर बिहार के गया एयरपोर्ट तक लाया जाता है। गया में इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यहां, दिल्ली या मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी सख्त जांच का अभाव है, जिसके चलते तस्करों को चोरी-छिपे गांजा लाने में मदद मिलती है। गया में थाईलैंड से बड़े पैमाने पर गांजा मंगाया जा रहा है। इस बात की पुष्टि पिछले तीन महीनों में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के इनपुट पर गयाजी एयरपोर्ट पर कस्टम डिपार्टमेंट की टीम की ओर से की गई कार्रवाई से हुई है। एयरपोर्ट से अब तक दो बार में 35 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त की गई है। इसकी कीमत 35 करोड़ से अधिक है। तस्करी के बाद भारत में थाईलैंड के इस प्रीमियम क्वालिटी वाले गांजा की कीमत 80 लाख रुपए से शुरू होकर 1.2 करोड़ रुपए प्रति किलो है। गया से ट्रेनों के जरिए, महानगरों तक होती है गांजा की सप्लाई गया एयरपोर्ट पर जब्त किए गए थाई गांजा की खेप को ट्रेन के जरिए मुंबई पहुंचाना था। थाईलैंड से गया तक इसे अलग-अलग लोग लेकर आए थे। यहां से दूसरे लोग ट्रेन से मुंबई लेकर जाने वाले थे। तस्करों के काम करने के तरीके तो दो मामलों से समझें… केस 1 : 25 kg गांजा के साथ 5 लोग गिरफ्तार 26 जनवरी को थाईलैंड से आई एयर एशिया की फ्लाइट FD-122 ने गयाजी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। DRI की पुख्ता इनपुट थी। इस पर कस्टम की टीम ने चौकसी बढ़ा दी थी। फ्लाइट से उतरने वाले 5 पैसेंजर्स को रोका। इनमें तीन पुरुष और दो महिलाएं थीं। जांच एजेंसी को चकमा देने के लिए ये सभी अलग-अलग टिकट पर सफर कर रहे थे। हर किसी के पास 5-5 किलो थाई गांजा था। कुल 25 किलो गांजा बरामद किया गया। इसे छोटे-छोटे पैकेट में खिलौनों के अंदर पैक करके लाया गया था। पकड़े गए लोगों में यूपी का रहने वाला अश्विनी कुमार द्विवेदी, गौरव विधुरी, गुलशन मीना, पंजाब की रहने वाली मनप्रीत कौर और दिलप्रीत कौर शामिल थीं। जांच आगे बढ़ी तो ये सभी एक ही गैंग के सदस्य मिले। इनके कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। अश्विनी गैंग का सरगना निकला। इंटरनेशनल तस्करों के गैंग से इसका पुराना कनेक्शन होने की आशंका जांच एजेंसी को है। फिलहाल ये सभी जेल में हैं। जब्त गांजा की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए है। केस 2 : 10 kg गांजा बरामद केस 2 : 4 मार्च 2026 को थाई एयरवेज से तस्करों के आने की सूचना मिलने पर कस्टम की टीम अलर्ट पर थी। गांजा लेकर थाईलैंड से आ रहे लोगों ने देखा कि एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ाई गई है, सख्त जांच की जा रही है तो उसे लावारिस हालत में छोड़ दी और भाग निकले। पैकेट की जांच की गई तो उसमें से 10 किलो थाई गांजा मिला। इसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है। DRI से जुड़े सूत्रों की मानें तो इसे लेकर दो लोग फ्लाइट से आए थे। इसमें एक महिला थी। ये कौन लोग थे। इनकी पहचान के लिए जांच चल रही है। हर खेप में नए लोगों का इस्तेमाल थाईलैंड से गांजा का हर खेप नए लोग लेकर आते हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इसके पीछे तस्करों के इंटरनेशनल सिंडिकेट का शातिर दिमाग है। दरअसल, उनका सामान सही सलामत क्लाइंट के ठिकाने पर पहुंच जाए, इसके लिए सबसे पहले वैसे लोगों की तलाश की जाती है, जिनकी ट्रैवल हिस्ट्री नहीं हो। जिसने बहुत अधिक विदेश की यात्रा नहीं की हो। इससे जांच एजेंसियों को चकमा देने में आसानी होती है। ऐसे लोगों को उनका कंसाइनमेंट पहुंचाने के लिए मोटी रकम दी जाती है। ज्यादा सजा से बचने के लिए छोटे खेप में लाते हैं गांजा जनवरी महीने में जिस तरह से गयाजी एयरपोर्ट पर 5 लोग पकड़े गए और सभी के पास से 5-5 किलो थाई गांजा की खेप मिली तो आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि आखिर मात्रा कम क्यों थी? इस कीमती गांजा की मात्रा को प्रति पैसेंजर बढ़ाकर भी लाया जा सकता था। असल में इसके पीछे की वजह कानून और उसके तहत दी जाने वाली सजा से बचना है। पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट प्रभात भारद्वाज ने बताया, ‘भारत में NDPS एक्ट के तहत किसी शख्स के पास से 20 किलो या इससे अधिक गांजा पाए जाने पर 10 साल से लेकर उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। इससे बचने के लिए तस्कर छोटे-छोटे खेप में गांजा लाते हैं। ऐसे में पकड़े जाने पर एक-दो महीने या बहुत कम समय में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल जाती है। यही वजह है कि एक गैंग के लोग होने के बाद भी फ्लाइट में अलग-अलग टिकटों पर सफर करते हैं। बिहार में नॉर्थ ईस्ट से आने वाले गांजा की डिमांड गांजा तस्करी का अनुभव रखने वाले एक शख्स के अनुसार गयाजी एयरपोर्ट से जब्त थाईलैंड वाले गांजा का इस्तेमाल बिहार में नहीं होता है। यहां त्रिपुरा समेत नॉर्थ ईस्ट के इलाकों से आने वाले देसी गांजा का इस्तेमाल होता है। देसी गांजा में ‘मंदाकिनी’ की डिमांड सबसे अधिक है। इसकी कीमत 50 से 60 लाख रुपए किलो तक है। बिहार में भी चोरी–छिपे गांजा की खेती होती है। इसकी कीमत 8 से 10 हजार रुपए किलो है। जहां तक बात थाईलैंड वाले गांजा की है तो वह प्रीमियम क्वालिटी की होती है। इसकी सबसे अधिक खपत हाई प्रोफाइल लोगों के बीच है। एक महिला टीवी आर्टिस्ट के पास यही गांजा मिला था। मुंबई, गोवा, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे के साथ पंजाब में इसकी बहुत डिमांड है। रेव पार्टियों के साथ ही क्लबों में आने वाले हाई प्रोफाइल लोग इसके यूजर हैं। देसी गांजे में नशीले तत्व की मात्रा 3 से 4% होती है। थाईलैंड के हाइड्रोपोनिक गांजे में इसकी मात्रा करीब 30% तक होती है। इसी वजह से यह अमीरों का ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। ट्रेन और रूट बदलकर जाते हैं तस्कर गयाजी से मुंबई के लिए हफ्ते में मात्र तीन ट्रेन है। इसमें हावड़ा से मुंबई जाने वाली सुपरफास्ट ही डेली चलती है। गयाजी से लोकमान्य तिलक टर्मिनल के लिए हफ्ते में सिर्फ एक दिन (बुधवार को) सीधी ट्रेन चलती है। तीसरी ट्रेन रांची से लोकमान्य तिलक की है। गयाजी में ये गुरुवार के दिन आती है। वहीं, गयाजी से दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस के साथ ही कई सुपरफास्ट और स्पेशल ट्रेनों को मिलाकर करीब 34 ट्रेनें चल रही हैं। इनमें कई ट्रेनें सप्ताह में एक, दो और तीन दिन चलती हैं। सूत्रों की मानें तो गांजा और सोना की खेप लेकर तस्कर ट्रेन और रूट बदलकर भी जाते हैं। 2022 के बाद बढ़ी तस्करी जांच एजेंसी से जुड़े एक सूत्र के अनुसार बिहार में शराबबंदी के बाद से गांजा, चरस और ब्राउन शुगर की खपत बढ़ी है। इसमें थाईलैंड से आने वाला गांजा शामिल नहीं है। फ्लाइट से तस्करी का ट्रेंड जरूर बढ़ा है। गयाजी एयरपोर्ट की तरह ही DRI की पुख्ता सूचना पर लखनऊ और जयपुर में भी इंटरनेशनल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहां भी थाईलैंड से लाए गए गांजा की खेप को जब्त किया गया है। दरअसल, थाईलैंड में 2022 में गांजा को कानूनी वैद्यता मिल गई। इसके बाद वहां ये आसानी से उपलब्ध होने लगा। इसका पूरा फायदा तस्कर उठाने लगे। भारत में ऊंची कीमत पर गांजा के प्रीमियम क्वालिटी की तस्करी करने लगे। थाईलैंड के गांजा की क्वालिटी और तस्करी के बाद उसकी कीमत गांजा तस्करी पर कितनी सजा हो सकती है? जब किसी मादक पदार्थ की बरामदगी होती है तो सबसे पहले उसकी मात्रा और उसे कैसे लाया गया है? इसे देखा जाता है। एडवोकेट प्रभात भारद्वाज ने बताया कि अगर कोई विदेशी नागरिक लेकर आ रहा है तो उसके लिए NDPS एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर कोई भारतीय नागरिक तस्करी कर ला रहा है तो सजा का अलग प्रावधान है। लेजर और यूवी लाइट्स के बीच तेज म्यूजिक के साथ दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में रेव पार्टियां होती हैं। इनमें नशा करने वाले फिल्मी सितारों से लेकर हाई प्रोफाइल लोग शामिल होते हैं। खासकर अमीर घरों के लड़के-लड़कियां। ऐसी पार्टियों में नशे के लिए थाईलैंड का गांजा (हाइड्रोपोनिक वीड) इस्तेमाल होता है। पिछले 3 साल में इसकी डिमांड काफी बढ़ी है। तस्करों का इंटरनेशनल गैंग थाईलैंड से इसकी तस्करी करता है। वे दिल्ली, मुंबई, गोवा, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों तक इसे बिहार के रास्ते पहुंचा रहे हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, तस्कर किस तरह बिहार के रास्ते थाईलैंड के गांजा की तस्करी कर रहे हैं? थाईलैंड गांजा की मांग क्यों अधिक है? पकड़े जाने से बचने के लिए तस्कर क्या तरीका अपना रहे हैं? सबसे पहले समझिए, गांजा स्मगलिंग रूट 14 जनवरी 2026 को OTT प्लेटफॉर्म NETFLIX पर एक्टर इमरान हाशमी की वेब सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर वेब’ रिलीज हुई। इसमें दिखाया गया कि भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए तस्करों का गैंग कैसे मुंबई जैसे महानगर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जगह, छोटे शहरों के एयरपोर्ट का इस्तेमाल करता है। अलग-अलग लोगों के जरिए विदेशों से सोना और नशे के सामान लाकर ट्रेनों के जरिए ठिकाने तक पहुंचाता है। ठीक इसी तरह का मामला थाईलैंड के गांजा (हाइड्रोपोनिक वीड) की तस्करी के केस में सामने आया है। थाईलैंड से गांजा विमान में रखकर बिहार के गया एयरपोर्ट तक लाया जाता है। गया में इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यहां, दिल्ली या मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी सख्त जांच का अभाव है, जिसके चलते तस्करों को चोरी-छिपे गांजा लाने में मदद मिलती है। गया में थाईलैंड से बड़े पैमाने पर गांजा मंगाया जा रहा है। इस बात की पुष्टि पिछले तीन महीनों में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के इनपुट पर गयाजी एयरपोर्ट पर कस्टम डिपार्टमेंट की टीम की ओर से की गई कार्रवाई से हुई है। एयरपोर्ट से अब तक दो बार में 35 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त की गई है। इसकी कीमत 35 करोड़ से अधिक है। तस्करी के बाद भारत में थाईलैंड के इस प्रीमियम क्वालिटी वाले गांजा की कीमत 80 लाख रुपए से शुरू होकर 1.2 करोड़ रुपए प्रति किलो है। गया से ट्रेनों के जरिए, महानगरों तक होती है गांजा की सप्लाई गया एयरपोर्ट पर जब्त किए गए थाई गांजा की खेप को ट्रेन के जरिए मुंबई पहुंचाना था। थाईलैंड से गया तक इसे अलग-अलग लोग लेकर आए थे। यहां से दूसरे लोग ट्रेन से मुंबई लेकर जाने वाले थे। तस्करों के काम करने के तरीके तो दो मामलों से समझें… केस 1 : 25 kg गांजा के साथ 5 लोग गिरफ्तार 26 जनवरी को थाईलैंड से आई एयर एशिया की फ्लाइट FD-122 ने गयाजी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। DRI की पुख्ता इनपुट थी। इस पर कस्टम की टीम ने चौकसी बढ़ा दी थी। फ्लाइट से उतरने वाले 5 पैसेंजर्स को रोका। इनमें तीन पुरुष और दो महिलाएं थीं। जांच एजेंसी को चकमा देने के लिए ये सभी अलग-अलग टिकट पर सफर कर रहे थे। हर किसी के पास 5-5 किलो थाई गांजा था। कुल 25 किलो गांजा बरामद किया गया। इसे छोटे-छोटे पैकेट में खिलौनों के अंदर पैक करके लाया गया था। पकड़े गए लोगों में यूपी का रहने वाला अश्विनी कुमार द्विवेदी, गौरव विधुरी, गुलशन मीना, पंजाब की रहने वाली मनप्रीत कौर और दिलप्रीत कौर शामिल थीं। जांच आगे बढ़ी तो ये सभी एक ही गैंग के सदस्य मिले। इनके कनेक्शन को खंगाला जा रहा है। अश्विनी गैंग का सरगना निकला। इंटरनेशनल तस्करों के गैंग से इसका पुराना कनेक्शन होने की आशंका जांच एजेंसी को है। फिलहाल ये सभी जेल में हैं। जब्त गांजा की कीमत करीब 25 करोड़ रुपए है। केस 2 : 10 kg गांजा बरामद केस 2 : 4 मार्च 2026 को थाई एयरवेज से तस्करों के आने की सूचना मिलने पर कस्टम की टीम अलर्ट पर थी। गांजा लेकर थाईलैंड से आ रहे लोगों ने देखा कि एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ाई गई है, सख्त जांच की जा रही है तो उसे लावारिस हालत में छोड़ दी और भाग निकले। पैकेट की जांच की गई तो उसमें से 10 किलो थाई गांजा मिला। इसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपए है। DRI से जुड़े सूत्रों की मानें तो इसे लेकर दो लोग फ्लाइट से आए थे। इसमें एक महिला थी। ये कौन लोग थे। इनकी पहचान के लिए जांच चल रही है। हर खेप में नए लोगों का इस्तेमाल थाईलैंड से गांजा का हर खेप नए लोग लेकर आते हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इसके पीछे तस्करों के इंटरनेशनल सिंडिकेट का शातिर दिमाग है। दरअसल, उनका सामान सही सलामत क्लाइंट के ठिकाने पर पहुंच जाए, इसके लिए सबसे पहले वैसे लोगों की तलाश की जाती है, जिनकी ट्रैवल हिस्ट्री नहीं हो। जिसने बहुत अधिक विदेश की यात्रा नहीं की हो। इससे जांच एजेंसियों को चकमा देने में आसानी होती है। ऐसे लोगों को उनका कंसाइनमेंट पहुंचाने के लिए मोटी रकम दी जाती है। ज्यादा सजा से बचने के लिए छोटे खेप में लाते हैं गांजा जनवरी महीने में जिस तरह से गयाजी एयरपोर्ट पर 5 लोग पकड़े गए और सभी के पास से 5-5 किलो थाई गांजा की खेप मिली तो आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि आखिर मात्रा कम क्यों थी? इस कीमती गांजा की मात्रा को प्रति पैसेंजर बढ़ाकर भी लाया जा सकता था। असल में इसके पीछे की वजह कानून और उसके तहत दी जाने वाली सजा से बचना है। पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट प्रभात भारद्वाज ने बताया, ‘भारत में NDPS एक्ट के तहत किसी शख्स के पास से 20 किलो या इससे अधिक गांजा पाए जाने पर 10 साल से लेकर उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। इससे बचने के लिए तस्कर छोटे-छोटे खेप में गांजा लाते हैं। ऐसे में पकड़े जाने पर एक-दो महीने या बहुत कम समय में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल जाती है। यही वजह है कि एक गैंग के लोग होने के बाद भी फ्लाइट में अलग-अलग टिकटों पर सफर करते हैं। बिहार में नॉर्थ ईस्ट से आने वाले गांजा की डिमांड गांजा तस्करी का अनुभव रखने वाले एक शख्स के अनुसार गयाजी एयरपोर्ट से जब्त थाईलैंड वाले गांजा का इस्तेमाल बिहार में नहीं होता है। यहां त्रिपुरा समेत नॉर्थ ईस्ट के इलाकों से आने वाले देसी गांजा का इस्तेमाल होता है। देसी गांजा में ‘मंदाकिनी’ की डिमांड सबसे अधिक है। इसकी कीमत 50 से 60 लाख रुपए किलो तक है। बिहार में भी चोरी–छिपे गांजा की खेती होती है। इसकी कीमत 8 से 10 हजार रुपए किलो है। जहां तक बात थाईलैंड वाले गांजा की है तो वह प्रीमियम क्वालिटी की होती है। इसकी सबसे अधिक खपत हाई प्रोफाइल लोगों के बीच है। एक महिला टीवी आर्टिस्ट के पास यही गांजा मिला था। मुंबई, गोवा, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे के साथ पंजाब में इसकी बहुत डिमांड है। रेव पार्टियों के साथ ही क्लबों में आने वाले हाई प्रोफाइल लोग इसके यूजर हैं। देसी गांजे में नशीले तत्व की मात्रा 3 से 4% होती है। थाईलैंड के हाइड्रोपोनिक गांजे में इसकी मात्रा करीब 30% तक होती है। इसी वजह से यह अमीरों का ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। ट्रेन और रूट बदलकर जाते हैं तस्कर गयाजी से मुंबई के लिए हफ्ते में मात्र तीन ट्रेन है। इसमें हावड़ा से मुंबई जाने वाली सुपरफास्ट ही डेली चलती है। गयाजी से लोकमान्य तिलक टर्मिनल के लिए हफ्ते में सिर्फ एक दिन (बुधवार को) सीधी ट्रेन चलती है। तीसरी ट्रेन रांची से लोकमान्य तिलक की है। गयाजी में ये गुरुवार के दिन आती है। वहीं, गयाजी से दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस के साथ ही कई सुपरफास्ट और स्पेशल ट्रेनों को मिलाकर करीब 34 ट्रेनें चल रही हैं। इनमें कई ट्रेनें सप्ताह में एक, दो और तीन दिन चलती हैं। सूत्रों की मानें तो गांजा और सोना की खेप लेकर तस्कर ट्रेन और रूट बदलकर भी जाते हैं। 2022 के बाद बढ़ी तस्करी जांच एजेंसी से जुड़े एक सूत्र के अनुसार बिहार में शराबबंदी के बाद से गांजा, चरस और ब्राउन शुगर की खपत बढ़ी है। इसमें थाईलैंड से आने वाला गांजा शामिल नहीं है। फ्लाइट से तस्करी का ट्रेंड जरूर बढ़ा है। गयाजी एयरपोर्ट की तरह ही DRI की पुख्ता सूचना पर लखनऊ और जयपुर में भी इंटरनेशनल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहां भी थाईलैंड से लाए गए गांजा की खेप को जब्त किया गया है। दरअसल, थाईलैंड में 2022 में गांजा को कानूनी वैद्यता मिल गई। इसके बाद वहां ये आसानी से उपलब्ध होने लगा। इसका पूरा फायदा तस्कर उठाने लगे। भारत में ऊंची कीमत पर गांजा के प्रीमियम क्वालिटी की तस्करी करने लगे। थाईलैंड के गांजा की क्वालिटी और तस्करी के बाद उसकी कीमत गांजा तस्करी पर कितनी सजा हो सकती है? जब किसी मादक पदार्थ की बरामदगी होती है तो सबसे पहले उसकी मात्रा और उसे कैसे लाया गया है? इसे देखा जाता है। एडवोकेट प्रभात भारद्वाज ने बताया कि अगर कोई विदेशी नागरिक लेकर आ रहा है तो उसके लिए NDPS एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर कोई भारतीय नागरिक तस्करी कर ला रहा है तो सजा का अलग प्रावधान है।


