हम लोगों ने मिलकर 10 दिनों का टूर बनाया था, जिसमें महाकाल, पशुपतिनाथ, अयोध्या, मथुरा, काशी विश्वनाथ जैसे तीर्थ स्थल शामिल थे। गुरुवार को हम लोग महाराष्ट्र से निकले थे। शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे तक बाबा महाकाल के दर्शन के बाद हम सब अयोध्या दर्शन के लिए जा रहे थे। इसके बाद यह हादसा हो गया…. यह कहना था पनकी सरायमीता में हुए हादसे में घायल सारिका शरण, मुरलीधर व विद्या सावंत का। उन्होंने बताया कि उज्जैन महाकाल में दर्शन करके हम सब बहुत प्रफुल्लित थे… बस में हम सब बाबा के भजनों का आनंद ले रहे थे। हमारे साथ सिंधु घुमरे, मीराबाई और अलका ढोलक मंजीरा बजा रही थीं। बाकी सब तालियां बजाकर भजन गा रहे थे… धीरे–धीरे शाम ढली तब तक बस भिंड पहुंच चुकी थी। अस्पताल में खुली आंख, श्रद्धालु बोले- परिवार वालों को बता दीजिए वहां सब दर्शनार्थियों ने खाना खाया… कुछ देर होटल में ही आराम किया, तकरीबन रात का 10 बजा होगा, हम लोग अयोध्या श्रीराम लला के दर्शन के लिए निकले। जबसे मंदिर का निर्माण हुआ, उसके बाद से रामलला के दर्शनों की इच्छा थी, पहली बार उनकी मनमोहक प्रतिमा को निहारने के लिए जा रहे थे। विद्या ने बताया कि रात 12 बजे के आसपास बस में अधिकांश लोग सो गए थे, मैं भी कुछ देर बाद सो गई। तड़के आंख खुली तो देखा कि बस पनकी में किसी हाईवे किनारे ढाबे में रूकी थी, जहां सबने चाय पी। फिर हम सब अयोध्या के लिए निकल चुके थे। कुछ देर बाद अचानक से एक बार ऐसा लगा कि बस लहराई है, कुछ देर बाद एक जोरदार धमाका हुआ। मैं आगे की सीट से जा टकराई। एकदम से चीख पुकार मचने लगी, आंखों के आगे अंधेरा छा गया…. बस में धुंआ ही धुंआ भरा हुआ था, आगे की तरफ से चीखें और रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। कुछ समझ में ही नही आया कि एक पल में क्या हो गया, इसके बाद मैं बेहोश हो गई। आंख खुली तो अस्पताल में थी, मेरे घरवालों को बता दो कि मैं ठीक हूं। वहीं हादसे में घायल संगीता ने बताया कि जब हादसा हुआ तो वह नींद में थी, एकदम से धमाका हुआ तो उनकी नींद खुली, कुछ पलों के लिए तो कुछ समझ में नही आया, मैं सीट से उठी तो देखा कि हमारे कई साथी सीट के नीचे पड़े हुए है, मै अपने पति भास्कर को ढूंढने लगी तो वह खून से लथपथ पड़े हुए थे। मैं सीट से उतर कर पति के पास जाना चाहती थी, लेकिन चल नहीं पा रही थी। मैं मदद मांगने के लिए चिल्लाने लगी तो देखा कि अधिकांश लोग खून से लथपथ पड़े हुए थे, बस में भगदड़ मची थी। बस से उतरने के लिए लोगों की भीड़ दरवाजे पर जमा थी, कुछ लोग खिड़की से कूद रहे थे। कई लोग बस में फंस गए थे। कुछ देर बाद पुलिस और इलाकाई लोग मौके पर पहुंचे और हम लोगों को बस से निकाला। इसके बाद मुझे होश नहीं था। जब आंख खुली तो हम अस्पताल में थे। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा कि ईश्वर का लाख–लाख शुक्रिया कि इतने बड़े हादसे में हम बाल–बाल बच गए। घायल वृद्धा बोली- मेरे कपड़े फट गए, पुलिस ने मंगवाए वहीं हादसे के बाद लोगों को अपनेपन का एहसास दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल मूलरूप से महाराष्ट्र के रहने वाले एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके को लेकर हैलट पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय भाषा में घायल महिला से पूछा कि आई, तुम्ही कशा आहात? जिस पर उन्होंने जवाब दिया मी ठीक आहे (मै बिल्कुल ठीक हूं)… इथे सगळं खूप छान आहे… डॉक्टरांनी पण आमची खूप काळजी घेतली (यहां सब बहुत अच्छा है… डॉक्टरों ने हमारी खूब देखभाल की) तुम्ही सर्वांचे धन्यवाद… (आप सभी का बहुत धन्यवाद) इसके बाद पुलिस अधिकारी 75 वर्षीय सुशीला रस्कर के पास पहुंचे, हादसे में उनके कपड़े फट गए थे और उनकी बीपी की गोलियां भी बस में ही गिर गई थीं। जिस पर उन्होंने एडीसीपी से कहा कि माझे कपडे फाटले आहेत, मला चांगलं वाटत नाहीये आणि माझी बीपीची गोळी पण बसमध्ये पडली… (मेरे कपड़े फट गए है, मुझे अच्छा नहीं लग रहा और मेरी बीपी की दवाएं भी गिर गई हैं) जिस पर पुलिस अधिकारियों ने उनके लिए कपड़े मंगवाए और प्राचार्य संजय काला ने उनकी बीपी की दवाएं मंगवाई। वहीं एक महिला को आंखों से दिख नहीं रहा था, उसने पूछा कि क्या मेरा आंखों का आपरेशन होगा… जिस पर डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि कई बार अचानक झटके की वजह से सूजन आ जाती है, परेशान होने की जरूरत नहीं, आप जल्द स्वस्थ्य हो जाएंगी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने उनसे कहा कि परेशान मत होइए, आपको सही कराकर महाराष्ट्र भेजेंगे।


