नए साल में भगवान सूर्य उत्तरायण हो गए हैं। जिसके बाद खरमास समाप्त हो गया है। इस साल का पहला शुभ लग्न मुहूर्त आज गुरुवार को माघ शुक्ल एकादशी में है। 2026 में विवाह के लिए सबसे ज्यादा लग्न-मुहूर्त फरवरी महीने में है। 4 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक लग्न है। जुलाई में भी 6 मुहूर्त है। 5 महीने के चातुर्मास के बाद फिर नवंबर में 4 और दिसंबर में 7 शुभ मुहूर्त है। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा खरमास ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि इस साल विवाह की शहनाई बजने में देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण है शुक्र ग्रह का अस्त होना। इस वर्ष का दूसरा खरमास 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा। चैत्र कृष्ण एकादशी में 14 मार्च की देर रात 03:07 बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास के दौरान हिंदुओं के सभी शुभ कार्य पर विराम लग जाएगा।
5 महीने बंद रहेगा शादियों का दौर ज्योतिषाचार्य राकेश झा के मुताबिक इस वर्ष 2026 में अधिक मास का संयोग बना है। इसकी वजह से यह साल 12 के बजाय 13 महीने का हो गया है। इस साल ज्येष्ठ मास 2 महीने विद्यमान रहेंगे। 2 मई से 31 मई और 1 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। इस दौरान 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा और इसमें शादियां नहीं होंगी। फिर इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास होंगे। इस दौरान भगवान विष्णु 4 मास के लिए शयन में चले जाएंगे। इसलिए चातुर्मास के 4 महीने विवाह आदि शुभ मांगलिक कार्य नहीं होंगे। नए साल में भगवान सूर्य उत्तरायण हो गए हैं। जिसके बाद खरमास समाप्त हो गया है। इस साल का पहला शुभ लग्न मुहूर्त आज गुरुवार को माघ शुक्ल एकादशी में है। 2026 में विवाह के लिए सबसे ज्यादा लग्न-मुहूर्त फरवरी महीने में है। 4 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक लग्न है। जुलाई में भी 6 मुहूर्त है। 5 महीने के चातुर्मास के बाद फिर नवंबर में 4 और दिसंबर में 7 शुभ मुहूर्त है। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा खरमास ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि इस साल विवाह की शहनाई बजने में देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण है शुक्र ग्रह का अस्त होना। इस वर्ष का दूसरा खरमास 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा। चैत्र कृष्ण एकादशी में 14 मार्च की देर रात 03:07 बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास के दौरान हिंदुओं के सभी शुभ कार्य पर विराम लग जाएगा।
5 महीने बंद रहेगा शादियों का दौर ज्योतिषाचार्य राकेश झा के मुताबिक इस वर्ष 2026 में अधिक मास का संयोग बना है। इसकी वजह से यह साल 12 के बजाय 13 महीने का हो गया है। इस साल ज्येष्ठ मास 2 महीने विद्यमान रहेंगे। 2 मई से 31 मई और 1 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। इस दौरान 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा और इसमें शादियां नहीं होंगी। फिर इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास होंगे। इस दौरान भगवान विष्णु 4 मास के लिए शयन में चले जाएंगे। इसलिए चातुर्मास के 4 महीने विवाह आदि शुभ मांगलिक कार्य नहीं होंगे।


