आरा में शनिवार को दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर आपराधिक गतिविधियों और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गड़हनी थाना क्षेत्र के बनकट नहर मार्ग पर शनिवार को पूर्व मुखिया प्रेमा देवी के दिव्यांग पुत्र रितेश सिंह उर्फ भुअर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतक की पत्नी श्वेता सिंह के बयान पर 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन घटना के बाद से अब तक एक भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। शुरुआती जांच में तीन शूटरों के शामिल होने की आशंका प्रारंभिक जांच में बाइक सवार तीन शूटरों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर संभावित भागने के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। साथ ही तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है।मामले को और गंभीर बनाता है पुराना आपराधिक इतिहास। तीन साल पहले रितेश के भाई बबलू को भी मारी थी गोली करीब तीन वर्ष पूर्व मृतक के बड़े भाई बबलू सिंह को भी आरा में गोली मारी गई थी। उस कांड में चार आरोपित जेल गए थे, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य फिलहाल बाहर हैं। पुलिस की जांच अब उसी पुराने विवाद की ओर भी मुड़ गई है और शक की सुई उन आरोपितों पर टिक गई है, जो पहले से इस मामले से जुड़े रहे हैं। दर्ज प्राथमिकी में लहरपा गांव निवासी जितेंद्र यादव, मकरध्वज उर्फ रणवीर यादव, अंकित यादव, अमन महतो, नागेंद्र उर्फ छोटू यादव, संजय यादव और अजय यादव समेत नौ लोगों पर सीधे गोली मारने का आरोप लगाया गया है। वहीं, हीरा लाल यादव समेत दो अन्य पर साजिश रचने का आरोप है। मृतक की पत्नी श्वेता सिंह ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि पूर्व में हुए हमले की रंजिश में ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। फिलहाल पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। आरा में शनिवार को दिनदहाड़े हुई सनसनीखेज हत्या ने एक बार फिर आपराधिक गतिविधियों और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गड़हनी थाना क्षेत्र के बनकट नहर मार्ग पर शनिवार को पूर्व मुखिया प्रेमा देवी के दिव्यांग पुत्र रितेश सिंह उर्फ भुअर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में मृतक की पत्नी श्वेता सिंह के बयान पर 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन घटना के बाद से अब तक एक भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। शुरुआती जांच में तीन शूटरों के शामिल होने की आशंका प्रारंभिक जांच में बाइक सवार तीन शूटरों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर संभावित भागने के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। साथ ही तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है।मामले को और गंभीर बनाता है पुराना आपराधिक इतिहास। तीन साल पहले रितेश के भाई बबलू को भी मारी थी गोली करीब तीन वर्ष पूर्व मृतक के बड़े भाई बबलू सिंह को भी आरा में गोली मारी गई थी। उस कांड में चार आरोपित जेल गए थे, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य फिलहाल बाहर हैं। पुलिस की जांच अब उसी पुराने विवाद की ओर भी मुड़ गई है और शक की सुई उन आरोपितों पर टिक गई है, जो पहले से इस मामले से जुड़े रहे हैं। दर्ज प्राथमिकी में लहरपा गांव निवासी जितेंद्र यादव, मकरध्वज उर्फ रणवीर यादव, अंकित यादव, अमन महतो, नागेंद्र उर्फ छोटू यादव, संजय यादव और अजय यादव समेत नौ लोगों पर सीधे गोली मारने का आरोप लगाया गया है। वहीं, हीरा लाल यादव समेत दो अन्य पर साजिश रचने का आरोप है। मृतक की पत्नी श्वेता सिंह ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि पूर्व में हुए हमले की रंजिश में ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया है। फिलहाल पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।


