माघ के अंतिम में दिन से विदा होने लगी ठंड, पछुआ से हो रहा फागुन का अहसास

माघ के अंतिम में दिन से विदा होने लगी ठंड, पछुआ से हो रहा फागुन का अहसास

सिटी रिपोर्टर | जहानाबाद माघ महीने के अंतिम दिनों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पछुआ हवा के प्रवाह से जिले में फागुन जैसा अहसास होने लगा है। जिससे समय से पहले मौसम में बदलाव की आहट महसूस की जा रही है। शुक्रवार की सुबह आसमान में काले बादल छाए रहे। जिससे किसानों को बारिश की उम्मीद जगी। हालांकि करीब 10 बजे के बाद तेज धूप निकल आई और बादल बिना बरसे ही लौट गए। दिनभर 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चलती रही। जिससे हल्की गर्मी का एहसास हुआ। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि दिन में आर्द्रता 54 प्रतिशत रही। मौसम के इस बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह बादलों की घनी परत देख खेतों में काम कर रहे किसान बारिश की आस लगाए बैठे थे। गेहूं, चना और सरसों की फसलों के लिए यह बारिश संजीवनी साबित होती, लेकिन धूप निकलते ही उनकी उम्मीदें टूट गईं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार पछुआ हवा के प्रभाव से वातावरण में नमी तो बनी हुई है। लेकिन ठोस सिस्टम नहीं बनने के कारण बारिश नहीं हो सकी। सिटी रिपोर्टर | जहानाबाद माघ महीने के अंतिम दिनों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पछुआ हवा के प्रवाह से जिले में फागुन जैसा अहसास होने लगा है। जिससे समय से पहले मौसम में बदलाव की आहट महसूस की जा रही है। शुक्रवार की सुबह आसमान में काले बादल छाए रहे। जिससे किसानों को बारिश की उम्मीद जगी। हालांकि करीब 10 बजे के बाद तेज धूप निकल आई और बादल बिना बरसे ही लौट गए। दिनभर 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछुआ हवा चलती रही। जिससे हल्की गर्मी का एहसास हुआ। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि दिन में आर्द्रता 54 प्रतिशत रही। मौसम के इस बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सुबह बादलों की घनी परत देख खेतों में काम कर रहे किसान बारिश की आस लगाए बैठे थे। गेहूं, चना और सरसों की फसलों के लिए यह बारिश संजीवनी साबित होती, लेकिन धूप निकलते ही उनकी उम्मीदें टूट गईं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार पछुआ हवा के प्रभाव से वातावरण में नमी तो बनी हुई है। लेकिन ठोस सिस्टम नहीं बनने के कारण बारिश नहीं हो सकी।  

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