इंदौर के चर्चित ड्राइवर अपहरण-हत्या प्रकरण में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश भारतकुमार व्यास की कोर्ट ने उद्योगपति हेमंत नीमा, उनके पुत्र पीयूष नीमा समेत सभी 12 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अन्य आरोपियों में जगदीश, रितेश, राहुल, हरीश, सुरेंद्र सिंह, शेखर, लोकेश, मोहन, व्यापक और कुणाल शामिल हैं। बचाव पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट अविनाश सिरपुरकर और उदयप्रताप सिंह ने पैरवी की। कोर्ट ने मामले में गवाहों के पक्षद्रोही (होस्टाइल) होने पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने एसपी इंदौर को निर्देश दिए हैं कि गवाहों के पलटने की वजह की जांच की जाए। कोर्ट ने एएसआई भागीरथ जाट, तहसीलदार रितेश जोशी, डॉ. संजय वाधवानी, डॉ. नीरज गुप्ता और डॉ. जिनेन्द्र कुमार सेठिया की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए हैं। यह पता लगाया जाएगा कि गवाह स्वाभाविक रूप से मुकरे या किसी दबाव या लाभ के चलते उन्होंने न्याय प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया। 5 साल पहले हुई थी हत्या यह मामला 10 मार्च 2020 का है। महाराष्ट्र के धारफुले निवासी प्रमोद मतकर की हत्या कर शव सिमरोल क्षेत्र के भेरूघाट जंगल में फेंक दिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई थी और शरीर पर मारपीट के निशान मिले थे। ड्राइवर था, विवाद के बाद हत्या का आरोप पुलिस जांच में सामने आया था कि प्रमोद मतकर पहले नीमा परिवार के यहां ड्राइवर था। आरोप था कि विवाद के बाद उसका अपहरण कर एक बंगले में ले जाकर क्रिकेट बैट से पीट-पीटकर हत्या की गई और शव जंगल में फेंक दिया गया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।


