नालंदा के हिलसा सिविल कोर्ट ने शनिवार को 39 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में फैसला सुनाते हुए पांच दोषियों को कठोर सजा सुनाई है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार पाण्डेय ने जानलेवा हमले में शामिल पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। 1987 में हुई थी घटना ये मामला इस्लामपुर थाना क्षेत्र के सुंदरबीघा लारनपुर गांव का है। 23 अक्टूबर 1987 की सुबह करीब साढ़े छह बजे की बात है, जब गांव में एक भीषण घटना घटी। उस दिन जयप्रकाश यादव के बेटे जयराम प्रसाद गांव की गली में मुंह धो रहे थे। तभी अचानक 10-15 लोगों का एक समूह हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचा और बेरहमी से फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में जयराम प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित के पिता जयप्रकाश यादव की शिकायत पर इस्लामपुर थाने में रामजतन गोप, रामवरण गोप, शौजेंद्र गोप, रामवली गोप एवं बल्लभ गोप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। न्यायालय ने सभी पांच दोषियों को दोहरी सजा सुनाई अपर लोक अभियोजक राजाराम सिंह ने बताया कि पुलिस की ओर से गहन अनुसंधान के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया था। मामले की सुनवाई हिलसा व्यवहार न्यायालय में चली। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें विस्तार से सुनीं। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की गहन पड़ताल के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सभी पांच आरोपी दोषी हैं। पहला: भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड। दूसरा: शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत तीन वर्ष की कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास। न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। नालंदा के हिलसा सिविल कोर्ट ने शनिवार को 39 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में फैसला सुनाते हुए पांच दोषियों को कठोर सजा सुनाई है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार पाण्डेय ने जानलेवा हमले में शामिल पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। 1987 में हुई थी घटना ये मामला इस्लामपुर थाना क्षेत्र के सुंदरबीघा लारनपुर गांव का है। 23 अक्टूबर 1987 की सुबह करीब साढ़े छह बजे की बात है, जब गांव में एक भीषण घटना घटी। उस दिन जयप्रकाश यादव के बेटे जयराम प्रसाद गांव की गली में मुंह धो रहे थे। तभी अचानक 10-15 लोगों का एक समूह हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचा और बेरहमी से फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में जयराम प्रसाद गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित के पिता जयप्रकाश यादव की शिकायत पर इस्लामपुर थाने में रामजतन गोप, रामवरण गोप, शौजेंद्र गोप, रामवली गोप एवं बल्लभ गोप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। न्यायालय ने सभी पांच दोषियों को दोहरी सजा सुनाई अपर लोक अभियोजक राजाराम सिंह ने बताया कि पुलिस की ओर से गहन अनुसंधान के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया था। मामले की सुनवाई हिलसा व्यवहार न्यायालय में चली। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें विस्तार से सुनीं। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की गहन पड़ताल के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सभी पांच आरोपी दोषी हैं। पहला: भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड। दूसरा: शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत तीन वर्ष की कारावास एवं 10 हजार रुपए अर्थदंड। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास। न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।


