सुपौल में छातापुर के BCO को विभाग ने किया निलंबित:धान खरीद-पैक्स कार्यों में गंभीर लापरवाही के आरोप, DM सावन कुमार का एक्शन प्लान एक्टिव

सुपौल में छातापुर के BCO को विभाग ने किया निलंबित:धान खरीद-पैक्स कार्यों में गंभीर लापरवाही के आरोप, DM सावन कुमार का एक्शन प्लान एक्टिव

सुपौल जिले में बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने छातापुर प्रखंड के वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया है। उन पर गंभीर अनियमितताओं और विभागीय निर्देशों की अवहेलना का आरोप है। यह कार्रवाई सुपौल के डीएम सावन कुमार के एक्शन प्लान के तहत की गई है।

निलंबन का आदेश निबंधक, सहयोग समितियां, बिहार, पटना के कार्यालय से जारी किया गया है। संयुक्त निबंधक (साख) समरेश कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रदीप कुमार के खिलाफ कई गंभीर आरोप जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, सुपौल द्वारा लगाए गए थे।

जारी आदेश में छातापुर प्रखंड के राजेश्वरी पश्चिम पैक्स और धीबहा पैक्स से संबंधित मामलों में वांछित जानकारी उपलब्ध कराने में गंभीर लापरवाही और भ्रामक सूचना देने का आरोप शामिल है। पारिवारिक संबंध की स्थिति नहीं की स्पष्ट आरोप है कि पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक के बीच पारिवारिक संबंध की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। जानबूझकर अध्यक्ष और प्रबंधक के पति या पिता का नाम एक ही अंकित कर वास्तविक पारिवारिक संबंध छिपाने का प्रयास किया गया। विभाग का मानना है कि इस प्रकार की गलत और भ्रामक सूचना आदर्श पैक्स कार्मिक सेवा नियमावली का उल्लंघन है। इसके अलावा धान अधिप्राप्ति से संबंधित मामलों में भी गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार धान खरीद से पहले निबंधित किसानों के दस्तावेजों और कृषि विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए गए भूमि संबंधी कागजातों का शत-प्रतिशत मिलान नहीं किया गया। संतोषजनक नहीं मिला स्पष्टीकरण किसानों के दिए गए भूमि दस्तावेज, अद्यतन लगान रसीद और घोषणा-पत्र की समुचित जांच नहीं की गई, जिससे धान खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता की संभावना बनी रही। इस मामले में सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, त्रिवेणीगंज अंचल द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण भी विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चरणे पैक्स में निर्माणाधीन 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण कार्य की जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रदीप कुमार ने गोदाम का भौतिक सत्यापन 14 अगस्त और 28 अगस्त 2025 को किए जाने की जानकारी दी थी, लेकिन जांच प्रतिवेदन से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। विभागीय अभिलेखों के अनुसार तत्कालीन वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी के पत्रों का हवाला देकर जांच का उल्लेख किया गया, जबकि वास्तविक भौतिक सत्यापन और विस्तृत जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया। एक साल में पूरा नहीं हुआ गोदाम निर्माण साथ ही जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा 19 जनवरी 2026 को गोदाम निर्माण कार्य की जांच के लिए पत्र निर्गत किए जाने के बाद भी स्थलीय जांच नहीं की गई। आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन मनमाना और झूठा प्रतीत होता है। आरोप है कि निर्धारित एक वर्ष की अवधि में गोदाम निर्माण पूरा नहीं कराया गया, जबकि कार्य लंबे समय से बंद पड़ा रहा। इसके बावजूद वित्तीय अनियमितता या सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की जांच जानबूझकर नहीं की गई। बताया गया है कि प्रदीप कुमार की अनुशंसा पर ही 17 अगस्त 2023 को गोदाम निर्माण के लिए तीसरी किस्त के रूप में 8.42 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहने और जांच नहीं होने के कारण सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्पष्टीकरण का भी नहीं दिया जवाब इसके अतिरिक्त राइस मिल में प्रतिनियुक्ति से संबंधित चावल कुटाई के प्रतिवेदन को भी समय पर प्रस्तुत नहीं करने का आरोप लगाया गया है। विभागीय पत्रों के बावजूद आवश्यक प्रतिवेदन समर्पित नहीं किया गया और इस संबंध में मांगे गए स्पष्टीकरण का भी जवाब नहीं दिया गया। इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना, अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही माना गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रदीप कुमार का यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) के प्रतिकूल है। इसलिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियां, मगध प्रमंडल, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अनुशासनिक प्राधिकार की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सहकारिता विभाग के इस कार्रवाई को जिले में पैक्स व्यवस्था और धान खरीद प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुपौल जिले में बिहार सरकार के सहकारिता विभाग ने छातापुर प्रखंड के वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया है। उन पर गंभीर अनियमितताओं और विभागीय निर्देशों की अवहेलना का आरोप है। यह कार्रवाई सुपौल के डीएम सावन कुमार के एक्शन प्लान के तहत की गई है।

निलंबन का आदेश निबंधक, सहयोग समितियां, बिहार, पटना के कार्यालय से जारी किया गया है। संयुक्त निबंधक (साख) समरेश कुमार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रदीप कुमार के खिलाफ कई गंभीर आरोप जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, सुपौल द्वारा लगाए गए थे।

जारी आदेश में छातापुर प्रखंड के राजेश्वरी पश्चिम पैक्स और धीबहा पैक्स से संबंधित मामलों में वांछित जानकारी उपलब्ध कराने में गंभीर लापरवाही और भ्रामक सूचना देने का आरोप शामिल है। पारिवारिक संबंध की स्थिति नहीं की स्पष्ट आरोप है कि पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक के बीच पारिवारिक संबंध की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। जानबूझकर अध्यक्ष और प्रबंधक के पति या पिता का नाम एक ही अंकित कर वास्तविक पारिवारिक संबंध छिपाने का प्रयास किया गया। विभाग का मानना है कि इस प्रकार की गलत और भ्रामक सूचना आदर्श पैक्स कार्मिक सेवा नियमावली का उल्लंघन है। इसके अलावा धान अधिप्राप्ति से संबंधित मामलों में भी गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार धान खरीद से पहले निबंधित किसानों के दस्तावेजों और कृषि विभाग के पोर्टल पर अपलोड किए गए भूमि संबंधी कागजातों का शत-प्रतिशत मिलान नहीं किया गया। संतोषजनक नहीं मिला स्पष्टीकरण किसानों के दिए गए भूमि दस्तावेज, अद्यतन लगान रसीद और घोषणा-पत्र की समुचित जांच नहीं की गई, जिससे धान खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितता की संभावना बनी रही। इस मामले में सहायक निबंधक, सहयोग समितियां, त्रिवेणीगंज अंचल द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण भी विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चरणे पैक्स में निर्माणाधीन 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण कार्य की जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रदीप कुमार ने गोदाम का भौतिक सत्यापन 14 अगस्त और 28 अगस्त 2025 को किए जाने की जानकारी दी थी, लेकिन जांच प्रतिवेदन से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। विभागीय अभिलेखों के अनुसार तत्कालीन वरीय सहकारिता प्रसार पदाधिकारी के पत्रों का हवाला देकर जांच का उल्लेख किया गया, जबकि वास्तविक भौतिक सत्यापन और विस्तृत जांच प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया। एक साल में पूरा नहीं हुआ गोदाम निर्माण साथ ही जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल द्वारा 19 जनवरी 2026 को गोदाम निर्माण कार्य की जांच के लिए पत्र निर्गत किए जाने के बाद भी स्थलीय जांच नहीं की गई। आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन मनमाना और झूठा प्रतीत होता है। आरोप है कि निर्धारित एक वर्ष की अवधि में गोदाम निर्माण पूरा नहीं कराया गया, जबकि कार्य लंबे समय से बंद पड़ा रहा। इसके बावजूद वित्तीय अनियमितता या सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की जांच जानबूझकर नहीं की गई। बताया गया है कि प्रदीप कुमार की अनुशंसा पर ही 17 अगस्त 2023 को गोदाम निर्माण के लिए तीसरी किस्त के रूप में 8.42 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहने और जांच नहीं होने के कारण सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्पष्टीकरण का भी नहीं दिया जवाब इसके अतिरिक्त राइस मिल में प्रतिनियुक्ति से संबंधित चावल कुटाई के प्रतिवेदन को भी समय पर प्रस्तुत नहीं करने का आरोप लगाया गया है। विभागीय पत्रों के बावजूद आवश्यक प्रतिवेदन समर्पित नहीं किया गया और इस संबंध में मांगे गए स्पष्टीकरण का भी जवाब नहीं दिया गया। इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना, अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही माना गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रदीप कुमार का यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3(1) के प्रतिकूल है। इसलिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियां, मगध प्रमंडल, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अनुशासनिक प्राधिकार की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सहकारिता विभाग के इस कार्रवाई को जिले में पैक्स व्यवस्था और धान खरीद प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

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