सीवान सदर अस्पताल में शनिवार को प्रशासनिक लापरवाही का शर्मनाक दृश्य सामने आया, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की असलियत उजागर कर दी। इमरजेंसी वार्ड के बाहर एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक तड़पता रहा लेकिन अस्पताल कर्मियों ने उसे उठाने तक की जहमत नहीं उठाई। स्थानीय लोग और मीडिया की मौजूदगी के बावजूद घंटों तक स्थिति बदली नहीं। अंततः वहां मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद घायल युवक को टोटो से उतारकर स्ट्रेचर के सहारे इमरजेंसी वार्ड तक ले जाया गया। अनियंत्रित वाहन ने युवक को मारी जोरदार टक्कर डायल 112 की बाइक पर तैनात सिपाही मनीष कुमार के मुताबिक, नगर थाना क्षेत्र के संतोषी माता मंदिर के पास एक अनियंत्रित अज्ञात वाहन ने सड़क पर जा रहे युवक को जोरदार टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस पेट्रोलिंग टीम पहुंची और गंभीर रूप से घायल युवक को टोटो की मदद से तत्काल सदर अस्पताल लाया गया। लेकिन अस्पताल परिसर में पहुंचने के बाद कथित रूप से पूरा सिस्टम ठप दिखाई दिया। सिपाही मनीष ने बताया कि अस्पताल परिसर में मौजूद किसी भी कर्मचारी ने घायल को स्ट्रेचर उपलब्ध कराने या इमरजेंसी तक पहुंचाने में जरा सी भी मदद नहीं की। लोग बाेले-मंत्री के गृह जिले के मुख्य अस्पताल में लापरवाही अस्पताल में उपस्थित कई लोगों ने सवाल खड़ा किया कि जब मंत्री के गृह जिले के मुख्य अस्पताल में ऐसी लापरवाही होती है, तो अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या होगी? गौरतलब है कि सीवान जिला न सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का गृह जिला है, बल्कि वे सीवान सदर विधानसभा से विधायक भी हैं। जनता का आरोप है कि बार-बार दावों के बावजूद अस्पताल में स्टाफ की कमी, संवेदनहीनता और कर्तव्यहीनता आम बात बन चुकी है। इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के तुरंत बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके कार्यालय में ताला लटका मिला। फोन कॉल करने पर भी उन्होंने रिसीव नहीं किया। इस चुप्पी ने अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर और अधिक सवाल पैदा कर दिए हैं। सीवान सदर अस्पताल में शनिवार को प्रशासनिक लापरवाही का शर्मनाक दृश्य सामने आया, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की असलियत उजागर कर दी। इमरजेंसी वार्ड के बाहर एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल युवक तड़पता रहा लेकिन अस्पताल कर्मियों ने उसे उठाने तक की जहमत नहीं उठाई। स्थानीय लोग और मीडिया की मौजूदगी के बावजूद घंटों तक स्थिति बदली नहीं। अंततः वहां मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद घायल युवक को टोटो से उतारकर स्ट्रेचर के सहारे इमरजेंसी वार्ड तक ले जाया गया। अनियंत्रित वाहन ने युवक को मारी जोरदार टक्कर डायल 112 की बाइक पर तैनात सिपाही मनीष कुमार के मुताबिक, नगर थाना क्षेत्र के संतोषी माता मंदिर के पास एक अनियंत्रित अज्ञात वाहन ने सड़क पर जा रहे युवक को जोरदार टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस पेट्रोलिंग टीम पहुंची और गंभीर रूप से घायल युवक को टोटो की मदद से तत्काल सदर अस्पताल लाया गया। लेकिन अस्पताल परिसर में पहुंचने के बाद कथित रूप से पूरा सिस्टम ठप दिखाई दिया। सिपाही मनीष ने बताया कि अस्पताल परिसर में मौजूद किसी भी कर्मचारी ने घायल को स्ट्रेचर उपलब्ध कराने या इमरजेंसी तक पहुंचाने में जरा सी भी मदद नहीं की। लोग बाेले-मंत्री के गृह जिले के मुख्य अस्पताल में लापरवाही अस्पताल में उपस्थित कई लोगों ने सवाल खड़ा किया कि जब मंत्री के गृह जिले के मुख्य अस्पताल में ऐसी लापरवाही होती है, तो अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या होगी? गौरतलब है कि सीवान जिला न सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का गृह जिला है, बल्कि वे सीवान सदर विधानसभा से विधायक भी हैं। जनता का आरोप है कि बार-बार दावों के बावजूद अस्पताल में स्टाफ की कमी, संवेदनहीनता और कर्तव्यहीनता आम बात बन चुकी है। इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के तुरंत बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके कार्यालय में ताला लटका मिला। फोन कॉल करने पर भी उन्होंने रिसीव नहीं किया। इस चुप्पी ने अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर और अधिक सवाल पैदा कर दिए हैं।


