छत्तीसगढ़ के सिहावा थाना परिसर स्थित मां खंभेश्वरी देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर महाअष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान थाना स्टाफ ने हवन-पूजन कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। परंपरा अनुसार, नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया। सिहावा थाना परिसर में स्थित मां खंभेश्वरी देवी का यह मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां की सबसे खास बात यह है कि मां की पूजा प्रतिदिन स्वयं पुलिसकर्मियों द्वारा की जाती है। वर्षों से चली आ रही मान्यता के अनुसार, मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा को किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा स्पर्श करना वर्जित है, जिसका सभी श्रद्धालु पूर्ण आस्था के साथ पालन करते हैं। प्रत्येक वर्ष चैत्र और कुंवार (आश्विन) नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजन-अर्चना आयोजित की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक थाना परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहता है, जिसमें पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी के साथ-साथ भक्ति में भी पूरी निष्ठा से जुटे रहते हैं। सिहावा थाना का रोचक इतिहास सिहावा थाना का इतिहास भी रोचक और गौरवपूर्ण है। बताया जाता है कि यह स्थल मूल रूप से एक मंदिर था। ब्रिटिश शासनकाल में सिहावा क्षेत्र से रेलवे के लिए साल लकड़ी के स्लीपरों की आपूर्ति की जाती थी। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने वर्ष 1898 में यहां थाना स्थापित किया और 1903 में थाना भवन का निर्माण कराया। स्थानीय लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर को उसी स्वरूप में बनाए रखा गया। यही कारण है कि आज भी थाना परिसर में मंदिर सुरक्षित रूप से मौजूद है और पूजा-अर्चना की परंपरा निरंतर जारी है। यह थाना छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने और ऐतिहासिक थानों में गिना जाता है। ड्यूटी के साथ मिलता है सुकून थाना प्रभारी निरीक्षक शरद ताम्रकार ने बताया कि उन्होंने अपने सेवाकाल में ऐसा थाना कहीं नहीं देखा। उनके अनुसार, यहां काम करना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी है। मां खंभेश्वरी देवी की कृपा से थाना परिसर में एक सकारात्मक और शांत वातावरण बना रहता है। सिहावा थाना आज एक ऐसा उदाहरण बन गया है, जहां इतिहास, आस्था और कर्तव्य एक साथ जीवंत रूप में दिखाई देते हैं। 128 वर्षों की यह विरासत न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।


