सतना में प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा बिक रहा है। मंगलवार को कोलगवां थाना क्षेत्र के कृपालपुर में 27 वर्षीय दुर्गेश केवट पुत्र गया प्रसाद चाइनीज मांझे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उनका गला कटने से बाल-बाल बचा। यह घटना शाम को हुई जब दुर्गेश पैदल अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान एक कटी पतंग का मांझा हवा में लहराता हुआ आया और उनके गले में फंस गया। अप्रत्याशित घटना से घबराए युवक ने मांझा निकालने की कोशिश की, जिससे उनका गला गंभीर रूप से जख्मी हो गया। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले गए, जहां उपचार के बाद दुर्गेश को छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने दुकानों पर की छापेमारी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। सीएसपी डीपी सिंह चौहान के नेतृत्व में स्टेशन रोड स्थित मेन मार्केट की कई जनरल स्टोर पर दबिश दी गई। कोतवाली और अन्य थानों की पुलिस ने भी विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की। बताया गया है कि स्टेशन रोड स्थित गुरुनानक जनरल स्टोर से प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बरामद किया गया है। उल्लेखनीय है कि जनसुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया ने चाइनीज मांझे के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा रखा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इसका निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय और उपयोग दंडनीय अपराध है। प्रशासन ने सुरक्षित पतंगबाजी के लिए केवल सूती धागे से बने सादे मांझे के उपयोग की सलाह दी है। इसके बावजूद, कुछ कारोबारी चंद मुनाफे के लिए चोरी-छिपे इसकी बिक्री कर रहे हैं। यह अपने किस्म की पहली घटना है। जानलेवा क्यों हैं ये मांझा
जानकारों ने बताया कि इसे नायलॉन, प्लास्टिक या सिंथेटिक सामग्री से बनाया जाता है। इसमें कांच और लोहे समेत अन्य धातुओं के चूरे का लेप किया जाता है। पतंगबाजी के दौरान अगर यह मांझा पक्षियों, पैदल राहगीरों या फिर दो पहिया वाहन चालकों के किसी भी अंग में आकर फंस जाता है तो वह उसे बुरी तरह से जख्मी कर देता है। इससे टिटनेस के अलावा विभिन्न प्रकार के संक्रमण के भी खतरे होते हैं।


