कानपुर के रावतपुर में युवक ने शादी के दो माह बाद ही फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली। घटना की जानकारी होते ही परिजन उपचार के लिये हैलट ले गये जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दो माह पहले हुई थी शादी रावतपुर थाना क्षेत्र के मस्वानपुर निवासी विनीत प्राइवेट जॉब करते है। परिवार में माँ नीरज है और पिता संतोष कुशवाहा की काफ़ी समय पहले मौत हो गई थीं। बड़े भाई अभिजीत कुशवाहा (31) लोडर चालक है। भाई विनीत कुशवाहा ने बताया कि भाई कि शादी 18 नवंबर को चौबेपुर के बंसठी गांव निवासी आशा से हुई थीं। शादी के बाद से सबकुछ ठीक चल रहा था। अभिजीत को सिज़ोफ्रेनिया नामक बीमारी थीं जिससे वह बहुत अधिक बीमार रहता था इससे पहले भी वह कई बार आत्महत्या करने का प्रयास कर चुका था। भाई शनिवार सुबह सोकर उठे और भाभी से टहलने कि बात कहकर घर के तीसरे फ्लोर पर बने कमरे में चले गये। और कमरा बंद कर अंदर रस्सी से पंखे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब काफ़ी देर तक वह नीचे नहीं आए तो भाभी उन्हें चाय देने ऊपर गईं। दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक दरवाजा खटकाने के बाद भी ज़ब कोई आहट नहीं आई तो सभी ने मिलकर दरवाजा तोड़कर कमरे में दाखिल हुए तो भाई को फंदे से लटकता देख सभी के होश उड़ गये। आनन-फानन में उन्हें नीचे उतार कर उपचार के लिए हैलट हॉस्पिटल लेकर गए। जहां डॉक्टर उन्हें देखते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद 112 नंबर डायल कर घटना कि सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही रावतपुर थाने का फ़ोर्स मौके पर पहुंचा और घटना कि जाँच पड़ताल कर शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। बोले थाना प्रभारी- रावतपुर थाना प्रभारी मनोज मिश्रा ने बताया कि मृतक मानसिक रूप से परेशान रहता था। परिजनों के अनुसार वह पहले भी कई बार सुसाइड करने का प्रयास कर चुका था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच की है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अगर परिजनों की ओर से कोई तहरीर मिलेगी तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। क्या है सिज़ोफ्रेनिया बीमारी सिज़ोफ्रेनिया एक गंभीर, दीर्घकालिक (क्रोनिक) मानसिक विकार है जो किसी व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसमें रोगी वास्तविकता से संपर्क खो देता है, जिससे मतिभ्रम (अस्तित्वहीन आवाज़ें सुनना), भ्रम (गलत विश्वास), अव्यवस्थित सोच और व्यवहार की समस्याएं हो सकती हैं। यह 16 से 30 वर्ष की आयु के बीच अधिक पाया जाता है। इससे ग्रसित ब्यक्ति कभी भी किसी भी तरह का हानिकारक कदम उठा सकता है।


