पूर्णिया के के.नगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत से आदिवासी महिलाओं के साथ ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि गणेशपुर पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर रणविजय चौधरी उर्फ गुड्डू चौधरी ने जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के खातों से सरकारी सहायता राशि अवैध रूप से निकाल ली। गणेशपुर गांव और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। पीड़ित महिलाएं प्रशासन से जल्द न्याय और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग कर रही हैं। पीड़िता मसूमात तालामाय हसदा, चांदमुनी मुर्मू, गगवती कुमारी, पिंकी टुडू और रेनू टुडू ने बताया कि भारत सरकार और बिहार सरकार की ओर से जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए 10 हजार की सहायता राशि पिछले साल 26 सितंबर को उनके खातों में भेजी गई थी। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जब वे बैलेंस की जानकारी लेने पोस्ट ऑफिस पहुंचीं, तो उनसे बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट लिया गया। 6 नवंबर को उनकी जानकारी के बिना ही खाते से पैसे निकाल लिए गए। कहा- हकीकत में नहीं मिले रुपए तालामय मरांडी और फुलमनी देवी का आरोप है कि पोस्टमास्टर ने रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान दिखाकर विभाग में यह साबित कर दिया कि राशि का भुगतान हो चुका है, जबकि हकीकत में किसी भी महिला को एक भी रुपया नहीं मिला। वार्ड नंबर-10 के वार्ड सदस्य दिलीप कुमार हसदा ने बताया कि करीब 10 से 12 आदिवासी महिलाएं इस ठगी का शिकार हुई हैं। गरीब और अनपढ़ महिलाओं के रोजगार के पैसे को हड़पना गंभीर अपराध है। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जिला प्रशासन और क्षेत्रीय मंत्री लेसी सिंह से उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। बीपीएम बोले- लिखित शिकायत नहीं मिली है जीविका बीपीएम दिलीप कुमार मेहता ने बताया कि अभी तक कार्यालय में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। प्रखंड जीविका लेखपाल अमरेश कुमार पासवान ने भी मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है। पूर्णिया के के.नगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत से आदिवासी महिलाओं के साथ ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि गणेशपुर पोस्ट ऑफिस के पोस्टमास्टर रणविजय चौधरी उर्फ गुड्डू चौधरी ने जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के खातों से सरकारी सहायता राशि अवैध रूप से निकाल ली। गणेशपुर गांव और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। पीड़ित महिलाएं प्रशासन से जल्द न्याय और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग कर रही हैं। पीड़िता मसूमात तालामाय हसदा, चांदमुनी मुर्मू, गगवती कुमारी, पिंकी टुडू और रेनू टुडू ने बताया कि भारत सरकार और बिहार सरकार की ओर से जीविका दीदियों को स्वरोजगार के लिए 10 हजार की सहायता राशि पिछले साल 26 सितंबर को उनके खातों में भेजी गई थी। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जब वे बैलेंस की जानकारी लेने पोस्ट ऑफिस पहुंचीं, तो उनसे बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट लिया गया। 6 नवंबर को उनकी जानकारी के बिना ही खाते से पैसे निकाल लिए गए। कहा- हकीकत में नहीं मिले रुपए तालामय मरांडी और फुलमनी देवी का आरोप है कि पोस्टमास्टर ने रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान दिखाकर विभाग में यह साबित कर दिया कि राशि का भुगतान हो चुका है, जबकि हकीकत में किसी भी महिला को एक भी रुपया नहीं मिला। वार्ड नंबर-10 के वार्ड सदस्य दिलीप कुमार हसदा ने बताया कि करीब 10 से 12 आदिवासी महिलाएं इस ठगी का शिकार हुई हैं। गरीब और अनपढ़ महिलाओं के रोजगार के पैसे को हड़पना गंभीर अपराध है। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जिला प्रशासन और क्षेत्रीय मंत्री लेसी सिंह से उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। बीपीएम बोले- लिखित शिकायत नहीं मिली है जीविका बीपीएम दिलीप कुमार मेहता ने बताया कि अभी तक कार्यालय में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। प्रखंड जीविका लेखपाल अमरेश कुमार पासवान ने भी मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है।


