नालंदा सदर अस्पताल में डीएस ने एजेंसी से मांगा जवाब:243 मरीजों के बीच महज 12 गार्ड होने पर सवाल, भुगतान काटने का लिया फैसला

नालंदा सदर अस्पताल में डीएस ने एजेंसी से मांगा जवाब:243 मरीजों के बीच महज 12 गार्ड होने पर सवाल, भुगतान काटने का लिया फैसला

होली के त्योहार के दौरान जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही सामने आई है। ईमरजेंसी वार्ड में मरीजों के भारी दबाव के बीच पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं रहने पर अस्पताल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. राजीव रंजन ने सुरक्षा एजेंसी से इस कोताही पर जवाब-तलब किया है और स्पष्ट किया है कि सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति के अनुपात में एजेंसी के भुगतान में कटौती की जाएगी। 12 गार्ड संभाल रहे थे ड्यूटी अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, होली की संवेदनशील रातों (3 और 4 मार्च) को अस्पताल परिसर में कुल 38 सुरक्षा गार्डों की मुस्तैदी होनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर महज 12 गार्ड ही ड्यूटी पर पाए गए। गार्डों की इस भारी कमी के कारण न केवल अस्पताल की सुरक्षा प्रभावित हुई, बल्कि जख्मी हालत में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की अनियंत्रित भीड़ को संभालने में भी स्वास्थ्य कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। डीएस ने बताया कि एजेंसी को केवल उपस्थित गार्डों के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा और शेष राशि काट ली जाएगी। मारपीट के सर्वाधिक मामले, 243 मरीज हुए भर्ती होली के दौरान सदर अस्पताल का ईमरजेंसी वार्ड पूरी तरह व्यस्त रहा। दो दिनों के भीतर कुल 243 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें सर्वाधिक मामले आपसी मारपीट और हिंसक झड़पों से जुड़े थे। गंभीर रूप से घायल 16 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया, जबकि शेष का अस्पताल में ही सफल उपचार किया गया। भीड़भाड़ और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दीं। इन योद्धाओं ने संभाली कमान सुरक्षा व्यवस्था की खामियों के बीच अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों ने रात-भर जागकर घायलों की सेवा की। डॉ. राज शेखर, डॉ. विश्वजीत, डॉ. प्रशांत, डॉ. रचिता शांति, डॉ. अन्नु कुमारी, डॉ. पिंटू कुमार, डॉ. अंजय और डॉ. शशिकांत वर्मा ने आपातकालीन सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल प्रबंधक इमरान खुद देर रात दो बजे तक ईमरजेंसी में डटे रहे। वहीं, जीएनएम सुलेखा कुमारी, चंद्र प्रभा, शमदर, पिंटू शर्मा, अर्चना, कल्पना और वार्ड बॉय नवीन कुमार की मुस्तैदी की भी सराहना की जा रही है। होली के त्योहार के दौरान जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही सामने आई है। ईमरजेंसी वार्ड में मरीजों के भारी दबाव के बीच पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं रहने पर अस्पताल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. राजीव रंजन ने सुरक्षा एजेंसी से इस कोताही पर जवाब-तलब किया है और स्पष्ट किया है कि सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति के अनुपात में एजेंसी के भुगतान में कटौती की जाएगी। 12 गार्ड संभाल रहे थे ड्यूटी अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, होली की संवेदनशील रातों (3 और 4 मार्च) को अस्पताल परिसर में कुल 38 सुरक्षा गार्डों की मुस्तैदी होनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर महज 12 गार्ड ही ड्यूटी पर पाए गए। गार्डों की इस भारी कमी के कारण न केवल अस्पताल की सुरक्षा प्रभावित हुई, बल्कि जख्मी हालत में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की अनियंत्रित भीड़ को संभालने में भी स्वास्थ्य कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। डीएस ने बताया कि एजेंसी को केवल उपस्थित गार्डों के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा और शेष राशि काट ली जाएगी। मारपीट के सर्वाधिक मामले, 243 मरीज हुए भर्ती होली के दौरान सदर अस्पताल का ईमरजेंसी वार्ड पूरी तरह व्यस्त रहा। दो दिनों के भीतर कुल 243 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें सर्वाधिक मामले आपसी मारपीट और हिंसक झड़पों से जुड़े थे। गंभीर रूप से घायल 16 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया, जबकि शेष का अस्पताल में ही सफल उपचार किया गया। भीड़भाड़ और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दीं। इन योद्धाओं ने संभाली कमान सुरक्षा व्यवस्था की खामियों के बीच अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों ने रात-भर जागकर घायलों की सेवा की। डॉ. राज शेखर, डॉ. विश्वजीत, डॉ. प्रशांत, डॉ. रचिता शांति, डॉ. अन्नु कुमारी, डॉ. पिंटू कुमार, डॉ. अंजय और डॉ. शशिकांत वर्मा ने आपातकालीन सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल प्रबंधक इमरान खुद देर रात दो बजे तक ईमरजेंसी में डटे रहे। वहीं, जीएनएम सुलेखा कुमारी, चंद्र प्रभा, शमदर, पिंटू शर्मा, अर्चना, कल्पना और वार्ड बॉय नवीन कुमार की मुस्तैदी की भी सराहना की जा रही है।  

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