लखनऊ में एनबीएफसी कंपनी से बड़ा लोन पास कराने का झांसा देकर जालसाजों ने दो युवकों से किस्तों में कुल 83 लाख रुपये ठग लिए। जब पीड़ितों ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने न सिर्फ फोन उठाना बंद कर दिया, बल्कि जान से मारने की धमकियां भी देने लगे। शिकायत के बाद डीसीपी दक्षिणी के आदेश पर पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेनानी विहार कॉलोनी, तेलीबाग निवासी ध्रुव सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी और उनके मित्र देवाशीष शाहू की मुलाकात विपेंद्र यादव से हुई थी। विपेंद्र ने खुद को एक एनबीएफसी कंपनी से जुड़ा अधिकारी बताते हुए आसानी से बड़ा लोन पास कराने का भरोसा दिलाया। राजनीतिक पहुंच का दावा कर बढ़ाया भरोसा विपेंद्र ने दोनों की मुलाकात इमरान अली से कराई, जिसने खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए सपा सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री होने और अपनी मजबूत राजनीतिक पहुंच का दावा किया। पीड़ितों के मुताबिक, इस पूरे खेल में सुरेश थोरट, अभिनंदन कुमार पांडे और दीपक भी शामिल थे। प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ऐंठे पैसे आरोपियों ने लोन प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, गारंटी और अन्य खर्चों का हवाला देकर अलग-अलग समय पर दबाव बनाना शुरू किया। लोन जल्द मिलने की उम्मीद में ध्रुव सिंह और देवाशीष शाहू ने आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में किस्तों में कुल 83 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। लोन नहीं मिला, तो हुआ ठगी का अहसास काफी समय बीतने के बावजूद जब लोन पास नहीं हुआ तो पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने जब रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और धमकियां देने लगे। शाहजहांपुर स्थित विपेंद्र यादव के घर जाकर शिकायत करने पर भी पीड़ितों को वहां से भगा दिया गया। दस्तावेज निकले फर्जी बाद में जांच में आरोपियों द्वारा दिए गए आधार कार्ड, कंपनी से जुड़े दस्तावेज और अन्य कागजात पूरी तरह फर्जी पाए गए। पीड़ित ने 15 नवंबर 2025 को डीसीपी दक्षिणी से शिकायत की थी, जिसके बाद अब मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।


