किशनगंज में विद्या की देवी मां सरस्वती के पावन पर्व बसंत पंचमी की तैयारियां जोरों पर हैं। यह पर्व इस बार 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न मोहल्लों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक समितियों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। स्थानीय मूर्तिकार और पश्चिम बंगाल से आए कुशल कलाकार मिट्टी, रंग और सजावट का उपयोग कर आकर्षक प्रतिमाएं बना रहे हैं। किशनगंज के लोकप्रिय पूजा स्थलों पर कलाकारों ने अपनी अस्थायी कार्यशालाएं स्थापित की हैं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियों पर दिया जा रहा ध्यान इस वर्ष मां सरस्वती की प्रतिमाएं 5 से 12 फीट तक की ऊंचाई वाली बनाई जा रही हैं। कई स्थानों पर पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) मूर्तियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें प्राकृतिक रंगों और घुलनशील सामग्री का प्रयोग हो रहा है। एक स्थानीय कलाकार अनुराग कुमार ने बताया, “हर साल की तरह इस बार भी हमने मां के चेहरे पर जीवंत भाव लाने का प्रयास किया है। आंखों में बुद्धि की चमक, हाथों में वीणा और किताबें, सफेद वस्त्र और पीले फूलों की सजावट भक्तों को आकर्षित करेगी।” कलाकारों के अनुसार, मूर्ति निर्माण केवल एक कार्य नहीं, बल्कि भक्ति और कला का संगम है। वे दिन-रात बिना थके उत्साह और श्रद्धा के साथ काम कर रहे हैं। छात्र-छात्राएं पूजा को लेकर उत्साहित किशनगंज के लोगों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह है। छात्र-छात्राएं विशेष रूप से उत्साहित हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन किताबों की पूजा करने और विद्या की प्रार्थना करने से सफलता मिलती है। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का ही नहीं, बल्कि नई शुरुआत, ज्ञान प्राप्ति और सृजनात्मकता का भी प्रतीक है। किशनगंज में विद्या की देवी मां सरस्वती के पावन पर्व बसंत पंचमी की तैयारियां जोरों पर हैं। यह पर्व इस बार 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न मोहल्लों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक समितियों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। स्थानीय मूर्तिकार और पश्चिम बंगाल से आए कुशल कलाकार मिट्टी, रंग और सजावट का उपयोग कर आकर्षक प्रतिमाएं बना रहे हैं। किशनगंज के लोकप्रिय पूजा स्थलों पर कलाकारों ने अपनी अस्थायी कार्यशालाएं स्थापित की हैं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियों पर दिया जा रहा ध्यान इस वर्ष मां सरस्वती की प्रतिमाएं 5 से 12 फीट तक की ऊंचाई वाली बनाई जा रही हैं। कई स्थानों पर पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) मूर्तियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें प्राकृतिक रंगों और घुलनशील सामग्री का प्रयोग हो रहा है। एक स्थानीय कलाकार अनुराग कुमार ने बताया, “हर साल की तरह इस बार भी हमने मां के चेहरे पर जीवंत भाव लाने का प्रयास किया है। आंखों में बुद्धि की चमक, हाथों में वीणा और किताबें, सफेद वस्त्र और पीले फूलों की सजावट भक्तों को आकर्षित करेगी।” कलाकारों के अनुसार, मूर्ति निर्माण केवल एक कार्य नहीं, बल्कि भक्ति और कला का संगम है। वे दिन-रात बिना थके उत्साह और श्रद्धा के साथ काम कर रहे हैं। छात्र-छात्राएं पूजा को लेकर उत्साहित किशनगंज के लोगों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह है। छात्र-छात्राएं विशेष रूप से उत्साहित हैं, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन किताबों की पूजा करने और विद्या की प्रार्थना करने से सफलता मिलती है। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का ही नहीं, बल्कि नई शुरुआत, ज्ञान प्राप्ति और सृजनात्मकता का भी प्रतीक है।


