किशनगंज में नदी की जगह खेत में बना पुल:लाखों खर्च, ग्रामीणों में आक्रोश; डीएम ने दिए जांच के आदेश

किशनगंज में नदी की जगह खेत में बना पुल:लाखों खर्च, ग्रामीणों में आक्रोश; डीएम ने दिए जांच के आदेश

किशनगंज में प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां इंजीनियरों ने नदी पर पुल बनाने के बजाय खेत के बीचों-बीच पुल का निर्माण कर दिया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और सरकारी धन की बर्बादी के आरोप लग रहे हैं। पांच साल पहले पुल निर्माण को धन की हुई थी स्वीकृति यह मामला किशनगंज सदर प्रखंड की टेउसा पंचायत के पीपला गांव अंतर्गत धूमबस्ती और ढेकसरा गांव के बीच का है, जहां रमजान नदी बहती है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब पांच वर्ष पहले इस नदी पर पुल निर्माण के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जो पुल बनकर तैयार हुआ, वह नदी के ऊपर नहीं बल्कि खेत के बीच खड़ा है। पुल के नीचे न तो कोई नदी बहती है और न ही नाला, बल्कि वहां किसान खेती करते हैं। हैरानी की बात यह है कि पुल के दोनों सिरों पर सड़क भी नहीं जुड़ी है, जिससे यह पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहा है। डीपीआर में गलत लोकेशन दिखाई गई,सरकारी धन का दुरुपयोग ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के लिए तैयार की गई डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में गलत लोकेशन दिखाई गई। जहां पुल बनाया गया है, वहां कभी कोई नदी या बड़ा नाला था ही नहीं। वास्तविक नदी पुल से कुछ दूरी पर बहती है, लेकिन पुल वहां तक पहुंच ही नहीं पाया। स्थानीय लोग इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बता रहे हैं। किसान सोमदेव कुमार सिंह ने बताया, “हमारे खेत के बीच पुल खड़ा कर दिया गया है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। नदी कहीं और है, फिर यहां पुल क्यों बनाया गया? यह खुलेआम पैसों की बर्बादी है।” जिलाधिकारी ने कहा,अनियमितता पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई मामले की जानकारी मिलते ही किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा कि पूरे मामले की स्थल जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितता पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह बिहार में अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष अररिया जिले में भी खेत के बीच एक पुल का निर्माण किया गया था, जिस पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन वह आज तक उपयोग में नहीं आ सका। गलत लोकेशन, घटिया गुणवत्ता के चलते सामने आ रही अनियमितताएं बिहार में ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत पुल-पुलिया निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गलत लोकेशन, घटिया गुणवत्ता और ठेकेदार-इंजीनियरों की मिलीभगत के कारण बार-बार ऐसी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। हाल के वर्षों में कई पुलों के धंसने और गिरने की घटनाएं भी निर्माण कार्यों में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं। किशनगंज में प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां इंजीनियरों ने नदी पर पुल बनाने के बजाय खेत के बीचों-बीच पुल का निर्माण कर दिया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और सरकारी धन की बर्बादी के आरोप लग रहे हैं। पांच साल पहले पुल निर्माण को धन की हुई थी स्वीकृति यह मामला किशनगंज सदर प्रखंड की टेउसा पंचायत के पीपला गांव अंतर्गत धूमबस्ती और ढेकसरा गांव के बीच का है, जहां रमजान नदी बहती है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब पांच वर्ष पहले इस नदी पर पुल निर्माण के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जो पुल बनकर तैयार हुआ, वह नदी के ऊपर नहीं बल्कि खेत के बीच खड़ा है। पुल के नीचे न तो कोई नदी बहती है और न ही नाला, बल्कि वहां किसान खेती करते हैं। हैरानी की बात यह है कि पुल के दोनों सिरों पर सड़क भी नहीं जुड़ी है, जिससे यह पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहा है। डीपीआर में गलत लोकेशन दिखाई गई,सरकारी धन का दुरुपयोग ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण के लिए तैयार की गई डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में गलत लोकेशन दिखाई गई। जहां पुल बनाया गया है, वहां कभी कोई नदी या बड़ा नाला था ही नहीं। वास्तविक नदी पुल से कुछ दूरी पर बहती है, लेकिन पुल वहां तक पहुंच ही नहीं पाया। स्थानीय लोग इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बता रहे हैं। किसान सोमदेव कुमार सिंह ने बताया, “हमारे खेत के बीच पुल खड़ा कर दिया गया है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। नदी कहीं और है, फिर यहां पुल क्यों बनाया गया? यह खुलेआम पैसों की बर्बादी है।” जिलाधिकारी ने कहा,अनियमितता पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई मामले की जानकारी मिलते ही किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा कि पूरे मामले की स्थल जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितता पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह बिहार में अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष अररिया जिले में भी खेत के बीच एक पुल का निर्माण किया गया था, जिस पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन वह आज तक उपयोग में नहीं आ सका। गलत लोकेशन, घटिया गुणवत्ता के चलते सामने आ रही अनियमितताएं बिहार में ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत पुल-पुलिया निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गलत लोकेशन, घटिया गुणवत्ता और ठेकेदार-इंजीनियरों की मिलीभगत के कारण बार-बार ऐसी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। हाल के वर्षों में कई पुलों के धंसने और गिरने की घटनाएं भी निर्माण कार्यों में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं।  

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