करनाल के गांव काछवा के सरपंच के नाम से फर्जी तरीके से अदालत में पेश होकर एक एनडीपीएस आरोपी की जमानत लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने सरपंच के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 50 हजार रुपए की जमानत भरवाई, जिसकी एंट्री राजस्व रिकॉर्ड में भी कर दी गई। जब असली सरपंच को इसका पता चला तो उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर अब सिविल लाइंस थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सरपंच को पटवारी से मिली जानकारी
गांव काछवा निवासी अजय ने अदालत में दायर आवेदन में बताया कि वह गांव का सरपंच है और उसके नाम पर जमाबंदी वर्ष 2016-17 के अनुसार कृषि भूमि का एक तिहाई हिस्सा दर्ज है। 26 नवंबर 2019 को गांव के हल्का पटवारी ने उसे बताया कि उसने एनडीपीएस एक्ट के केस में आरोपी ब्रह्मदेव यादव की जमानत ली है। यह एंट्री अदालत के आदेश पर राजस्व रिकॉर्ड में की जा रही है। यह सुनकर अजय हैरान रह गया, क्योंकि वह कभी अदालत में पेश ही नहीं हुआ था और न ही किसी आरोपी के लिए जमानतदार बना था। क्या था मूल एनडीपीएस मामला
एफआईआर के मुताबिक 1 अक्तूबर 2019 को थाना सेक्टर-32/33 करनाल में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस टीम ने करनाल के करण विहार इलाके से एक व्यक्ति को पकड़ा। पूछताछ में उसने अपना नाम ब्रह्मदेव यादव बताया, जो बिहार के गांव जुमेरिया का रहने वाला है और उस समय करण विहार में किराये पर रह रहा था। तलाशी के दौरान उसके पास से 1 किलो 155 ग्राम गांजा पत्ती बरामद हुई थी। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। फर्जी व्यक्ति बनकर अदालत में पेश हुआ
अजय ने अपने आवेदन में बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी ब्रह्मदेव पुत्र अनूप यादव, निवासी मकान नंबर 101, गली नंबर 3, करण विहार करनाल ने एक व्यक्ति मेजर सिंह को अजय बनाकर अदालत में पेश किया। इस व्यक्ति ने अजय के नाम का आधार कार्ड और जमाबंदी की कॉपी लगाई और 50 हजार रुपए का जमानत बांड भर दिया। अजय ने स्पष्ट कहा कि उसने कभी किसी अदालत में पेश होकर जमानत बांड नहीं भरा और न ही ब्रह्मदेव या किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में जमानत दी। अदालत ने मानी फर्जीवाड़े की आशंका
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम करनाल जसबीर सिंह कुंडू की अदालत में हुई। रिकॉर्ड देखने पर पाया गया कि 05 नवंबर 2019 को पारित आदेश के अनुसार 06 नवंबर 2019 को 50 हजार रुपए की जमानत और जमानतदार बांड जमा हुआ था। अदालत ने माना कि अजय के नाम से कोई काल्पनिक या फर्जी व्यक्ति अदालत में पेश हुआ और जमानत दी।
17 सितंबर 2025 को अदालत ने आदेश दिया कि पूरे मामले की गहन जांच की जाए। आवेदन की कॉपी थाना सिविल लाइंस के एसएचओ को भेजी जाए और इसे शिकायत मानकर कार्रवाई की जाए। अदालत के आपराधिक अहलमद को निर्देश दिए गए कि जमानत बांड, शपथ पत्र और आधार कार्ड की कॉपियां भी पुलिस को भेजी जाएं। पुलिस ने दर्ज किया केस
कोर्ट के आदेश के बाद थाना सिविल लाइंस करनाल में 28 फरवरी को केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, अज्ञात व्यक्ति ने अजय के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर 06 नवंबर 2019 को ब्रह्मदेव यादव की जमानत ली। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, झूठा सबूत देने और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच एसआई राजेश कुमार को सौंपी गई है। सरपंच की जमीन पर पड़ी एंट्री
अजय ने अदालत से यह भी मांग की कि उसकी जमीन को आगे के लेन-देन के लिए मुक्त किया जाए, क्योंकि जमानत की एंट्री के कारण उसकी संपत्ति प्रभावित हो रही है। अब पुलिस यह पता लगाएगी कि अजय के दस्तावेज किसने हासिल किए, आधार कार्ड और जमाबंदी की कॉपी कैसे इस्तेमाल हुई और इस साजिश में कौन-कौन शामिल है। इस मामले ने न्यायिक प्रक्रिया में फर्जी पहचान के जरिए जमानत लेने की गंभीर खामी को उजागर किया है। पुलिस की जांच के बाद ही साफ होगा कि इस जालसाजी के पीछे कौन लोग हैं और कैसे यह पूरी साजिश रची गई।


