करनाल में ऑस्ट्रेलिया वीजा दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी, पैसे मांगने पर युवक के साथ मारपीट और बाद में पीड़ित पक्ष पर ही झूठा मुकदमा दर्ज कराने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कुछ पुलिस अधिकारियों की भी भूमिका रही, जिन्होंने आरोपियों को बचाने के लिए जानबूझकर गलत कार्रवाई की। कोर्ट के आदेश पर अब इस मामले में थाना शहर करनाल में केस दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। वीजा दिलाने का झांसा देकर लिए गए लाखों रुपये
शिकायत के अनुसार पुलिस लाइन करनाल निवासी पूर्ण मल ने अदालत को बताया कि इमीग्रेशन एजेंट के तौर पर काम करने वाले आरोपी अंकित ने ऑस्ट्रेलिया का वीजा लगवाने के नाम पर उसके परिचित विकास से 21 लाख 55 हजार रुपये लिए। इसके अलावा शिकायतकर्ता के बेटे विनय से भी ऑस्ट्रेलिया वीजा के लिए 6 लाख रुपये लिए गए। दोनों मामलों में 12 सितंबर 2023 को लिखित एग्रीमेंट किया गया था। एग्रीमेंट में शर्त थी कि आठ दिन के भीतर वीजा नहीं लगा तो पूरी राशि अन्य खर्चों सहित वापस की जाएगी, लेकिन तय समय में न तो वीजा लगा और न ही पैसे लौटाए गए। पैसे मांगने पर युवक से की गई मारपीट
शिकायत में बताया गया कि 8 नवंबर 2023 को आरोपी अंकित और आशीष ने शिकायतकर्ता के बेटे विनय को न्यू बहादुर चंद कॉलोनी करनाल बुलाया। वहां पहले से 10 से 15 युवक मौजूद थे। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर विनय के साथ मारपीट की, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और खून बहने लगा। घटना की सूचना मिलने पर शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचा और डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया। अस्पताल में भर्ती, सिर में आए 9 टांके
मारपीट में घायल विनय को सिविल अस्पताल करनाल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसके सिर में 9 टांके लगाए और हालत को देखते हुए अस्पताल में भर्ती रखा। सिविल अस्पताल की ओर से पुलिस को भी सूचना दी गई थी। बाद में पुलिस चौकी सदर बाजार से एक पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचा, लेकिन उस समय घायल की हालत बयान देने लायक नहीं थी। इसके बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा पीड़ित पक्ष पर दर्ज हुआ केस
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी अंकित ने पुलिस चौकी सदर बाजार में झूठी और मनगढ़ंत शिकायत दी, जिसके आधार पर 9 नवंबर 2023 को थाना शहर करनाल में शिकायतकर्ता और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जबकि उसी दिन शिकायतकर्ता ने भी आरोपियों के खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। पुलिस अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी अंकित और आशीष कुछ पुलिस अधिकारियों के रिश्तेदार हैं। इसी रिश्तेदारी और प्रभाव के चलते पुलिस चौकी सदर बाजार में तैनात उप निरीक्षक राजा राम, थाना शहर करनाल में तैनात उप निरीक्षक बलवान और तत्कालीन एसएचओ उप निरीक्षक सुल्तान ने आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची। आरोप है कि जानबूझकर गलत तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता के खिलाफ केस दर्ज किया गया, ताकि असली आरोपियों को बचाया जा सके। एसपी और डीएसपी तक दी गई शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक करनाल को भी दी थी, जिसे आगे डीएसपी असंध को भेजा गया। इसके बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि हर स्तर पर उसे न्याय के लिए भटकना पड़ा। कोर्ट में भी उठाया गया मामला
शिकायतकर्ता ने बताया कि जमानत की सुनवाई के दौरान उसने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भी शिकायत दी, लेकिन वहां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया कि थाना शहर के तत्कालीन एसएचओ के प्रभाव के चलते मामले को दबाने की कोशिश की गई। अदालत ने माना मामला गंभीर
इन सभी तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता ने माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी करनाल की अदालत में परिवाद दायर किया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए आदेश दिए कि थाना शहर करनाल में एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने झूठे दस्तावेज तैयार किए, गलत जानकारी दी और साक्ष्य छुपाने का प्रयास किया। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
अदालत के आदेश के बाद थाना शहर करनाल में 8 फरवरी की देर रात को मामला दर्ज किया गया। केस में मारपीट, साजिश और सरकारी कर्मचारी द्वारा गलत कार्रवाई से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और किन-किन लोगों पर कार्रवाई होती है।


