कामधेनु विश्वविद्यालय में 1536 विद्यार्थियों को मिली उपाधि:53 मेधावियों को स्वर्ण पदक; राज्यपाल ने कहा- यह नई यात्रा की शुरुआत

कामधेनु विश्वविद्यालय में 1536 विद्यार्थियों को मिली उपाधि:53 मेधावियों को स्वर्ण पदक; राज्यपाल ने कहा- यह नई यात्रा की शुरुआत

दुर्ग स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह गुरुवार को संपन्न हुआ। इसमें पशुचिकित्सा एवं पशुपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी और मात्स्यिकी संकाय के कुल 1536 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में कुल 53 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इनमें 45 को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक और पशुचिकित्सा एवं पशुपालन संकाय के 8 स्नातक विद्यार्थियों को पंडित तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शिरकत की। उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधि पत्र और स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ललित चंद्राकर और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डोमन लाल कोर्सेवाड़ा भी समारोह में मौजूद रहे। राज्यपाल बोले- अब एक नई यात्रा की शुरुआत अपने संबोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई का अंत नहीं, बल्कि जीवन की जिम्मेदारियों से भरी एक नई यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है जो जीवन भर चलती रहती है। राज्यपाल ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र ग्रामीण परिवारों, महिलाओं और छोटे किसानों की आय का प्रमुख आधार है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन और मत्स्य पालन की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में कांकेर जिले की सफलता का विशेष उल्लेख किया और आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें : कृषि मंत्री
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत केवल डिग्री लेने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और समाज सेवा से जुड़ी नई यात्रा का आरंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए दूत और परिवर्तनकर्ता बताते हुए कहा कि राज्य सरकार पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़े स्टार्टअप, प्रशिक्षण और अनुदान के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता की ओर आगे बढ़ा रही है। कुलपति ने रखा प्रगति प्रतिवेदन
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी. शाह ने दीक्षांत उद्बोधन दिया। समारोह का संचालन कुलसचिव डॉ. बी.पी. राठिया ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षकगण, उपाधि प्राप्त विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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