कैथल में अनुशासन की एवं नियमों की अवहेलना करने के आरोप में पुलिस विभाग से बर्खास्त किए गए हेड कांस्टेबल सुनील संधू ने अब बर्खास्तगी को ही अपनी पहचान बना लिया है। अपने फेसबुक या अन्य सोशल माध्यमों पर डाली गई पोस्ट में वे अपना परिचय बर्खास्त कर्मचारी के रूप में दे रहे हैं। किसी भी पोस्ट में वे स्वयं को न तो अब कर्मचारी बता रहे हैं और न ही समाजसेवक बता रहे। बर्खास्त कर्मचारी से करते हैं शुरूआत वीडियो को शुरू करने से पहले वे अपना परिचय देते हुए कहते हैं कि साथियो नमस्कार, मैं बर्खास्त कर्मचारी सुनील संधू…. इसके बाद ही किसी वीडियो की शुरुआत करते हैं। हालांकि पहले की तरह सुनील संधू अब भी सामाजिक कार्यों में शामिल होते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन कर्मचारी की बजाय स्वयं को बर्खास्त बताते हैं। जब इस बारे में सुनील संधू से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि जब वे पुलिस विभाग में थे तो स्वयं का परिचय कर्मचारी के रूप में देते रहे। अब जब उनको बर्खास्त ही कर दिया गया तो वे स्वयं को कर्मचारी बताने से पहरेज कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अब भी किसी वीडियो में भूले बिसरे उन्होंने स्वयं को कर्मचारी बता दिया तो शायद इसी बात को लेकर उनका विरोध हो जाएगा। ऐसे में स्वयं को बर्खास्त बताना मुनासिब समझ रहे हैं। ये है मामला बता दें कि कैथल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल सुनील संधू को पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया है। SP उपासना ने बताया था कि सुनील संधू ने DSP पर धमकाने के आरोप लगाए थे, उन्हें इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों को करने के बजाए सोशल मीडिया पोस्ट की। इससे पुलिस विभाग की छवि खराब हुई। इसमें नियमों को भी अनदेखा किया गया। 9 सदस्यों को किया था लाइन हाजिर वहीं दूसरा, सुनील संधू नशा मुक्ति अभियान के दौरान नशे के साथ आरोपियों को पकड़ने के वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डालते थे, जो कि नियमों के खिलाफ है। अनुशासनहीनता को लेकर सुनील संधू पर कार्रवाई की गई। इस विवाद के बाद 2 दिन पहले ही सुनील संधू समेत नशा मुक्ति टीम के 9 सदस्यों को लाइन हाजिर किया गया था। अब सुनील को बर्खास्त किया गया है।


