होली में अभी 2 माह; रांची रूट की ट्रेनें फुल:मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु तक की ट्रेनों में 50-100 वेटिंग, स्पेशल ट्रेन की होने लगी मांग

होली में अभी 2 माह; रांची रूट की ट्रेनें फुल:मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु तक की ट्रेनों में 50-100 वेटिंग, स्पेशल ट्रेन की होने लगी मांग

होली में अभी करीब दो महीने का समय बाकी है, लेकिन महानगरों से रांची आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में अभी से भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से रांची के लिए चलने वाली अधिकांश ट्रेनों में 23 फरवरी से 1 मार्च के बीच लंबी वेटिंग दर्ज की जा रही है। लोकमान्य तिलक–रांची वीकली, एलटीटी–गया सुपरफास्ट वीकली, लोकमान्य तिलक–हटिया एक्सप्रेस, एलप्पी–धनबाद एक्सप्रेस, जम्मू-तवी–संबलपुर एक्सप्रेस, नई दिल्ली–रांची राजधानी एक्सप्रेस वीकली, झारखंड संपर्क क्रांति और बेंगलुरु–हटिया एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में होली तक 50 से 100 से अधिक की वेटिंग हो चुकी है। आम दिनों में जिन ट्रेनों में आसानी से कन्फर्म टिकट मिल जाता है, उनमें भी अब सीटें मिलना मुश्किल हो गया है। रांची वाले यात्रियों को नहीं मिल रहा विकल्प लंबी वेटिंग के कारण यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेनों की तलाश करनी पड़ रही है, लेकिन ज्यादातर रूट पर स्थिति एक जैसी है। एलटीटी–गया सुपरफास्ट वीकली में स्लीपर और थर्ड एसी में सीटें ‘रिग्रेट’ की स्थिति में पहुंच गई हैं, जबकि बेंगलुरु–हटिया एक्सप्रेस में सभी श्रेणियों में 100 से ज्यादा वेटिंग है। एलप्पी–धनबाद एक्सप्रेस में भी 50 से अधिक की वेटिंग चल रही है। झारखंड संपर्क क्रांति में कुछ ही सीटें उपलब्ध बची हैं। यात्रियों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बुकिंग और तेज होगी, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। नियमित ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने से लोग अब रेलवे द्वारा होली स्पेशल ट्रेनों की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यात्री संगठनों ने की अतिरिक्त ट्रेनों की मांग झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल मिश्रा और डीआरएम रांची से मांग की है कि होली पर्व को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनों का विशेष प्रबंध किया जाए। वहीं जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने कहा कि रांची से दक्षिण भारत, पुणे, गुजरात, राजस्थान सहित अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि काम-काज और पढ़ाई के सिलसिले में इन क्षेत्रों में गए लोग पर्व के समय बड़ी संख्या में झारखंड और बिहार लौटते हैं, लेकिन रेलवे का फोकस अब भी सीमित रूट तक ही है। यदि समय रहते अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा नहीं की गई, तो यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है। होली में अभी करीब दो महीने का समय बाकी है, लेकिन महानगरों से रांची आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में अभी से भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से रांची के लिए चलने वाली अधिकांश ट्रेनों में 23 फरवरी से 1 मार्च के बीच लंबी वेटिंग दर्ज की जा रही है। लोकमान्य तिलक–रांची वीकली, एलटीटी–गया सुपरफास्ट वीकली, लोकमान्य तिलक–हटिया एक्सप्रेस, एलप्पी–धनबाद एक्सप्रेस, जम्मू-तवी–संबलपुर एक्सप्रेस, नई दिल्ली–रांची राजधानी एक्सप्रेस वीकली, झारखंड संपर्क क्रांति और बेंगलुरु–हटिया एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में होली तक 50 से 100 से अधिक की वेटिंग हो चुकी है। आम दिनों में जिन ट्रेनों में आसानी से कन्फर्म टिकट मिल जाता है, उनमें भी अब सीटें मिलना मुश्किल हो गया है। रांची वाले यात्रियों को नहीं मिल रहा विकल्प लंबी वेटिंग के कारण यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेनों की तलाश करनी पड़ रही है, लेकिन ज्यादातर रूट पर स्थिति एक जैसी है। एलटीटी–गया सुपरफास्ट वीकली में स्लीपर और थर्ड एसी में सीटें ‘रिग्रेट’ की स्थिति में पहुंच गई हैं, जबकि बेंगलुरु–हटिया एक्सप्रेस में सभी श्रेणियों में 100 से ज्यादा वेटिंग है। एलप्पी–धनबाद एक्सप्रेस में भी 50 से अधिक की वेटिंग चल रही है। झारखंड संपर्क क्रांति में कुछ ही सीटें उपलब्ध बची हैं। यात्रियों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बुकिंग और तेज होगी, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। नियमित ट्रेनों में टिकट नहीं मिलने से लोग अब रेलवे द्वारा होली स्पेशल ट्रेनों की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यात्री संगठनों ने की अतिरिक्त ट्रेनों की मांग झारखंड पैसेंजर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल मिश्रा और डीआरएम रांची से मांग की है कि होली पर्व को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेनों का विशेष प्रबंध किया जाए। वहीं जेडआरयूसीसी सदस्य अरुण जोशी ने कहा कि रांची से दक्षिण भारत, पुणे, गुजरात, राजस्थान सहित अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी होली स्पेशल ट्रेनें चलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि काम-काज और पढ़ाई के सिलसिले में इन क्षेत्रों में गए लोग पर्व के समय बड़ी संख्या में झारखंड और बिहार लौटते हैं, लेकिन रेलवे का फोकस अब भी सीमित रूट तक ही है। यदि समय रहते अतिरिक्त ट्रेनों की घोषणा नहीं की गई, तो यात्रियों की परेशानी और बढ़ सकती है।  

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