विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में खलबली मचा दी है। नकवी ने कहा कि आज जो कुछ दारुल उलूम देवबंद में हो रहा है, वह बेहद अफसोसजनक है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दहशतगर्दी की शिक्षा नहीं, बल्कि देशभक्ति और इंसानियत की शिक्षा दी जानी चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मदनी ने कहा था कि जो लोग हिंदू राष्ट्र का सपना देख रहे हैं, वे भारत का भला नहीं चाहते। नकवी ने कहा कि आज भारत को ‘जमाते इस्लामी नहीं, बल्कि जमाते इंसानियत की जरूरत है। उन्होंने दारुल उलूम सहित सभी धार्मिक संस्थानों से अपील की कि वे मजहबी राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण, विकास और सामाजिक समरसता की दिशा में काम करें। नकवी का कहना था कि कोई भी संस्थान अगर देशभक्ति की बजाय कट्टरता और नफरत की शिक्षा देगा, तो वह न देश के हित में होगा और न ही समाज के। उनके मुताबिक, धार्मिक पहचान के नाम पर समाज को बांटना सबसे खतरनाक प्रवृत्ति है, जिसे किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। नकवी ने पश्चिम बंगाल को लेकर मौलाना अजीज अंसारी के बयान पर भी तीखा हमला बोला। अंसारी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान असुरक्षित हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल शिफ्ट हो जाना चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए नकवी ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल कोई पाकिस्तान में है क्या? या बांग्लादेश में है क्या? वह भी भारत का ही हिस्सा है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान देकर कुछ लोग देश में सांप्रदायिक संक्रमण फैलाना चाहते हैं और जानबूझकर डर और भ्रम का माहौल बना रहे हैं। नकवी ने इसे एक ‘सांप्रदायिक सिंडिकेट’ की साजिश करार दिया, जो समाज को बांटने के एजेंडे पर काम कर रहा है। भाजपा नेता ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों पर भी तीखा प्रहार किया। नकवी ने कहा कि दशकों तक मुसलमानों को डराकर, भड़काकर और भ्रम में रखकर उनका राजनीतिक शोषण किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया और उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास की कभी ईमानदार कोशिश नहीं की गई। नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टियां कभी खुद को राष्ट्रीय पार्टी कहा करती थीं, आज वे मोहल्ले की राजनीति तक सिमट कर रह गई हैं। बीजेपी पर मुसलमानों के खिलाफ होने के आरोपों को खारिज करते हुए नकवी ने कहा कि भारत में न कोई ‘मियां खतरे में है’ और न ही कोई ‘बीबी’। उनके मुताबिक भारत का हर नागरिक 100 फीसदी सुरक्षित है और कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कभी भी विकास के मामले में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया, भले ही उसे मुस्लिम वोट कम मिले हों। नकवी का दावा था कि सरकार की योजनाएं बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी को लेकर भी नकवी ने विपक्ष पर जानबूझकर डर फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूसीसी से किसी भी समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक या संवैधानिक अधिकारों को कोई नुकसान नहीं होगा। बल्कि इससे सभी नागरिकों के अधिकारों की 100 फीसदी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। नकवी ने कहा कि वर्षों से भय और भ्रम का जो ‘गटर’ बनाया गया था, उस पर अब भरोसे और विश्वास की परत डाली जा रही है। मौलाना अरशद मदनी ने हाल ही में कहा था कि हिंदू राष्ट्र की बात करने वाले लोग देश को नेपाल जैसा बनाना चाहते हैं। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नकवी ने कहा कि इस तरह की भाषा देश को जोड़ने की बजाय तोड़ने का काम करती है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि दारुल उलूम जैसे संस्थानों में जो गतिविधियां हो रही हैं, वे चिंता पैदा करती हैं। ऐसे संस्थानों से आतंक और नफरत नहीं, बल्कि देशभक्ति, मानवता और संविधान के प्रति सम्मान का संदेश जाना चाहिए। नकवी के इस आक्रामक बयान के बाद सियासी गलियारों में बहस और तेज हो गई है और देवबंद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ खड़ा हुआ है।


