चित्तौड़गढ़ में होलिका दहन का पर्व मनाया जा रहा है। शाम 6:30 बजे से रात 9:00 बजे तक होलिका जलाने का शुभ मुहूर्त तय किया गया था। कुछ जगहों पर 7 बजे होलिका जलाई गई तो कुछ जगहों पर 8 बजे होलिका जलाई गई। जैसे ही शुभ समय शुरू हुआ, शहर के अलग-अलग मोहल्लों और गलियों में लोगों ने पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से होलिका दहन किया। महिलाओं ने पूजा की थाली सजाई, बच्चों ने रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर त्योहार की खुशियां मनाईं और बुजुर्गों ने परंपरा के अनुसार अग्नि की परिक्रमा की। हर गली और चौराहे पर लकड़ियों और उपलों से सजी होलिका को सजाया गया था। लोग परिवार के साथ पहुंचे और सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और ढोल की धुन पर लोग झूमते नजर आए। शहर का माहौल पूरी तरह होली के रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया। हाथी कुंड मंदिर के बाहर विशेष आयोजन, एक महीने पहले रोपी गई थी होलिका शहर के मधुबन क्षेत्र स्थित हाथी कुंड मंदिर के बाहर भी होलिका दहन का विशेष आयोजन किया गया। यहां होलिका एक महीने पहले पूर्णिमा के दिन रोपी गई थी। शुभ मुहूर्त में बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां एकत्र हुए और पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद शाम 7:21 बजे होलिका जलाई गई। आयोजन को लेकर लोगों में खास उत्साह देखा गया। बच्चों और युवाओं में तो खास खुशी नजर आई, क्योंकि होली उनके लिए सबसे पसंदीदा त्योहारों में से एक है। चंद्र ग्रहण के कारण धुलंडी 4 मार्च को, 3 मार्च को रहेगा सूतक इस बार होली के अगले दिन यानी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल का प्रभाव रहेगा। इसी कारण रंगों का त्योहार धुलंडी 3 मार्च को नहीं मनाया जाएगा। धुलंडी अब 4 मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान शुभ काम नहीं किए जाते, इसलिए प्रशासन और धर्माचार्यों ने भी लोगों से तय तिथि पर ही रंग खेलने की अपील की है।


