चित्रकूट में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज की रामकथा रविवार को छठे दिन भी जारी रही। भाई मफतलाल खेल मैदान स्थित पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा 19 मार्च से चल रही है और हर दिन लोगों की उपस्थिति बढ़ रही है। महाराज राजेंद्र दास ने कहा कि चित्रकूट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि ऋषियों-मुनियों की तपोभूमि और मोक्ष प्रदान करने वाली धरा है। उन्होंने मंदाकिनी नदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शास्त्रों में इसके विशेष उल्लेख का जिक्र किया। नारद जी का प्रसंग, पापों से मुक्ति का संदेश कथा में महाराज ने नारद जी के प्रसंग का वर्णन किया। राजा दक्ष प्रजापति द्वारा नारद जी को दिया गया श्राप केवल चित्रकूट आकर मंदाकिनी में स्नान करने से ही समाप्त हुआ। महाराज ने जोर देकर कहा कि मनुष्य के पाप कितने भी बड़े क्यों न हों, यदि वह सच्चे मन से चित्रकूट पहुंचकर मंदाकिनी में स्नान करता है, तो उसके पाप नष्ट हो जाते हैं। उनके इस कथन पर श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से आस्था व्यक्त की। मंदाकिनी नदी की दिव्य उत्पत्ति राजेंद्र दास महाराज ने मंदाकिनी नदी की उत्पत्ति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माता सती अनुसूया ने अपने तपोबल से इस नदी का उद्गम किया था। इसलिए इसका जल केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि तप, त्याग और साधना की दिव्य शक्ति से परिपूर्ण है। भक्तिमय माहौल और श्रद्धालुओं की सहभागिता रामकथा के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी श्रद्धा देखी गई। आयोजकों ने बताया कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। चित्रकूट की आध्यात्मिक महिमा और मंदाकिनी की पवित्रता पर दिया गया यह संदेश लोगों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ रहा है।


