बिहार में जिंदा दरोगा का वकील ने किया पिंडदान:साजिश करने वाले SI की पत्नी ने दिया था डेथ सर्टिफिकेट, भास्कर ने जिंदा ढूंढ निकाला था

बिहार में जिंदा दरोगा का वकील ने किया पिंडदान:साजिश करने वाले SI की पत्नी ने दिया था डेथ सर्टिफिकेट, भास्कर ने जिंदा ढूंढ निकाला था

भास्कर ने बिहार पुलिस के रिकॉर्ड में 2009 में मर चुके जिस दरोगा को जिंदा ढूंढ निकाला था, 2 साल बाद उसका जीते जी एक वकील मे पिंडदान किया है। एडवोकेट सुबोध कुमार झा की कोशिश के बाद भी दारोगा ने कोर्ट और पुलिस को अपने जिंदा होने का सबूत नहीं दिया। इसके बाद वकील ने गयाजी के प्रेतशिला पर्वत पर दरोगा रामचंद्र सिंह का पिंडदान कर दिया। दरोगा की पत्नी ने कोर्ट को पति की मौत का झूठा डेथ सर्टिफिकेट दिया था। बिहार पुलिस ने भी दरोगा की मौत की पुष्टि कर दी थी। इसके बाद वकील ने प्रण लिया था कि जब तक वह दरोगा को जिंदा नहीं ढूंढ लेंगे, वह जनेउ नहीं पहनेंगे। एडवोकेट ने साल 2024 में दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इस केस की पूरी जानकारी दी थी। इसके बाद हमारी टीम ने वकील के साथ मिलकर दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला था। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए जिस दरोगा की पत्नी ने कोर्ट को दिया था पति की मौत का डेथ सर्टिफिकेट उसकाे भास्कर ने कैसे जिंदा ढूंढा और इससे जुड़े एडवोकेट के प्रण पूरा होने की कहानी..। पहले दरोगा की मौत झूठी कहानी 2012 में मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के नेउरी गांव के सरकारी स्कूल के टीचर अनंत राम पर रेप का आरोप लगा। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। केस की जांच दरोगा रामचंद्र सिंह को मिली। रामचंद्र सिंह ने मामले में पीड़ित पक्ष से प्रभावित होकर गलत इन्वेस्टिगेशन कर चार्जशीट लगा दी। दरोगा की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने टीचर अनंत राम का ट्रायल शुरू कर दिया। ट्रायल के दौरान ही मुकदमे की सच्चाई सामने आ गई और रामचंद्र सिंह का झूठ सामने आ गया। तब कोर्ट ने दरोगा रामचंद्र सिंह को गवाही के लिए कोर्ट में बुलाया। रामचंद्र सिंह को पता चल गया कि कोर्ट में उसकी पोल खुल जाएगी, तब दरोगा रामचंद्र सिंह ने तत्कालीन एसएसपी मुजफ्फरपुर के माध्यम से अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना डेथ सर्टिफिकेट जमा करा दिया, जिसमें रामचंद्र सिंह की मृत्यु की डेट तिथि 15 दिसंबर 2009 दर्ज था। जबकि रामचंद्र सिंह द्वारा इस कांड का अनुसन्धान 2012 में किया गया था। एडवोकेट ने पकड़ा था दरोगा की मौत का झूठ सरकारी टीचर अनंत राम का केस लड़ने वाले एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने ट्रायल के दौरान ही दरोगा राम चंद्र सिंह की मौत की झूठी कहानी पकड़ ली। उन्होंने सवाल खड़ा कर दिया। साल 2009 में मरा हुआ दरोगा 2012 में किसी घटना की इन्वेस्टिगेशन कैसे कर सकता है। इस मामले कैसे किसी को जेल भेजा जा सकता है। एडवोकेट ने जब दरोगा रामचंद्र सिंह का झूठ न्यायालय के सामने खोला तो तत्काल न्यायालय ने जांच का आदेश दिया। न्यायालय के जांच का आदेश आते ही दरोगा रामचंद्र सिंह ने अपना ट्रांसफर करा लिया और कोर्ट की नजर में ‘ट्रेसलेस’ हो गया, उसके विभाग ने भी उसकी कोई जानकारी देने में असमर्थता बता दी। मृत दरोगा की जांच रिपोर्ट पर कोर्ट ने सजा दे दी दरोगा ने पुलिस विभाग में सेटिंग कर अपनी मौत की झूठी रिपोर्ट भी न्यायालय को भिजवा दी। छानबीन चल ही रही थी इस बीच कोर्ट ने दरोगा रामचंद्र सिंह की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के आधार पर टीचर अनंत राम को 7 साल की सजा सुना दी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने अनंत राम के मामले की सुनवाई करते हुए उसे बाइज्जत रिहा कर दिया और शिक्षक अनंत राम को उसकी नौकरी भी वापस मिल गई। दरोगा की फर्जी मौत पर तोड़ दिया था जनेउ एक टीचर पर झूठा केस और फर्जी इन्वेस्टिगेशन के आधार पर सजा से परेशान होकर वकील ने प्रण लिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे मानवाधिकार अधिवक्ता सुबोध कुमार झा ने अपना जनेऊ तोड़कर यह संकल्प लिया था कि जबतक दरोगा रामचंद्र सिंह को ढूंढकर उसकी सच्चाई नहीं लाएंगे जनेऊ नहीं पहनेंगे। भास्कर ने 12 साल बाद दरोगा को जिंदा ढूढ निकाला एडवोकेट सुबोध कुमार झा लगातार 12 साल तक दरोगा को ढूंढते रहे। काफी प्रयास के बाद भी दरोगा रामचंद्र सिंह का वह कोई सुराग नहीं लगा पाए। एडवोकेट ने भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम से संपर्क किया और फिर साथ मिलकर दरोगा की जानकारी हासिल करने में जुट गए। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने दो महीने की इन्वेस्टिगेशन के बाद दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला। इन्वेस्टिगेशन टीम ने दरोगा के पैतृक घर से लेकर पटना और दिल्ली में खुफिया तौर पर रह रहे दरोगा रामचंद्र सिंह को एक्सपोज कर दिया। 12 साल बाद दरोगा रामचंद्र सिंह को भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने जिंदा ढूंढ निकाला। इसके बाद एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने रीति रिवाज से जनेऊ पहना। कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी दरोगा मुर्दा दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने प्रमाण के साथ दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला था। दरोगा तक पहुंचने में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को 2 महीने से ज्यादा समय लगा था। जिस दरोगा को बिहार पुलिस और कोर्ट मरा मान रही थी, उसे भास्कर ने खुफिया कैमरे में जिंदा कैद किया था। ऐसे हुआ दरोगा के जीवित रहते पिंडदान भास्कर के खुलासे के बाद एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने दरोगा रामचंद्र सिंह की पूरी कुंडली खंगाली। दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत मिला। उन्होंने संकल्प के 14 साल पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में श्राद्ध का फैसला लिया। काफी लिखापढ़ी के बाद सिस्म ने एडवोकेट की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया और दरोगा ने भी अपने जीवित होने और मौत का कारण नहीं बताया। इसलिए एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने गयाजी में दरोगा रामचंद्र सिंह का विधिवत श्राद्ध कर दिया। दरोगा रामचंद्र सिंह अरवल जिले के कुर्था थाने के गौहरा गांव का रहने वाला है, जो पटना में रहता है। यह खुलासा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हुआ, लेकिन पुलिस ने इस खुलासे के बाद भी तत्कालीन जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए मामले को ठंड बस्ते में डाल दिया था। एडवोकेट बोले- भास्कर नहीं होता तो जीवन भर जनेउ नहीं पहनता जीवित दारोगा का हिंदू रीति रिवाज से श्राद्ध और पिंडदान करने वाले एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने दैनिक भास्कर का आभार जताते हुए कहा, ‘अगर भास्कर ने मृत दारोगा को जिंदा नहीं ढूंढा होता तो मैं जीवनभर अपनी प्रतिज्ञा पूरी नहीं कर पाता। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में खुलासे के बाद मैं12 साल बाद जनेउ पहन पाया हूं।’ एडवोकेट को चैलेंज देकर ट्रेसलेस हुआ था दारोगा एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने बताया कि 14 साल पहले दरोगा रामचंद्र सिंह ने कोर्ट में खुद का डेथ सर्टिफिकेट लगाकर खुद को मृत साबित कर दिया था। उसने चुनौती देते हुए कहा था कि जो कर सकते हो, कर लो, लेकिन मुझे कभी जीवित साबित नहीं कर पाओगे और इसके बाद से ही वह ‘ट्रेसलेस’ हो गया। जानिए क्यों करना पड़ा जीवित दरोगा का श्राद्ध एडवोकेट सुबोध कुमार झा का कहना है कि ‘दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत है, इसलिए संकल्प के 14 साल पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में आज विधिवत श्राद्ध कर दिया। इसके पीछे उदेश्य था कि जब सिस्टम भी मान रहा है कि दरोगा मर चुका है तो श्राद्ध करना जरुरी है। श्राद्ध कर्म के लिए मैंने गया जी को चुना। जहां पर जीवित, लेकिन कोर्ट और पुलिस रिकॉर्ड में आज भी मृत दरोगा रामचंद्र सिंह की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान भी किया।’ एडवोकेट बोले- दरोगा के साथ सिस्टम का श्राद्ध एडवोकेट ने बताया कि ‘मैंने ब्राह्मणों को भोजन भी कराया। यह श्राद्ध, श्राद्ध से ज्यादा वर्तमान प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर प्रहार है, जिसमें एक निर्दोष को पुलिस पदाधिकारी की गलत इन्वेस्टिगेशन का खामियाजा सालों जेल में बिता कर चुकाना पड़ता है। भास्कर ने बिहार पुलिस के रिकॉर्ड में 2009 में मर चुके जिस दरोगा को जिंदा ढूंढ निकाला था, 2 साल बाद उसका जीते जी एक वकील मे पिंडदान किया है। एडवोकेट सुबोध कुमार झा की कोशिश के बाद भी दारोगा ने कोर्ट और पुलिस को अपने जिंदा होने का सबूत नहीं दिया। इसके बाद वकील ने गयाजी के प्रेतशिला पर्वत पर दरोगा रामचंद्र सिंह का पिंडदान कर दिया। दरोगा की पत्नी ने कोर्ट को पति की मौत का झूठा डेथ सर्टिफिकेट दिया था। बिहार पुलिस ने भी दरोगा की मौत की पुष्टि कर दी थी। इसके बाद वकील ने प्रण लिया था कि जब तक वह दरोगा को जिंदा नहीं ढूंढ लेंगे, वह जनेउ नहीं पहनेंगे। एडवोकेट ने साल 2024 में दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इस केस की पूरी जानकारी दी थी। इसके बाद हमारी टीम ने वकील के साथ मिलकर दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला था। भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए जिस दरोगा की पत्नी ने कोर्ट को दिया था पति की मौत का डेथ सर्टिफिकेट उसकाे भास्कर ने कैसे जिंदा ढूंढा और इससे जुड़े एडवोकेट के प्रण पूरा होने की कहानी..। पहले दरोगा की मौत झूठी कहानी 2012 में मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र के नेउरी गांव के सरकारी स्कूल के टीचर अनंत राम पर रेप का आरोप लगा। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। केस की जांच दरोगा रामचंद्र सिंह को मिली। रामचंद्र सिंह ने मामले में पीड़ित पक्ष से प्रभावित होकर गलत इन्वेस्टिगेशन कर चार्जशीट लगा दी। दरोगा की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने टीचर अनंत राम का ट्रायल शुरू कर दिया। ट्रायल के दौरान ही मुकदमे की सच्चाई सामने आ गई और रामचंद्र सिंह का झूठ सामने आ गया। तब कोर्ट ने दरोगा रामचंद्र सिंह को गवाही के लिए कोर्ट में बुलाया। रामचंद्र सिंह को पता चल गया कि कोर्ट में उसकी पोल खुल जाएगी, तब दरोगा रामचंद्र सिंह ने तत्कालीन एसएसपी मुजफ्फरपुर के माध्यम से अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना डेथ सर्टिफिकेट जमा करा दिया, जिसमें रामचंद्र सिंह की मृत्यु की डेट तिथि 15 दिसंबर 2009 दर्ज था। जबकि रामचंद्र सिंह द्वारा इस कांड का अनुसन्धान 2012 में किया गया था। एडवोकेट ने पकड़ा था दरोगा की मौत का झूठ सरकारी टीचर अनंत राम का केस लड़ने वाले एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने ट्रायल के दौरान ही दरोगा राम चंद्र सिंह की मौत की झूठी कहानी पकड़ ली। उन्होंने सवाल खड़ा कर दिया। साल 2009 में मरा हुआ दरोगा 2012 में किसी घटना की इन्वेस्टिगेशन कैसे कर सकता है। इस मामले कैसे किसी को जेल भेजा जा सकता है। एडवोकेट ने जब दरोगा रामचंद्र सिंह का झूठ न्यायालय के सामने खोला तो तत्काल न्यायालय ने जांच का आदेश दिया। न्यायालय के जांच का आदेश आते ही दरोगा रामचंद्र सिंह ने अपना ट्रांसफर करा लिया और कोर्ट की नजर में ‘ट्रेसलेस’ हो गया, उसके विभाग ने भी उसकी कोई जानकारी देने में असमर्थता बता दी। मृत दरोगा की जांच रिपोर्ट पर कोर्ट ने सजा दे दी दरोगा ने पुलिस विभाग में सेटिंग कर अपनी मौत की झूठी रिपोर्ट भी न्यायालय को भिजवा दी। छानबीन चल ही रही थी इस बीच कोर्ट ने दरोगा रामचंद्र सिंह की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के आधार पर टीचर अनंत राम को 7 साल की सजा सुना दी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने अनंत राम के मामले की सुनवाई करते हुए उसे बाइज्जत रिहा कर दिया और शिक्षक अनंत राम को उसकी नौकरी भी वापस मिल गई। दरोगा की फर्जी मौत पर तोड़ दिया था जनेउ एक टीचर पर झूठा केस और फर्जी इन्वेस्टिगेशन के आधार पर सजा से परेशान होकर वकील ने प्रण लिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे मानवाधिकार अधिवक्ता सुबोध कुमार झा ने अपना जनेऊ तोड़कर यह संकल्प लिया था कि जबतक दरोगा रामचंद्र सिंह को ढूंढकर उसकी सच्चाई नहीं लाएंगे जनेऊ नहीं पहनेंगे। भास्कर ने 12 साल बाद दरोगा को जिंदा ढूढ निकाला एडवोकेट सुबोध कुमार झा लगातार 12 साल तक दरोगा को ढूंढते रहे। काफी प्रयास के बाद भी दरोगा रामचंद्र सिंह का वह कोई सुराग नहीं लगा पाए। एडवोकेट ने भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम से संपर्क किया और फिर साथ मिलकर दरोगा की जानकारी हासिल करने में जुट गए। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने दो महीने की इन्वेस्टिगेशन के बाद दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला। इन्वेस्टिगेशन टीम ने दरोगा के पैतृक घर से लेकर पटना और दिल्ली में खुफिया तौर पर रह रहे दरोगा रामचंद्र सिंह को एक्सपोज कर दिया। 12 साल बाद दरोगा रामचंद्र सिंह को भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने जिंदा ढूंढ निकाला। इसके बाद एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने रीति रिवाज से जनेऊ पहना। कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी दरोगा मुर्दा दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने प्रमाण के साथ दरोगा रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ निकाला था। दरोगा तक पहुंचने में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को 2 महीने से ज्यादा समय लगा था। जिस दरोगा को बिहार पुलिस और कोर्ट मरा मान रही थी, उसे भास्कर ने खुफिया कैमरे में जिंदा कैद किया था। ऐसे हुआ दरोगा के जीवित रहते पिंडदान भास्कर के खुलासे के बाद एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने दरोगा रामचंद्र सिंह की पूरी कुंडली खंगाली। दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत मिला। उन्होंने संकल्प के 14 साल पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में श्राद्ध का फैसला लिया। काफी लिखापढ़ी के बाद सिस्म ने एडवोकेट की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया और दरोगा ने भी अपने जीवित होने और मौत का कारण नहीं बताया। इसलिए एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने गयाजी में दरोगा रामचंद्र सिंह का विधिवत श्राद्ध कर दिया। दरोगा रामचंद्र सिंह अरवल जिले के कुर्था थाने के गौहरा गांव का रहने वाला है, जो पटना में रहता है। यह खुलासा भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में हुआ, लेकिन पुलिस ने इस खुलासे के बाद भी तत्कालीन जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए मामले को ठंड बस्ते में डाल दिया था। एडवोकेट बोले- भास्कर नहीं होता तो जीवन भर जनेउ नहीं पहनता जीवित दारोगा का हिंदू रीति रिवाज से श्राद्ध और पिंडदान करने वाले एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने दैनिक भास्कर का आभार जताते हुए कहा, ‘अगर भास्कर ने मृत दारोगा को जिंदा नहीं ढूंढा होता तो मैं जीवनभर अपनी प्रतिज्ञा पूरी नहीं कर पाता। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में खुलासे के बाद मैं12 साल बाद जनेउ पहन पाया हूं।’ एडवोकेट को चैलेंज देकर ट्रेसलेस हुआ था दारोगा एडवोकेट सुबोध कुमार झा ने बताया कि 14 साल पहले दरोगा रामचंद्र सिंह ने कोर्ट में खुद का डेथ सर्टिफिकेट लगाकर खुद को मृत साबित कर दिया था। उसने चुनौती देते हुए कहा था कि जो कर सकते हो, कर लो, लेकिन मुझे कभी जीवित साबित नहीं कर पाओगे और इसके बाद से ही वह ‘ट्रेसलेस’ हो गया। जानिए क्यों करना पड़ा जीवित दरोगा का श्राद्ध एडवोकेट सुबोध कुमार झा का कहना है कि ‘दरोगा कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी मृत है, इसलिए संकल्प के 14 साल पूरे होने पर दरोगा रामचंद्र सिंह का गयाजी में आज विधिवत श्राद्ध कर दिया। इसके पीछे उदेश्य था कि जब सिस्टम भी मान रहा है कि दरोगा मर चुका है तो श्राद्ध करना जरुरी है। श्राद्ध कर्म के लिए मैंने गया जी को चुना। जहां पर जीवित, लेकिन कोर्ट और पुलिस रिकॉर्ड में आज भी मृत दरोगा रामचंद्र सिंह की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान भी किया।’ एडवोकेट बोले- दरोगा के साथ सिस्टम का श्राद्ध एडवोकेट ने बताया कि ‘मैंने ब्राह्मणों को भोजन भी कराया। यह श्राद्ध, श्राद्ध से ज्यादा वर्तमान प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर प्रहार है, जिसमें एक निर्दोष को पुलिस पदाधिकारी की गलत इन्वेस्टिगेशन का खामियाजा सालों जेल में बिता कर चुकाना पड़ता है।  

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