बेगूसराय में पुलिस सुरक्षा में बंट रहे गैस सिलेंडर:एजेंसी के बाहर सुबह 6 बजे से लंबी लाइनें; महिलाएं बोलीं- लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है

बेगूसराय में गैस सिलेंडर के लिए आम आदमी परेशान हैं। एक तरफ पेट्रोलियम कंपनियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि देश में रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले में सबसे खराब स्थिति बागबाड़ा स्थित नीलम एचपी गैस एजेंसी की है। पिछले तीन-तार दिनों से यहां सुबह 6:00 बजे से ही लोग सब काम छोड़कर लाइन में लग जा रहे हैं। सिलेंडर लेने के लिए मारामारी की स्थिति बनी हुई है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि मौके पर पुलिसबल की तैनाती की गई है। उपभोक्ताओं का साफ तौर पर आरोप है कि दो-तीन दिन से लगातार गैस के लिए आ रहे हैं। लेकिन हर दिन जब तक उनका नंबर आता है, तब तक ट्रक पर लोड सभी सिलेंडर खत्म हो जाते हैं। उन्हें खाली हाथ, निराश होकर घर लौटना पड़ता है। एजेंसी के बाहर लगी लंबी कतारों में खड़े लोगों के चेहरों पर निराशा और सिस्टम के प्रति गुस्सा साफ देखा जा सकता है।
लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना कमरुद्दीनपुर निवासी संजय रजक ने बताया कि तीन महीने पहले एचपी गैस में सिलेंडर लगाया था। डिलीवरी बॉय सिलेंडर घर नहीं पहुंचाता और एजेंसी जाने पर वहां से भी गैस नहीं दी जाती। वे रोज ऑफिस के चक्कर काटते हैं और उन्हें सिर्फ मिल जाएगा का आश्वासन मिलता है। मजबूरी में लकड़ियों पर खाना बनाया जा रहा है। लाइन में खड़े साकेत कुमार ने बताया… पहली बार इतनी लंबी लाइन देखने को मिल रही है। पिछले दो दिनों से एजेंसी पर आ रहे हैं। आज(शुक्रवार)सुबह 6 बजे से लाइन में लगे हुए हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिलेंडर नसीब नहीं हुई है। पता नहीं जब उनका नंबर आएगा तब तक ट्रक से आया सिलेंडर बचेगा या खत्म हो जाएगा। निराश होकर रोज घर लौटना पड़ रहा है महिला उपभोक्ता नीतू देवी ने बताया कि पहले कभी ऐसी नौबत नहीं आई थी। पिछले 10 दिनों से नंबर लगा रही हूं और हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर इस चिलचिलाती धूप में भूखे-प्यासे लाइन में लगने को मजबूर हूं। हालत यह है कि गैस खत्म हो जाने के कारण लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है। पता नहीं ऐसी हालत क्यों हो गई है। दावों की खुली पोल फिलहाल पूरी स्थिति पेट्रोलियम कंपनियों और वितरण सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर कंपनियों के दावों के अनुसार गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर बेगूसराय की गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की इतनी किल्लत क्यों है। उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी क्यों नहीं मिल रही है। कहा जा रहा है कि गैस एजेंसियों की कालाबाजारी और मिसमैनेजमेंट इसका मुख्य कारण है। जनता पुलिस के पहरे में गैस के एक-एक सिलेंडर के लिए जद्दोजहद कर रही है। बेगूसराय में गैस सिलेंडर के लिए आम आदमी परेशान हैं। एक तरफ पेट्रोलियम कंपनियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि देश में रसोई गैस (LPG) की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले में सबसे खराब स्थिति बागबाड़ा स्थित नीलम एचपी गैस एजेंसी की है। पिछले तीन-तार दिनों से यहां सुबह 6:00 बजे से ही लोग सब काम छोड़कर लाइन में लग जा रहे हैं। सिलेंडर लेने के लिए मारामारी की स्थिति बनी हुई है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि मौके पर पुलिसबल की तैनाती की गई है। उपभोक्ताओं का साफ तौर पर आरोप है कि दो-तीन दिन से लगातार गैस के लिए आ रहे हैं। लेकिन हर दिन जब तक उनका नंबर आता है, तब तक ट्रक पर लोड सभी सिलेंडर खत्म हो जाते हैं। उन्हें खाली हाथ, निराश होकर घर लौटना पड़ता है। एजेंसी के बाहर लगी लंबी कतारों में खड़े लोगों के चेहरों पर निराशा और सिस्टम के प्रति गुस्सा साफ देखा जा सकता है।
लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा खाना कमरुद्दीनपुर निवासी संजय रजक ने बताया कि तीन महीने पहले एचपी गैस में सिलेंडर लगाया था। डिलीवरी बॉय सिलेंडर घर नहीं पहुंचाता और एजेंसी जाने पर वहां से भी गैस नहीं दी जाती। वे रोज ऑफिस के चक्कर काटते हैं और उन्हें सिर्फ मिल जाएगा का आश्वासन मिलता है। मजबूरी में लकड़ियों पर खाना बनाया जा रहा है। लाइन में खड़े साकेत कुमार ने बताया… पहली बार इतनी लंबी लाइन देखने को मिल रही है। पिछले दो दिनों से एजेंसी पर आ रहे हैं। आज(शुक्रवार)सुबह 6 बजे से लाइन में लगे हुए हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिलेंडर नसीब नहीं हुई है। पता नहीं जब उनका नंबर आएगा तब तक ट्रक से आया सिलेंडर बचेगा या खत्म हो जाएगा। निराश होकर रोज घर लौटना पड़ रहा है महिला उपभोक्ता नीतू देवी ने बताया कि पहले कभी ऐसी नौबत नहीं आई थी। पिछले 10 दिनों से नंबर लगा रही हूं और हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर इस चिलचिलाती धूप में भूखे-प्यासे लाइन में लगने को मजबूर हूं। हालत यह है कि गैस खत्म हो जाने के कारण लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है। पता नहीं ऐसी हालत क्यों हो गई है। दावों की खुली पोल फिलहाल पूरी स्थिति पेट्रोलियम कंपनियों और वितरण सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर कंपनियों के दावों के अनुसार गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर बेगूसराय की गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की इतनी किल्लत क्यों है। उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी क्यों नहीं मिल रही है। कहा जा रहा है कि गैस एजेंसियों की कालाबाजारी और मिसमैनेजमेंट इसका मुख्य कारण है। जनता पुलिस के पहरे में गैस के एक-एक सिलेंडर के लिए जद्दोजहद कर रही है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *