अररिया में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला अररिया नगर के शिवपुरी वार्ड नंबर-9 का है, जहां रहने वाले रामविलास झा साइबर ठगों के जाल में फंसकर 1 लाख 22 हजार रुपए गंवा बैठे। ठगों ने खुद को बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर बताकर पहले विश्वास जीता और फिर उनके मोबाइल को हैक कर दो बैंक खातों से बड़ी रकम निकाल ली। पीड़ित ने मामले को लेकर अररिया साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित रामविलास झा ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर बताते हुए कहा कि उनका बिजली बिल अपडेट करना जरूरी है, अन्यथा उनका बिजली कनेक्शन प्रभावित हो सकता है। सरकारी विभाग का नाम सुनकर रामविलास झा को कोई संदेह नहीं हुआ और उन्होंने बातचीत जारी रखी। 1000 रुपए भेजने का झांसा देकर जीता भरोसा रामविलास झा के अनुसार, कुछ देर बाद ठग ने दोबारा कॉल किया और कहा कि उन्होंने उनके खाते में 1000 रुपए टेस्ट के तौर पर भेज दिए हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि खाता सही तरीके से लिंक है या नहीं। इसके बाद ठग ने उनसे वॉट्सऐप पर संपर्क करने के लिए नंबर मांगा। जैसे ही पीड़ित ने कॉल रिसीव किया, ठगों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन को हैक कर लिया। मोबाइल हैक होते ही ठगों ने उनके बैंक खातों को निशाना बनाया। ठगों ने एचडीएफसी बैंक खाते से 87,500 रुपए और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खाते से 34,500 रुपए निकाल लिए। इस तरह अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 1 लाख 22 हजार रुपए की ठगी कर ली गई। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक खाते से पूरी रकम साफ हो चुकी थी। बिजली विभाग ने बताया फर्जी कॉल घटना की जानकारी मिलते ही रामविलास झा ने तुरंत बिजली कार्यालय से संपर्क किया। वहां अधिकारियों ने साफ तौर पर बताया कि यह पूरी तरह फर्जी कॉल है और बिजली विभाग कभी भी इस तरह फोन कर उपभोक्ताओं से जानकारी नहीं मांगता। अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद पीड़ित ने 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई और अररिया साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर मामले की जांच और ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आवेदन के आधार पर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। जिले में बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के मामले यह घटना अररिया जिले में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों का एक और उदाहरण है। साइबर अपराधी अब बिजली विभाग, गैस एजेंसी, स्मार्ट मीटर, बैंक और अन्य सरकारी संस्थानों के नाम पर लोगों को ठगने का नया-नया तरीका अपना रहे हैं। ठग पहले छोटी रकम ट्रांसफर कर या किसी तकनीकी बहाने से लोगों का भरोसा जीतते हैं, फिर ओटीपी, लिंक या फर्जी ऐप के जरिए मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं। पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जल्द करें शिकायत पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। बिजली बिल अपडेट, भुगतान या किसी भी सरकारी कार्य के लिए केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का ही उपयोग करें। किसी को भी ओटीपी, लिंक या निजी बैंक जानकारी साझा न करें। संदिग्ध स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर की गई शिकायत से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर ठगों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है। अररिया में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला अररिया नगर के शिवपुरी वार्ड नंबर-9 का है, जहां रहने वाले रामविलास झा साइबर ठगों के जाल में फंसकर 1 लाख 22 हजार रुपए गंवा बैठे। ठगों ने खुद को बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर बताकर पहले विश्वास जीता और फिर उनके मोबाइल को हैक कर दो बैंक खातों से बड़ी रकम निकाल ली। पीड़ित ने मामले को लेकर अररिया साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित रामविलास झा ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर बताते हुए कहा कि उनका बिजली बिल अपडेट करना जरूरी है, अन्यथा उनका बिजली कनेक्शन प्रभावित हो सकता है। सरकारी विभाग का नाम सुनकर रामविलास झा को कोई संदेह नहीं हुआ और उन्होंने बातचीत जारी रखी। 1000 रुपए भेजने का झांसा देकर जीता भरोसा रामविलास झा के अनुसार, कुछ देर बाद ठग ने दोबारा कॉल किया और कहा कि उन्होंने उनके खाते में 1000 रुपए टेस्ट के तौर पर भेज दिए हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि खाता सही तरीके से लिंक है या नहीं। इसके बाद ठग ने उनसे वॉट्सऐप पर संपर्क करने के लिए नंबर मांगा। जैसे ही पीड़ित ने कॉल रिसीव किया, ठगों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन को हैक कर लिया। मोबाइल हैक होते ही ठगों ने उनके बैंक खातों को निशाना बनाया। ठगों ने एचडीएफसी बैंक खाते से 87,500 रुपए और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खाते से 34,500 रुपए निकाल लिए। इस तरह अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 1 लाख 22 हजार रुपए की ठगी कर ली गई। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक खाते से पूरी रकम साफ हो चुकी थी। बिजली विभाग ने बताया फर्जी कॉल घटना की जानकारी मिलते ही रामविलास झा ने तुरंत बिजली कार्यालय से संपर्क किया। वहां अधिकारियों ने साफ तौर पर बताया कि यह पूरी तरह फर्जी कॉल है और बिजली विभाग कभी भी इस तरह फोन कर उपभोक्ताओं से जानकारी नहीं मांगता। अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद पीड़ित ने 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई और अररिया साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर मामले की जांच और ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आवेदन के आधार पर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। जिले में बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के मामले यह घटना अररिया जिले में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों का एक और उदाहरण है। साइबर अपराधी अब बिजली विभाग, गैस एजेंसी, स्मार्ट मीटर, बैंक और अन्य सरकारी संस्थानों के नाम पर लोगों को ठगने का नया-नया तरीका अपना रहे हैं। ठग पहले छोटी रकम ट्रांसफर कर या किसी तकनीकी बहाने से लोगों का भरोसा जीतते हैं, फिर ओटीपी, लिंक या फर्जी ऐप के जरिए मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं। पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जल्द करें शिकायत पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। बिजली बिल अपडेट, भुगतान या किसी भी सरकारी कार्य के लिए केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का ही उपयोग करें। किसी को भी ओटीपी, लिंक या निजी बैंक जानकारी साझा न करें। संदिग्ध स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर की गई शिकायत से ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर ठगों से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।


