भोपाल में पिछले एक दशक में जिस गति से ‘कंक्रीट का जंगल’ बढ़ा है, उसी अनुपात में ‘प्राकृतिक जंगल’ सिमटा है। अयोध्या बायपास और बैरसिया का मामला पहला नहीं है। यह एक खतरनाक पैटर्न का हिस्सा है। पर्यावरण विशेषज्ञों और ग्लोबल अर्थ सोसाइटी (जीएसईईडी) की रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल जिले में 10 सालों (2014-2024) के दौरान जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं (जैसे बीआरटीएस, मेट्रो, स्मार्ट सिटी, कोलार सिक्स लेन और रेलवे प्रोजेक्ट्स) के नाम पर लगभग 5 लाख पेड़ काटे गए। एक शोध के अनुसार, भोपाल ने पिछले 10 सालों में अपनी 26% हरियाली खो दी है। 2009 में जहां हरित क्षेत्र 35% था, वह 2019 तक गिरकर महज 9% रह गया था। वहीं प्रशासन का दावा है कि काटे गए पेड़ों के बदले ‘कंपेंसेटरी अफोरेस्टेशन’ (प्रतिपूरक वनीकरण) के तहत लाखों पौधे लगाए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से 60-70% पौधे देखरेख के अभाव में मर जाते हैं। वाल्मी पहाड़ी पर शिफ्ट किए पेड़ ठूंठ बने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में पेड़ कटाई को लेकर हल्ला मचने पर साल 2017-18 में 125 पेड़ वाल्मी पहाड़ी पर शिफ्ट किए गए। कुछ ही दिनों में यह पेड़ ऐसे ठूंठ बन कर रह गए और अब सुरक्षा दीवार बना दिए जाने के कारण यहां पहुंचना असंभव हो गया है। इनमें से एक भी पेड़ जीवित नहीं बचा। एक पेड़ काटा तो बदले में 10 पेड़ लगाने का नियम
प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, एक व्यस्क पेड़ को काटने के बदले 10 पौधे लगाने का नियम है। अगर बैरसिया में 15 हजार पेड़ कटते हैं, तो प्रशासन को 1.5 लाख पौधे लगाने होंगे। अब सवाल ये है कि जब शहर के भीतर लगाए गए 20 लाख पौधों की ‘सर्वाइवल रिपोर्ट’ (जीवित रहने का आंकड़ा) प्रशासन के पास नहीं है, तो बैरसिया के वीरान इलाके में लगाए जाने वाले पौधों की गारंटी कौन लेगा? इधर, हरियाली की जीत: विरोध से रुके बड़े प्रोजेक्ट राजधानी में अभी अयोध्या बायपास 10 लेन प्रोजेक्ट में 7851 पेड़ों की कटाई का विरोध हो रहा है। एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। 25 दिसंबर से पेड़ों की कटाई रुकी है, पर दूसरे काम जारी हैं। विशेषज्ञ बिना पेड़ काटे रोड का विकल्प भी बता रहे हैं। इससे पहले कुछ प्रोजेक्ट में पेड़ कटाई के खिलाफ लोगों ने आवाज उठाई तो सरकार ने कदम पीछे खींच लिए थे। प्रोफेसर कॉलेनी रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट
प्रोफेसर कॉलेनी रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट भी विरोध के कारण रुका है। प्रोजेक्ट में 390 पेड़ काटने का प्रस्ताव था। भोपाल सिटीजंस फोरम एनजीटी पहुंचा। एनजीटी ने 100 पेड़ काटने और 90 शिफ्ट करने की शर्त पर मंजूरी दी, लेकिन लोगों के विरोध के बाद प्रोजेक्ट रोका गया। तुलसी नगर-शिवाजी नगर प्रोजेक्ट
तुलसी नगर-शिवाजी नगर की 29000 पेड़ों की हरियाली दो बार बची। 2016 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट टीटी नगर शिफ्ट हुआ। 2024 का रीडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट भी निरस्त हो गया। 2019 में विधायक विश्रामगृह प्रोजेक्ट के तहत 5600 पेड़ कटना थे, जिसमें 1000 कटे। फिर सरकार ने प्रोजेक्ट वापस लिया।


