कोली गांव में अफीम की अवैध खेती का खुलासा:8 डिसमिल जमीन पर पुलिस ने फसल नष्ट की, केस दर्ज

कोली गांव में अफीम की अवैध खेती का खुलासा:8 डिसमिल जमीन पर पुलिस ने फसल नष्ट की, केस दर्ज

लखीसराय जिले में पहली बार अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आया है। हलसी थाना क्षेत्र के कोली गांव में पुलिस ने 8 डिसमिल जमीन पर की जा रही अफीम की फसल को नष्ट कर दिया। इस संबंध में एक किसान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस को कोली गांव में अफीम जैसे पौधों की खेती की सूचना मिली थी। इसके बाद लखीसराय एसडीपीओ शिवम कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। इस टीम में हलसी के अपर थानाध्यक्ष रंजीत रंजन और रामगढ़ चौक थानाध्यक्ष भी शामिल थे। पुलिस ने ड्रोन कैमरे की मदद से इस अवैध फसल को नष्ट किया। छापेमारी के दौरान अफीम के कुछ पौधों को साक्ष्य के तौर पर हलसी थाना लाया गया। जांच में पता चला कि यह अवैध खेती मक्केश्वर महतो के पुत्र शिव शंकर महतो द्वारा गांव के बीच में लगभग 8 डिसमिल जमीन पर की जा रही थी। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि शिवशंकर महतो के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस अवैध खेती में संलिप्त अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी अनुसंधान के माध्यम से आगे की छापेमारी की जा रही है। लखीसराय जिले में पहली बार अफीम की अवैध खेती का मामला सामने आया है। हलसी थाना क्षेत्र के कोली गांव में पुलिस ने 8 डिसमिल जमीन पर की जा रही अफीम की फसल को नष्ट कर दिया। इस संबंध में एक किसान के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस को कोली गांव में अफीम जैसे पौधों की खेती की सूचना मिली थी। इसके बाद लखीसराय एसडीपीओ शिवम कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। इस टीम में हलसी के अपर थानाध्यक्ष रंजीत रंजन और रामगढ़ चौक थानाध्यक्ष भी शामिल थे। पुलिस ने ड्रोन कैमरे की मदद से इस अवैध फसल को नष्ट किया। छापेमारी के दौरान अफीम के कुछ पौधों को साक्ष्य के तौर पर हलसी थाना लाया गया। जांच में पता चला कि यह अवैध खेती मक्केश्वर महतो के पुत्र शिव शंकर महतो द्वारा गांव के बीच में लगभग 8 डिसमिल जमीन पर की जा रही थी। एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि शिवशंकर महतो के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस अवैध खेती में संलिप्त अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी अनुसंधान के माध्यम से आगे की छापेमारी की जा रही है।  

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