एमपी के इस जिले में सबसे ज्यादा सडक़ हादसे, दुर्घटनाएं रोकने के लिए आइआइटी मद्रास का बड़ा प्लान

एमपी के इस जिले में सबसे ज्यादा सडक़ हादसे, दुर्घटनाएं रोकने के लिए आइआइटी मद्रास का बड़ा प्लान

Satna- मध्यप्रदेश में सडक़ दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए डेटा आधारित डीडीएचआइ (डेटा संचालित स्थानीय हस्तक्षेप) योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देशभर के चुनिंदा जिलों के साथ प्रदेश के सतना satna जिले में भी इसे लागू किया जा रहा है जहां सर्वाधिक दुर्घटनाएं होती हैं। केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मद्रास द्वारा संचालित इस योजना के क्रियान्वयन के निर्देश जिला प्रशासन को भेजे गए हैं। साथ ही विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी उपलब्ध कराई गई है।

देशभर में रोज सैंकड़ों सड़क हादसे होते हैं। इनमें कई लोग जान गंवा देते हैं। ऐसे जानलेवा हादसों पर नियंत्रण की कवायद की जा रही है। डेटा आधारित सडक़ सुरक्षा ‘डीडीएचआइ’ लागू करने की तैयारी चल रही है। सतना में भी इसपर अमल किया जाएगा।

योजना में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आइरेड) से प्राप्त आंकड़ों का आइआइटी मद्रास द्वारा विश्लेषण किया जाएगा और इसके बाद दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए ब्लू प्रिंट बनाएगा। फिर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानि ब्लैक स्पॉट की पहचान कर यहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पूरी कवायद से हादसोें पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। वाहन दुर्घटनाओं में जान गंवानेवालों और घायलों की संख्या में खासी कमी आएगी।

देश के 17 राज्यों में योजना लागू की जा रही है। इनमें देशभर के 100 उच्च जोखिम वाले जिलों को शामिल किया गया है। इनमें प्रदेश का सतना जिला भी है जहां दुर्घटना रोकने के लिए डेटा आधारित खाका बनाने की तैयारी की जा रही है।

एसओपी के अनुसार, कलेक्टर को योजना के संचालन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों की सूची तैयार कर आइआइटी मद्रास को भेजनी होगी, ताकि समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

दुर्घटना रोकने बनेगा डेटा आधारित खाका

योजना के तहत आइआइटी मद्रास द्वारा इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आइरेड) से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर दुर्घटना नियंत्रण का विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार करेगा। फिर इससे एआइ बेस्ड डैशबोर्ड से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान होगी। एफपीएस ऐप से जोखिमों की पहचान और टीपीएल ऐप आपातकालीन चिकित्सा तैयारियों का आकलन कर दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुधार किए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *